कार्बोहाइड्रेट

कार्बोहाइड्रेट्स, कार्बनिक पदार्थ हैं जिसमें कार्बन, हाइड्रोजन व आक्सीजन होते है। इसमें हाइड्रोजन व आक्सीजन का अनुपात जल के समान होता है। कुछ कार्बोहाइड्रेट्स सजीवों के शरीर के रचनात्मक तत्वों का निर्माण करते हैं जैसे कि सेल्यूलोज, हेमीसेल्यूलोज, काइटिन तथा पेक्टिन। जबकि कुछ कार्बोहाइड्रेट्स उर्जा प्रदान करते हैं, जैसे कि मण्ड, शर्करा, ग्लूकोज़, ग्लाइकोजेन. कार्बोहाइड्रेट्स स्वाद में मीठा होते हैं। यह शरीर मे शक्ति उत्पन्न करने का प्रमुख स्रोत है। शरीर को शक्ति और गर्मी प्रदान करने के लिए चर्बी की भांति यह कार्य करता है। कार्बोहाइड्रेट्स चर्बी की अपेक्षा शरीर मे जल्दी पच जाते है। शरीर को कार्बोहाइड्रेट्स दो प्रकार से प्राप्त होते है, पहला माड़ी अर्थात स्टार्च तथा दूसरा चीनी अर्थात शुगर। गेहूं, ज्वार, मक्का, बाजरा, मोटे अनाज तथा चावल और दाल तथा जड़ो वाली सब्जियो मे पाए जाने वाले कार्बोहाइड्रेट्स को माड़ी कहा जाता है। केला, अमरूद, गन्ना, चुकंदर, खजूर, छुआरा, मुनक्का, अंजीर, शक्कर, शहद, मीठी सब्जिया, सभी मीठी खाद्य से प्राप्त होने वाले कार्बोहाइड्रेट्स अत्यधिक शक्तिशाली और स्वास्थ्य के लिय लाभदायक होते है परन्तु इनकी अधिकता अनेक खतरनाक जानलेवा रोगो को भी जन्म देती है जिसमे प्रमुख रूप से अजीर्ण, मधुमेह, अतिसार रोग होते है। इसमे अत्यधिक वजन बढ जाने से भी जीवन को खतरा उत्पन्न हो जाता है।

 

सेहत के लिए कितनी खतरनाक है ब्रेड

सेहत के लिए कितनी खतरनाक है ब्रेड

नई दिल्लीः ब्रेड हम लोगों की जिंदगी का एक अहम हिस्सा माना जाता है लगभग सभी घरों में लोग ब्रेड का सेवन करते हैं। कई घरों में तो ब्रेड के बिना नाश्ता ही नहीं होता, लेकिन क्या आप जानते हैं ये ब्रेड भी आपकी सेहत के लिए कितना नुकसानदेह हो सकती है, आइये देखिए ब्रेड खाने के क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं।

कमर की चर्बी कम करने के लिये पीजिये ढेर सारा पानी

प्रमुख लेखक तथा यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, यूएसए के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर टैमी चंग के अनुसार 'हमेशा हाईड्रेट रहना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है तथा हमारे अध्ययन से इस बात का पता चलता है कि इसका संबंध स्वस्थ व नियंत्रित वज़न से भी है।" 

चंग ने बताया कि 'हमारे अध्ययन के अनुसार जब हम जनसंख्या के स्तर पर मोटापे को संबोधित करते हैं तब हाइड्रेशन की तरफ अधिक ध्यान देना महत्वपूर्ण हो जाता है। निष्कर्षों से पता चला कि वे लोग जो मोटे हैं तथा जिनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) अधिक है उनमें पर्याप्त हाइड्रेशन नहीं पाया जाता।