खेती

कसूरी मेथी की खेती कैसे करे

मेथी की वैज्ञानिक खेती, बातें खेती की में मेथी, मेथी की किस्म, धनिये की खेती, हरी मेथी की खेती, पालक की खेती, मेथी की उन्नत किस्म, सोया मेथी की खेती

डाक्टर और वैज्ञानिक कई तरह की बीमारियों के इलाज के लिए भी कसूरी मेथी के इस्तेमाल की सलाह देते हैं. कई औषधीय गुणों से भरपूर इस मेथी का इस्तेमाल पुराने जमाने से ही पेटदर्द के साथसाथ कब्ज दूर करने और बलवर्धक औषधीय के रूप में होता आया है.

मेथी की बहुपयोगी पत्तियां सेहत के लिए फायदेमंद होने के साथसाथ खाने को लजीज बनाने में भी खास भूमिका निभाती हैं. खास तरह की खुशबू और स्वाद की वजह से मेथी का इस्तेमाल सब्जियों, परांठे, खाखरा, नान और कई तरह के खानों में होता है. Read More : कसूरी मेथी की खेती कैसे करे about कसूरी मेथी की खेती कैसे करे

करीपत्ता की खेती कैसे करे

करी पत्ता का दूसरा नाम क्या है, कड़ी पत्ता के नुकसान, करी पत्ता के नुकसान, कड़ी पत्ता का पेड़ कैसा होता है, करी पत्ता किसे कहते हैं, खाली पेट करी पत्ते खाने के फायदे, मीठा नीम औषधीय उपयोग, करी पत्ता बालों के लिए

कढ़ी पत्ते का पेड़ ; अन्य नाम: बर्गेरा कोएनिजी, चल्कास कोएनिजी उष्णकटिबंधीय तथा उप-उष्णकटिबंधीय प्रदेशों में पाया जाने वाला रुतासी परिवार का एक पेड़ है, जो मूलतः भारत का देशज है। अकसर रसेदार व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले इसके पत्तों को "कढ़ी पत्ता" कहते हैं। कुछ लोग इसे "मीठी नीम की पत्तियां" भी कहते हैं। इसके तमिल नाम का अर्थ है, 'वो पत्तियां जिनका इस्तेमाल रसेदार व्यंजनों में होता है'। कन्नड़ भाषा में इसका शब्दार्थ निकलता है - "काला नीम", क्योंकि इसकी पत्तियां देखने में कड़वे नीम की पत्तियों से मिलती-जुलती हैं। लेकिन इस कढ़ी पत्ते के पेड़ का नीम के पेड़ से कोई संबंध नहीं है। असल में कढ़ Read More : करीपत्ता की खेती कैसे करे about करीपत्ता की खेती कैसे करे

खसखस की खेती कैसे करे

खसखस की खेती कैसे करे

खस की खेती एक बढ़िया फसल है, जिससे कई किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं. इसकी खेती सरल है और मार्केट में अच्छी डिमांड भी है. खस की फसल से आप कितनी कमाई कर सकते हैं और इसकी फसल कैसे लगायें, आगे पढ़ें पूरी जानकरी. Read More : खसखस की खेती कैसे करे about खसखस की खेती कैसे करे

अजवायन की खेती कैसे करे

अजवायन की खेती कैसे करे

भूमि अजवाइन एक रबी की मसाला फसल हैं। इसकी खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट मिटटी सर्वोत्तम होती हैं। सामान्यतः बलुई दोमट मिटटी जिसका पि.एच. मान 6.5 से 8.2 तक है, में अजवाइन सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं। जहां भूमि में नमी कम हो वहां सिंचाई की व्यवस्था आवश्यक हैं।

 
खेती की तैयारी: खेत तैयार करने के लिए मिटटी पलटने वाले हल से जुताई करें तथा इसके बाद 2 जुताई देशी हल से कर खेत को भली-भांति तैयार करें। अजवाइन का बीज बारीक़ होता हैं। अतः खेत की मिट्टी को अच्छी तरह भरभूरा होने तक जुताई करें। Read More : अजवायन की खेती कैसे करे about अजवायन की खेती कैसे करे

खाद में नाइट्रोजन की भूमिका

खाद में नाइट्रोजन की भूमिका

नाइट्रोजन तत्व की पहचान सर्वप्रथम 1772 ई. में रदरफोर्ड और शेले ने स्वतंत्र रूप से की। शेले ने उसी वर्ष यह स्थापित किया कि वायु में मुख्यत: दो गैसें उपस्थित हैं, जिसमें एक सक्रिय तथा दूसरी निष्क्रिय है। तभी प्रसिद्ध फ्रांसीसी वैज्ञानिक लाव्वाज़्ये ने नाइट्रोजन गैस को ऑक्सीजन (सक्रिय अंश) से अलग कर इसका नाम 'ऐजोट' रखा। 1790 में शाप्टाल (Chaptal) ने इसे नाइट्रोजन नाम दिया। Read More : खाद में नाइट्रोजन की भूमिका about खाद में नाइट्रोजन की भूमिका

