अंतरिक्षयान ‘होराइजन्स’

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के 'न्यू होराइजन्स' स्पेसक्राफ्ट ने प्लूटो के बेहद करीब पहुंचकर नया इतिहास रच दिया। लगभग एक दशक लंबे सफर के बाद मंगलवार को यह स्पेसक्राफ्ट प्लूटो की सतह से करीब 12,500 किलोमीटर ऊपर से गुजरा। यह दूरी न्यूयॉर्क से मुंबई के बीच की दूरी के बराबर है। 'न्यू होराइजन्स' ने प्लूटो से जुड़ी फोटोज और जानकारियां भी भेजी। पृथ्वी से प्लूटो की दूरी 7.5 अरब किलोमीटर है। स्पेसक्राफ्ट 58,536 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अपने मिशन की ओर बढ़ रहा है। न्यू होराइजन्स की स्पीड दुनिया के सबसे तेज उड़ने वाला प्लेन अमेरिकन आर्मी का एसआर-71 लॉकहीड से 16 गुना से भी ज्यादा है। एसआर-71 लॉकहीड की टॉप स्पीड 3,540 किलोमीटर प्रति घंटा है। 19 जनवरी, 2006 में 'न्यू होराइजन्स' को इस मिशन के लिए रवाना किया गया था।
 

प्लूटो की ग्रैविटी की मदद से बढ़ा रहा रफ्तार: 'न्यू होराइजन्स' अपनी रफ्तार बढ़ाने के लिए प्लूटो की ग्रैविटी (गुरुत्वाकर्षण) का ही इस्तेमाल करेगा और बाहरी सौर मंडल में अपना रास्ता बनाएगा।
 

2026 में पूरा होगा मिशन :मिशन प्लूटो के बाद ये क्वीपर बेल्ट जाएगा और 2020 तक इससे जुड़ी जानकारियां जुटाएगा। ये मिशन आधिकारिक तौर पर 2026 में पूरा होगा।
क्या है क्वीपर बेल्ट?
ये ग्रहों से बाहर सोलर सिस्टम (सौर मंडल) का ही एक हिस्सा है। क्वीपर बेल्ट तीन बौने ग्रहों-प्लूटो, हौमिया और मेकमेक का घर है। इस पर ग्रहों की ही तरह गोल और बड़े पिंड हैं। लेकिन इन्हें ग्रह नहीं माना जाता है।
 

प्लूटो के 'चांद' की भी जुटाएगा जानकारी :न्यू होराइजन्स टीम ने सोमवार को प्लूटो की 2,370 किलोमीटर चौड़ाई के बारे में जानकारी दी।यह स्पेसक्राफ्ट प्लूटो के साथ यह उसके पांच चंद्रमाओं (उपग्रहों) के बारे में भी जानकारी जुटाएगा। इस काम के लिए क्राफ्ट में कुल सात इक्विपमेंट लगाए गए हैं।
 

प्लूटो से छिन गया ग्रह का दर्जा
नासा ने जब मिशन 'न्यू होराइजन्स' रवाना किया था, उस समय प्लूटो को सोलर सिस्टम
(सौरमंडल) के नौंवे ग्रह का दर्जा हासिल था। इस मिशन के लिए स्पेसक्राफ्ट के रवाना होने के कुछ महीने बाद ही नए पिंडों की खोज को मान्यता देने और उन्हें नाम देने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसी इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन ने पहली बार ग्रहों की परिभाषा तय करने पर बहस छेड़ दी। इसके बाद प्लूटो से ग्रह का दर्जा छीन गया और इसकी पहचान क्वीपर बेल्ट के मलबे के ढेर में मौजूद एक बौने ग्रह की रह गई। अब इसे आधिकारिक तौर पर 'एस्ट्रॉएड नंबर 134340' से जाना जाता है।

 

विज्ञान के क्षेत्र

 विज्ञान के क्षेत्र

वाशिंगटन : साल 2014 3डी प्रिंटिंग और धूमकेतु पर उपग्रह के पदार्पण जैसी क्रांतिकारी खोजों का साल रहा और आने वाले साल में विज्ञान के क्षेत्र में महान आविष्कारों के होने की पूरी संभावना है.

विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिष्ठित शोध पत्रिका ‘नेचर’ के अनुसार, आने वाला साल भी नई खोजों वाला साबित होगा और साल की पहली बड़ी खबर मार्च में ब्रह्मांड की स्थापना का रहस्य खोजने के लिए चल रहे अभियान के तहत लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर के दो वर्ष के बाद दोबारा शुरू होने के साथ मिल सकती है.