खेती

देशी केंचुए मिटटी में किस तरह काम करते हैं और इनके काम का क्या फायदा होता है ?

देशी केंचुए

किसान अपने खेतो में वो सब कुछ करता है जो उसकी फसल एवं उत्पादन के लिए आवश्यक है पर वह कुछ गलतियों उनके द्वरा हो जाती है जिससे उत्पादन में कमी और मिट्टी की गुणवत्ता पर बुरा असर पढता है मिट्टी की गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए हमें मिट्टी को पलते रहना चाहिए, मिट्टी ऊपर की मिट्टी नीचे नीचे की ऊपर ऊपर की नीचे ,नीचे की ऊपर ये केंचुआ ही करता है, केंचुआ किसान का सबसे अच्छा दोस्त है, एक केंचुआ साल भर जिंदा रहे तो एक वर्ष मे 20 मीट्रिक टन मिट्टी को उल्ट पलट कर देता है और उतनी ही मिट्टी को ट्रैक्टर से उल्ट पलट करना पड़े तो हजारो रूपये का डीजल लग जाता है! Read More : देशी केंचुए मिटटी में किस तरह काम करते हैं और इनके काम का क्या फायदा होता है ? about देशी केंचुए मिटटी में किस तरह काम करते हैं और इनके काम का क्या फायदा होता है ?

ह्यूमस की प्राप्ति के दो स्रोत हैं

किसी एक भूमि में बारबार फसल के उगाने और उसमें खाद न देने से कुछ समय के बाद भूमि अनुत्पादक और ऊसर हो जाती है। भूमि की उर्वरता के नाश होने का प्रमुख कारण भूमि से उस पदार्थ का निकल जाना है जिसका नाम 'ह्यूमस (Humus) दिया गया है। ह्यूमस कार्बनिक या अखनिज पदार्थ है जिसकी उपस्थिति से ही भूमि उर्वर होती है। वस्तुतः ह्यूमस वानस्पतिक और जांतव पदार्थों के विघटन से बनता है। सामान्य हरी खाद, गोबर, कंपोस्ट इत्यादि खादों और पेड़ पौधों, जंतुओं और सूक्ष्म जीवाणुओं से यह बनता है। ह्यूमस के अभाव में मिट्टी मृत और निष्क्रिय हो जाती है और उसमें कोई पेड़ पौधे नहीं उगते। Read More : ह्यूमस की प्राप्ति के दो स्रोत हैं about ह्यूमस की प्राप्ति के दो स्रोत हैं

नीलगाय के आतंक से न हों परेशान

अन्नदाताओं को अब नीलगाय के आतंक से परेशान होने की जरूरत नहीं है। अब उन्हें बिना मारे ही इनके आतंक से छुटकारा मिलेगा, वहीं फसलों की भी सुरक्षा होगी। नीलगाय को खेतों की ओर आने से रोकने के लिए हर्बल घोल तैयार किया जाता है जिसके प्रयोग करनें से नीलगाय फसलों को नुकसान नहीं पहुचती है Read More : नीलगाय के आतंक से न हों परेशान about नीलगाय के आतंक से न हों परेशान

सेब में पोटेशियम (K) की भूमिका

सेब में पोटेशियम (K) की भूमिका

पोटेशियम एक प्राथमिक सेब का पोषक तत्व है, जो उच्च गुणवत्ता वाले फल और अधिकतम पैदावार प्राप्त करने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है| पोटेशियम नाइट्रोजन के बाद  पौधों के लिए ज़रूरी दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व है जो कई वनस्पति  विकास की प्रक्रिया के लिए आवश्यक है। सेब के पेड़ किसी भी अन्य पोषक तत्वों से अधिक  मात्रा में पोटेशियम को अवशोषित करते है|  सेब के पेड़ को नाइट्रोजन की तुलना में पोटेशियम की लगभग दोगुनी मात्रा की आवश्यकता होती है। अधिक पैदावार और गुणवत्ता के लिए फलों को पोटेशियम की उच्च मात्रा की आवश्यकता होती है। पोटेशियम पौधों के किसी भी भाग को नहीं बनता है, इसलिए इसकी भूमिका अप्रत् Read More : सेब में पोटेशियम (K) की भूमिका about सेब में पोटेशियम (K) की भूमिका

नई राष्ट्रीय जल नीति जरुरी

देश में पिछले 70 सालों में तीन राष्ट्रीय जल नीतियां बनी। पहली नीति 1987 में बनी जबकि 2002 में  दूसरीऔर 2012 में तीसरी जल नीति बनी। इसके अलावा 14 राज्‍यों ने अपनी जलनीति बना ली है। बाकी राज्य तैयार करनेकी प्रक्रिया में हैं। इस राष्ट्रीय नीति में "जल को एक प्राकृतिक संसाधन मानते हुए इसे जीवन, जीविका, खाद्य सुरक्षाऔर निरंतर विकास का आधार माना गया है।" नीति में जल के उपयोग और आवंटन में समानता तथा सामाजिकन्याय का नियम अपनाए जाने की बात कही गई है। मंत्रालय का कहना है कि भारत के बड़े हिस्से में पहले ही जलकी कमी हो चुकी है। जनसंख्यावृद्धि, शहरीकरण और जीवनशैली में बदलाव से जल की मांग तेजी से बढने के Read More : नई राष्ट्रीय जल नीति जरुरी about नई राष्ट्रीय जल नीति जरुरी