केंचुआ खाद की विशेषताएँ

केंचुआ खाद

इस खाद में बदबू नहीं होती है, तथा मक्खी, मच्छर भी नहीं बढ़ते है जिससे वातावरण स्वस्थ रहता है। इससे सूक्ष्म पोषित तत्वों के साथ-साथ नाइट्रोजन 2 से 3 प्रतिशत, फास्फोरस 1 से 2 प्रतिशत, पोटाश 1 से 2 प्रतिशत मिलता है। Read More : केंचुआ खाद की विशेषताएँ about केंचुआ खाद की विशेषताएँ

जल प्रबंधन क्या है?

जल प्रबंधन

धरातलीय जल या सतही जल पृथ्वी की सतह पर पाया जाने वाला पानी है जो गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में ढाल का अनुसरण करते हुए सरिताओं या नदियों में प्रवाहित हो रहा है अथवा पोखरों, तालाबों और झीलों या मीठे पानी की आर्द्रभूमियों में स्थित है। किसी जलसम्भर में सतह के जल की प्राकृतिक रूप से वर्षण और हिमनदों के पिघलने से पूर्ति होती है और वह प्राकृतिक रूप से ही महासागरों में निर्वाह, सतह से वाष्पीकरण और पृथ्वी के नीचे की ओर रिसाव के द्वारा खो जाता है।
Read More : जल प्रबंधन क्या है? about जल प्रबंधन क्या है?

जैंविक खादों का उपयोग आज समय की आवश्यकता क्यों है?

मृदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने वाले रसायनिक उर्वरक काफी महंगे होते हैं और इनका उत्पादन अनवीकरणीय पेट्रोलियम फीडस्टॉक से किया जाता है जो धीरे-धीरे कम हो रहा है। रसायनिक खादों का निरंतर उपयोग मृदा के लिए हानिकारक होता है। उदाहरण के लिए, नाइट्रोजनी खाद यूरिया का अत्यधिक उपयोग मृदा की संरचना को नष्ट कर देता है। इस प्रकार मृदा, वायु और जल जैसे अपरदनकारी कारकों से क्षरण के प्रति संवेदनशील हो जाती है। रसायनिक खादें सतह और भूमिगत जल प्रदूषण के लिए भी उत्तरदायी होती हैं। इसके अतिरिक्त, नाइट्रोजनी खादों के प्रयोग से फसलोंं पर रोग और नाशीजीवों के प्रकोप की भी संभावना रहती है। रसायनिक खादों के निरंतर प Read More : जैंविक खादों का उपयोग आज समय की आवश्यकता क्यों है? about जैंविक खादों का उपयोग आज समय की आवश्यकता क्यों है?

गेंदा की खेती इनकम का अच्छा स्रोत

गेंदा के कुछ प्रजातियों जैसे- हजारा और पांवर प्रजाति की फसल वर्ष भर की जा सकती है. एक फसल के खत्म होते ही दूसरी फसल के लिए पौध तैयार कर ली जाती है. इस खेती में जहां लागत काफी कम होती हैं, वहीं आमदनी काफी अधिक होती है. गेंदा की फसल ढाई से तीन माह में तैयार हो जाती है. इसकी फसल दो महीने में प्राप्त की जा सकती है. यदि अपना निजी खेत हैं तो एक बीघा में लागत एक हजार से डेढ़ हजार रुपये की लगती है, वहीं सिंचाई की भी अधिक जरूरत नहीं होती. मात्र दो से तीन सिंचाई करने से ही खेती लहलहाने लगती है, जबकि पैदावार ढाई से तीन कुंटल तक प्रति बीघा तक हो जाती है. Read More : गेंदा की खेती इनकम का अच्छा स्रोत about गेंदा की खेती इनकम का अच्छा स्रोत

बैगन की खेती

गांवखेडी देवी के किसान फूलसिंह के लिए बैंगन की खेती खुशहाली लेकर आई है। वे बैंगन की बाड़ी से दो लाख रुपए बीघा तक कमाई कर रहे हैं। एक बार दिल्ली यात्रा के दौरान सब्जी मंडी में जाना हुआ। वहां बैंगन के भाव 40 रुपए किलो थे। इन भावों ने उन्हें बैंगन की बाड़ी करने के लिए प्रेरित किया। 

उन्होंने वैज्ञानिकों से मशविरा कर मिट्टी और पानी की जांच के बाद खेती शुरू की। उन्होंने कम समय में तैयार होने वाली और आठ माह तक उत्पादन देने वाली बैंगन की बीई 706 किस्म लगाई। दो साल पहले एक बीघा में 2 लाख रुपए का मुनाफा हुआ। बाद में उन्होंने इसे पांच बीघा में लगाया है।  Read More : बैगन की खेती about बैगन की खेती

Pages