उच्च रक्तचाप

हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप, जिसे कभी कभी धमनी उच्च रक्तचाप भी कहते हैं, एक पुरानी चिकित्सीय स्थिति है जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव की इस वृद्धि के कारण, रक्त की धमनियों में रक्त का प्रवाह बनाये रखने के लिये दिल को सामान्य से अधिक काम करने की आवश्यकता पड़ती है। रक्तचाप में दो माप शामिल होती हैं, सिस्टोलिक और डायस्टोलिक, जो इस बात पर निर्भर करती है कि हृदय की मांसपेशियों में संकुचन (सिस्टोल) हो रहा है या धड़कनों के बीच में तनाव मुक्तता (डायस्टोल) हो रही है। आराम के समय पर सामान्य रक्तचाप 100-140 mmHg सिस्टोलिक (उच्चतम-रीडिंग) और 60-90 mmHg डायस्टोलिक (निचली-रीडिंग) की सीमा के भीतर होता है। उच्च रक्तचाप तब उपस्थित होता है यदि यह 90/140 mmHg पर या इसके ऊपर लगातार बना रहता है।

सामान्य बीपी में भी ज्यादा नमक होता है खतरनाक

आमतौर पर हम अपनी खुराक में नमक की मात्रा को लेकर तभी सचेत होते हैं, जब उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) की शिकायत हो। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सोच पूरी तरह गलत है। सामान्य रक्तचाप की स्थिति में भी खाने में ज्यादा नमक नुकसान पहुंचा सकता है। एक ताजा शोध में यह बात सामने आई है।

शोध के अनुसार रक्तचाप में बढ़ोतरी न होने पर भी नमक की ज्यादा मात्रा कुछ अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है।

एंटीबायोटिक दवाओं से अधिक गुण है लहसुन में!

एंटीबायोटिक दवाओं से अधिक गुण है लहसुन में!

लहसुन सिर्फ मसाले के रूप में खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाती बल्कि अब तो डॉक्‍टर भी मानने लगे है कि लहसुन कई बीमारियों में लाभदायक औषधि की तरह काम करता है। जर्मनी की हेल्थ एडवाइस एसोसिएशन के अनुसार लहसुन को प्रतिदिन के खाने में नियमित रूप से शामिल करना चाहिए। इसमे विटामिन ए,सी व सल्फाइड पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। लहसुन के ऐसे ही कुछ जबरदस्त औषधिय गुणों का वर्णन आयुर्वेद में भी मिलता है हम आपको बताने जा रहे हैं आयुर्वेद के खजाने से कुछ खास नुस्खे जो बीमारियों में रामबाण की तरह काम करते हैं।

दांतों के दर्द में फायदेमंद

हार्ट फेल होने से चली जाती है 23 प्रतिशत लोगों की जान

हार्ट फेल होने से चली जाती है 23 प्रतिशत लोगों की जान

हार्ट अटैक का मतलब होता है दिल की मांसपेशियों का बेहद कमजोर होना, जबकि हार्ट फेल होने का मतलब है कमजोर दिल. हार्ट अटैक तब होता है, जब दिल की मांसपेशियों के एक हिस्से को आक्सिजन से खून की सप्लाई में रुकावट हो जाती है भारत में 23 प्रतिशत मरीज़ ऐसे होते हैं जो दिल के दौरे का पता चलने के साल भर के अन्दर मर जाते हैं, एक खोज से पता चलता है, और यह भी पता चलता है कि यह देश अफ्रीका के दर 34 प्रतिशत, के बाद दूसरे नंबर पर है।

क्या है नोमोफोबिया

नोमोफोबिया

असल में फोबिया शब्द जो है वो ग्रीक भाषा के एक शब्द हाइड्रोफीबिया से आया है जिसका मतलब होता है पानी से सम्पर्क में आने का मानसिक भय और फोबिया किसी भी तरह का हो सकता है जिसका मतलब है अगर हमे किसी चीज़ का फोबिया है तो हम उस चीज़ के लिए मानसिक तौर पर थोड़े असहज है इसे किसी भी स्थान वस्तु या गतिविधि से जोड़ा जा सकता है और हमारी तकनीक की सदी यानि के इक्कीसवी सदी हो है उसमे टेक्नोलोज़ी के बढ़ते इस्तेमाल ने मानवीय जीवन को सुगम बनाने के साथ साथ कई तरह की मानसिक समस्याएं हमे सौगात में दी है जिसमे से नोमोबिया भी एक है और मेल ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक हम में से ६६ प्रतिशत लोग इस से पीड़ित है इसमें व्यक्ति

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