इसरो

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है जिसका मुख्यालय बेंगालुरू कर्नाटकमें है। संस्थान में लगभग सत्रह हजार कर्मचारी एवं वैज्ञानिक कार्यरत हैं। संस्थान का मुख्य कार्य भारत के लिये अंतरिक्ष संबधी तकनीक उपलब्ध करवाना है। अन्तरिक्ष कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्यों में उपग्रहों, प्रमोचक यानों, परिज्ञापी राकेटों और भू-प्रणालियों का विकास शामिल है।
इसरो के वर्तमान निदेशक ए एस किरण कुमार हैं। आज भारत न सिर्फ अपने अंतरिक्ष संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम है बल्कि दुनिया के बहुत से देशों को अपनी अंतरिक्ष क्षमता से व्यापारिक और अन्य स्तरों पर सहयोग कर रहा है। इसरो वर्तमान में ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पी.एस.एल.वी.) एवं भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (जी.एस.एल.वी.) की सहायता से क्रमश: कृत्रिम एवं भू-स्थायी कृत्रिम उपग्रह प्रक्षेपित करता है।

संक्षिप्त रूप    इसरो
मालिक    भारत
स्थापित    15 अगस्त 1969 (47 वर्ष पहले)
(इनकोस्पर1962 के रूप में)
मुख्यालय    बेंगलुरू, भारत
प्राथमिक अंतरिक्ष बंदरगाह    सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरीकोटा, आंध्र प्रदेश
आदर्श वाक्य    मानव जाति की सेवा में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
प्रशासक    ए एस किरण कुमार, निदेशक
बजट    7927 करोड़ (2015-16)[1][2]
वेबसाइट    isro.gov.in

भारत का अंतरिक्षीय अनुभव बहुत पुराना है, जब रॉकेट को आतिशबाजी के रूप में पहली बार प्रयोग में लाया गया, जो की पडौसी देश चीन का तकनीकी आविष्कार था और तब दोनों देशों में रेशम मार्ग से विचारों एवं वस्तुओं का आदान प्रदान हुआ करता था। जब टीपू सुल्तान द्वारा मैसूर युद्ध में अंग्रेजों को खधेडने में रॉकेट के प्रयोग को देखकर विलियम कंग्रीव प्रभावित हुआ, तो उसने १८०४ में कंग्रीव रॉकेट का आविष्कार किया, जो की आज के आधुनिक तोपखानों की देन माना जाता है। १९४७ में अंग्रेजों की बेडियों से मुक्त होने के बाद, भारतीय वैज्ञानिक और राजनीतिज्ञ भारत की रॉकेट तकनीक के सुरक्षा क्षेत्र में उपयोग, एवं अनुसंधान एवं विकास की संभाव्यता की वजह से विख्यात हुए। भारत जनसांख्यिकीय दृष्टि से विशाल होने की वजह से, दूरसंचार के क्षेत्र में कृत्रिम उपग्रहों की प्रार्थमिक संभाव्यता को देखते हुए, भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की स्थापना की गई।

 

इसरो निजी क्षेत्र से जुड़ने को तैयार

 इसरो निजी क्षेत्र से जुड़ने को तैयार

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी अब भी नाबाद है और आगामी प्रक्षेपणों में चौके-छक्के जड़ कर वह टी-20 मैचों की गति से अपने जौहर दिखाने के लिए तैयार है.
    
अपनी तरह का पहला साहसिक कदम उठाते हुए इसरो अंतरिक्ष यानों के सिर्फ कुछ हिस्से बनाने के लिए नहीं बल्कि पूरे-पूरे उपग्रह बनाने के लिए निजी क्षेत्र के लिए दरवाजे खोल रहा है. अंतरिक्ष के क्षेत्र में यह इसरो की एक बड़ी छलांग है क्योंकि अब तक वह सभी उपग्रहों का निर्माण संस्था के भीतर ही करता आया है.