एडिक्शन

व्यसन या आसक्ति (Addiction) की विशेषता है कि दुष्परिणामों के बावजूद व्यक्ति को ड्रग/अल्कोहल की बाध्यकारी लत लग जाती है। व्यसन को एक जीर्ण मानसिक रोग भी कह सकते हैं।
मादक द्रव्य वैसे पदार्थ को कहते हैं जिनके सेवन से नशे का अनुभव होता है तथा लगातार सेवन करने से व्यक्ति उसका आदी बन जाता है।
हमारे समाज में कई प्रकार के मादक द्रव्यों का प्रचलन है जैसे- शराब, ह्वीस्की, रम, बीयर, महुआ, हंड़िया आदि सामाजिक मान्यता प्राप्त वैध पदार्थ हैं। अनेक अवैध पदार्थ भी काफी प्रचलित हैं जैसे- भाँग, गांजा, चरस, हेरोइन, ब्राउन सुगर तथा कोकिन आदि।
डाक्टरों द्वारा नींद के लिए या चिन्ता या तनाव के लिए लिखी दवाइयों का उपयोग भी मादक द्रव्यों के रूप में होता है।
तम्बाकूयुक्त पदार्थ जैसे सिगरेट, खैनी, जर्दा, गुटखा, बीड़ी आदि भी इनके अन्तर्गत आते हैं। इनके अलावे कुछ पदार्थों का भी प्रचलन देखा जाता है जैसे- कफ सीरप, फेन्सीडिल या कोरेक्स का सेवन।
वाष्पशील विलायक (वोलाटाइल सोलवेन्ट) यानि वैसे रासायनिक पदार्थों का सेवन जिनके वाष्प को श्वास द्वारा खींचने पर शराब के नशे से मिलता-जुलता असर होता है, जैसे-पेट्रोल, नेल पॉलिश रिमूभर, पेन्ट्स, ड्राई क्लीनींग सोल्यूसन आदि भी मादक पदार्थ हैं।

 

ख़तरनाक है सेक्स एडिक्शन

 ख़तरनाक है सेक्स एडिक्शन

एडिक्शन यानी किसी चीज़ की लत लग जाना. बात करें अगर सेक्स एडिक्शन की तो यह एक ऐसी समस्या है, जो शारीरिक रूप से तो नहीं, लेकिन मानसिक और सामाजिक रूप से इससे पीड़ित व्यक्ति को बहुत नुक़सान पहुंचा सकती है. इससे पीड़ित व्यक्ति की कामेच्छा इतनी बढ़ जाती है कि नियंत्रण से बाहर हो जाती है. कई बार मरीज़ को इस बात का पता तक नहीं होता कि वो सेक्स एडिक्ट हो गया हैं और उन्हें ट्रीटमेंट की ज़रूरत है. सेक्स एडिक्शन को पहचानकर इसका सही इलाज कैसे कराएं? इसके बारे में बता रहे हैं साइकियाट्रिस्ट, साइकोसेक्सुअल कंसंल्टेंट एंड काउंसलर डॉ. पवन सोनार.