खाद में नाइट्रोजन की भूमिका

खाद में नाइट्रोजन की भूमिका

नाइट्रोजन तत्व की पहचान सर्वप्रथम 1772 ई. में रदरफोर्ड और शेले ने स्वतंत्र रूप से की। शेले ने उसी वर्ष यह स्थापित किया कि वायु में मुख्यत: दो गैसें उपस्थित हैं, जिसमें एक सक्रिय तथा दूसरी निष्क्रिय है। तभी प्रसिद्ध फ्रांसीसी वैज्ञानिक लाव्वाज़्ये ने नाइट्रोजन गैस को ऑक्सीजन (सक्रिय अंश) से अलग कर इसका नाम 'ऐजोट' रखा। 1790 में शाप्टाल (Chaptal) ने इसे नाइट्रोजन नाम दिया।

खेती में ज्यादा खर्चा और उपज के मूल्य (मुख्यत: अनाज) में कमी-यही कारण है कि अधिक फसल होने के बाद भी किसान का आर्थिक लाभ नहीं बढ़ा है। इसके विपरीत रासायनिक खाद, कीटनाशक एवं संकरित बीज की खातिर लिया गया कर्जा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है जो किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर रहा है। साथ ही इनके उपयोग से भूमि की सजीवता की हत्या हो रही है।

इस कर्जे से मुक्ति का एक ही उपाय है। किसान बाजार आधारित रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का कम से कम प्रयोग करे। अपने खेत अथवा परिसर में उत्पन्न होने वाले कूड़े, कचरे एवं गोबर से अच्छा खाद बनाकर एवं गोमूत्र से अच्छा कीटरोधक बनाकर उसका उपयोग फसल उत्पादन एवं फसल रक्षण के लिए करें। किसानों द्वारा गङ्ढे में बनाई गई खाद अथवा गोबर के ढेर से निकाली गई खाद पूर्णत: पकी हुई खाद न होने की वजह से प्राय: उसके अपेक्षित परिणाम फसल पर नहीं होते जिसकी वजह से उन्हें रासायनिक खाद डालने पर मजबूर होना पड़ता है। हमारे खेत में उत्पन्न होनेवाले कूड़े कचरे का उपयोग करके अच्छी खाद कैसे बनाई जाए इस पर ध्यानं दे कर भारी खर्च  से बचा जा सकता है .

मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिये एक उपजाऊ जमीन का होना सबसे जरुरी है। उपजाऊ जमीन एक जीवित जीव कि तरह है जिसे अपनी उत्पादकता बढाने के लिए निरंतर पोषण ली आवश्यकता है। कार्बनिक पदार्थों से इस प्रकार का पोषण प्राप्त किया जा सकता है।

निर्देश: 1. अपनी मिट्टी की खाद में नाइट्रोजन की ज्यादा मात्र होती है और आपकी मिट्टी के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व है। खाद को फावड़ा और टिलर के साथ मिट्टी में मिलाना ज्यादा जरूरी है न कि खाद को उपर से डालना। आप अपने घर कि खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं या बाजार से भी खरीद सकते हैं।

2. गाय या घोड़े कि खाद अपनी मिट्टी में इस्तेमाल करें। यह काम में अच्छी तरह से सुनिश्चित किया जा सकता है। इस खाद में नाइट्रोजन कि प्रचुर मात्रा होती है, जो पौधों में हरी पत्तियों के विकास को प्रोत्साहित करती है।

3. रोग मुक्त मिट्टी के लिए कटे हुए पत्ते भी मिटटी में मिला दें। यह ध्यान रहे की इन पत्तों में सड़ांध या कवक शामिल नहीं हो, अन्यथा यह मिटटी को ख़राब कर सकते हैं। आप एक फावड़े से इन पत्तों को मिट्टी में मिला सकते हैं। आप अपने घास काटने वाले यंत्र से भी पत्ते काट कर सकते हैं।

4. ज्यादा गीली या ज्यादा सूखी मिटटी में कार्बनिक पदार्थ मिलाने से बचें। तब तक मिटटी में कुछ नहीं मिलाएं जब तक कि वह भुरभुरी न हो जाये।

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