यूरिया का संतुलित उपयोग

यूरिया का संतुलित

देश में साल दर साल बढ़ते कृषि उत्पादन और सतत् खाद्य सुरक्षा में फसलों के पोषण की अहम भूमिका है। संतुलित पोषण से ऊर्जावान खेत किसान को अधिकाधिक उपज की भेंट देते हैं। नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश मुख्य पोषक तत्व हैं, जो अधिकांश खेतों में लगभग अनिवार्य रूप से लगाए जाते हैं। इसके अलावा सल्फर, जिंक और बोरोन कुछ महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व हैं, जिन्हें भूमि की जरूरत के हिसाब से किसान खेतों में डालते हैं। इन सबके बीच यदि सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व की बात करें तो नाइट्रोजन का नाम सबसे ऊपर आता है। खेतों में नाइट्रोजन की आपूर्ति मुख्य रूप से यूरिया नामक उर्वरक द्वारा की जाती है। यूरिया में 46 प्रतिशत Read More : यूरिया का संतुलित उपयोग about यूरिया का संतुलित उपयोग

पानी के उचित प्रबंधन की जरूरत

पानी के उचित

इजराइल के मुकाबले भारत में जल की उपलब्धता पर्याप्त है। लेकिन वहां का जल प्रबंधन हमसे कहीं ज्यादाबेहतर है। इजराइल में खेती, उद्योग, सिंचाई आदि कार्यों में रिसाइकिल्ड पानी का उपयोग अधिक होता है।  इसीलिएउस देश के लोगों को पानी की दिक्कत का सामना नहीं करना पडता। भारत जैसे विकासशील देश में 80% आबादी कीपानी की जरूरत भूजल से पूरी होती है और इस सच्चाई से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि उपयोग में लाया जारहा भूजल प्रदूषित होता है। कई देश, खासकर अफ्रीका तथा खाड़ी के देशों में भीषण जल संकट है। प्राप्त जानकारी केअनुसार दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे करोड़ों लोग जबरदस्त जल संकट का सामना कर रहे हैं  Read More : पानी के उचित प्रबंधन की जरूरत about पानी के उचित प्रबंधन की जरूरत

मिट्टी में ‘हीमोग्लोबिन’ की कमी

मिट्टी में ‘हीमोग्लोबिन’ की कमी

हरित क्रांति के बाद खाद्यान्न उत्पादन में तो देश आत्मनिर्भर तो हो गया, परंतु रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की सेहत खराब हो गई। खेती के लिए जरूरी मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी के कारण फसल का दाना (बीज) कमजोर होने लगा है। इसके लिए खेतों के किनारे पक्षी आश्रय स्थल बनाकर व मेड़ पर फूलों के पौधे लगाकर फिर से मिट्टी की सेहत ठीक कर सकते हैं। मिट्टी में नाइट्रोजन की वही भूमिका होती है, जो मनुष्य की शरीर में हीमोग्लोबिन की होती है।

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गुलाब के पौधों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है ये प्राकृतिक खाद

गुलाब के पौधों

अगर आप घर सजाने के शौकीन हैं तो गुलाब का कम से कम एक पौधा तो आपके घर जरूर होगा और इसमें खूब सारे फूल खिलते भी देखना चाहते होंगे. तो इसके लिए रसायनिक खाद की बजाय प्राकृतिक खाद का इस्तेामाल करें. घर में मौजूद कुछ चीजें ही घर में खूबसूरत गुलाब महकाने के लिए काफी हैं. जानिए इस बारे में -
1. अगर आपके पास कॉफी सीड्स हैं तो इनको दरदरा पीसकर गुलाब के पौधों के लिए खाद के रूप में इस्तेमाल करें. इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम, नाइट्रोजन और दूसरे जरूरी तत्व मौजूद होते हैं जो पौधों को बढ़ने में मदद करते हैं. Read More : गुलाब के पौधों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है ये प्राकृतिक खाद about गुलाब के पौधों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है ये प्राकृतिक खाद

रसायनिक खेती से मिटटी का वो कोनसा अंग या भाग खत्म हुआ जिसे वापस लाने को हम जैविक खेती करने चलें हैं?

रसायनिक खेती से मिटटी का वो कोनसा अंग या भाग खत्म हुआ जिसे वापस लाने को हम जैविक खेती करने चलें हैं?

रासायनिक खेती से खेतों में स्थापित सूक्ष्मतंत्र नष्ट हो गया. इससे खेतों में कार्बनिक पदार्थ, सूक्ष्मजीवों की संख्या और लाभदायक जीव जैसे केंचुए आदि नष्ट हो गए. धीरे धीरे खेतों में कार्बन और नाइट्रोजन का अनुपात बिगड़ गया. तथा आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा में भी कमी आई.
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