भारत में प्रभावी जल प्रबंधन की जरूरत

भारत में भी वही तमाम समस्याएं हैं जिसमें पानी की बचत कम, बर्बादी ज्यादा है। यह भी सच्चाई है किबढ़ती आबादी का दबाव, प्रकृति से छेड़छाड़ और कुप्रबंधन भी जल संकट का एक कारण है। पिछले कुछ सालों सेअनियमित मानसून और वर्षा ने भी जल संकट और बढ़ा दिया है। इस संकट ने जल संरक्षण के लिए कई राज्यों कीसरकारों को परंपरागत तरीकों को अपनाने को मजबूर कर दिया है। देश भर में छोटे- छोटे बांधों के निर्माण औरतालाब बनाने की पहल की गयी है। इससे पेयजल और सिंचाई की समस्या पर कुछ हद तक काबू पाया जा सका है।भारत में तीस प्रतिशत से अधिक आबादी शहरों में रहती है। आवास और शहरी विकास मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं किदेश के लगभग दो सौ शहरों में जल और बेकार पडे पानी के उचित प्रबंधन की ओर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।इसके कारण सतही जल को प्रदूषण से बचाने के उपाय भी सार्थक नहीं हो पा रहे हैं। खुद जल संसाधन मंत्रालय भीमानता है कि ताजा जल प्रबंधन की चुनौतियों लगातार बढती जा रही है। सीमित जल संसाधन को कृषि, नगर निकायोंऔर पर्यावरणीय उपयोग के लिए मांग, गुणवत्तापूर्ण जल और आपूर्ति के बीच समन्वय की जरूरत है।

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