खेती

तोरई की खेती कब करें और पाये अधिक मुनाफा

 तोरई की खेती कब करें और पाये अधिक मुनाफा

भूमि का प्रयोग करें इस प्रकार 

इसको सभी  प्रकार की मिट्टियों  में उगाया जा सकता है परन्तु  उचित जल निकास धारण क्षमता वाली जीवांश युक्त हलकी दोमट भूमि इसकी सफल खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गई है वैसे उदासीन पी.एच. मान वाली भूमि इसेक लिए अच्छी रहती है नदियों के किनारे वाली भूमि इसकी खेती के लिए उपयुक्त रहती है कुछ अम्लीय भूमि में इसकी खेती की जा सकती है पहली जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करें इसके बाद २-३ बार हैरो या कल्टीवेटर चलाएँ | खेत कि तैयारी में मिट्टी भुरभुरी हो जानी  चाहिए  यह फसल अधिक निराइ  की फ

तोरई की खेती कब की जाती है ?

पपीते की खेती की विधि

पपीते की खेती की विधि

पपीता सबसे कम समय में फल देने वाला पेड है इसलिए कोई भी इसे लगाना पसंद करता है, पपीता न केवल सरलता से उगाया जाने वाला फल है, बल्कि जल्‍दी लाभ देने वाला फल भी है, यह स्‍वास्‍थवर्धक तथा लोक प्रिय है, इसी से इसे अमृत घट भी कहा जाता है, पपीता में कई पाचक इन्‍जाइम भी पाये जाते है तथा इसके ताजे फलों को सेवन करने से लम्‍बी कब्‍जियत की बिमारी भी दूर की जा सकती है।

जलवायु 

सेब की खेती कैसे करें सेब खाने के फायदे जानकर रह जायगे हैरान

सेब की खेती कैसे करें सेब खाने के फायदे जानकर रह जायगे हैरान

शिमला: सेब की खेती के लिए एशिया का सबसे अमीर और पूरी दुनिया में मशहूर हिमाचल का ये गांव है। जानकारी के मुताबिक शिमला जिले के मड़ावग गांव को एशिया का सबसे अमीर गांव भी माना जाता है। यहां के सेबों को विदेशों में काफी पसंद किया जाता है। बता दें कि सेब की खेती ने इस गांव को डेवलप बना दिया है

क्या आपको पता है कि सेब सबसे पहले धरती पर कहां उगे? नहीं मालूम? तो, हम आपको बताते हैं. और बताते हैं सेब की कहानी.

तोरई की उन्नत तरीके से करें खेती, पाये और भी फायदा

मुझे उम्मीद है की आपने तोरई की खेती के बारे में अच्छे से समझ लिया होगा अगर आपका कोई सवाल है  तो आप हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है या आप हमें अच्छी बीज के लिए संपर्क कर सकते हैतोरई की खेती के लिए उचित भूमि का प्रयोग 

धान की उन्नत तरीके से करें खेती

धान की उन्नत तरीके से करें खेती

 धान की खेती के लिए भूमि की तैयारी

गर्मी में उपयुक्त समय मिलने पर खेत की गहरी जुताई मिट्टी पलट हल से अवश्य कर लें। मेड़ों की सफाई अवश्य करें। गोबर या कम्पोस्ट की खाद 10 से 12 टन प्रति हेक्टर अंतिम जुताई या वर्षा पूर्व खेत में फैलाकर मिलायें।

धान की खेती की प्रचलित पद्धतियां

अ. सीधे बीज बोने की पद्धतियां- खेत में सीधे बीज बोजकर निम्न तरह से धान की खेती की जाती है-

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