खेती

मूंगफली की खेती

मूंगफली की खेती

 मूँगफली खाकर हम अनजाने में ही इतने पोषक तत्व ग्रहण कर लेते हैं जिन का हमारे शरीर को बहुत फायदा होता है , आधे मुट्ठी मूगफली में 426 कैलोरीज़ होती हैं, 15 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है, 17 ग्राम प्रोटीन होता है और 35 ग्राम वसा होती है। इसमें विटामिन ई, के और बी6 भी प्रचूर मात्रा में होती है। यह आयरन, नियासिन, फोलेट, कैल्शियम और जि़ंक का अच्छा स्रोत हैं।मूँगफली वानस्पतिक प्रोटीन का एक सस्ता स्रोत हैं। इसमें प्रोटीन की मात्रा मांस की तुलना में १.३ गुना, अण्डों से २.५ गुना एवं फलों से ८ गुना अधिक होती है। मूँगफली वस्तुतः पोषक तत्त्वों की अप्रतिम खान है।  Read More : मूंगफली की खेती about मूंगफली की खेती

केले की खेती

केले की खेती

जलवायु-भूमि

केला की खेती के लिए गर्मतर एवं समजलवायु उत्तम होती है अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में केले की खेती सफल रहती है। जीवंशयुक्त दोमट, मटियार दोमट भूमि, जिससे जल निकास उत्तम हो, उपयुक्त मानी जाती है।

खेती की तैयारी 

समतल खेत को चार-पांच गहरी जुताई करके भुरभुरा बना लेना चाहिए। खेत की तैयारी करने के बाद समतल खेत में लाइनों में गड्ढे तैयार करके रोपाई की जाती है। केले की रोपाई के लिए खेत की तैयारी के बाद लाइनों में गड्ढे 1.5 मीटर लम्बे, 1.5 मीटर चौड़े गहरा खोद कर छोड़ दें, जिससे धूप लग जाए। 

पौधरोपण  Read More : केले की खेती about केले की खेती

अनार की खेती कैसे करें

अनार  की खेती कैसे करें

अनार का पौधा तीन-चार साल में पेड़ बनकर फल देने लगता है और एक पेड़ करीब 25 वर्ष तक फल देता है। साथ ही अब तक के अनुसंधान के मुताबिक प्रति हैक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने के लिए अगर दो पौधों के बीच की दूरी को कम कर दिया जाए तो प्रति पेड़ पैदावार पर कोई असर नहीं पड़ता है। लेकिन ज्यादा पेड़ होने के कारण प्रति हैक्टेयर उत्पादन करीब डेढ़ गुना हो जाता है। परंपरागत तरीके से अनार के पौधों की रोपाई करने पर एक हैक्टेयर में 400 पौधे ही लग पाते हैं जबकि नए अनुसंधान के अनुसार पांच गुणा तीन मीटर में अनार के पौधों की रोपाई की जाए तो पौधों के फलने-फूलने पर कोई असर नहीं पड़ेगा और एक हैक्टेयर में छह सौ पौधे लगने से Read More : अनार की खेती कैसे करें about अनार की खेती कैसे करें

लीची की खेती

लीची की खेती

लीची के लिए गहरी दोमट मिट्टी उत्तम रहती है। मुजफ्फरनगर के आसपास कैल्शियम बाहुल्य वाली भूमि पायी जाती है, जिसमें जड़ों का विकास अच्छा होता है। इसी प्रकार की भूमि पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया तथा पडरौना, महाराजगंज जनपद के कुछ क्षेत्रों में पायी जाती है तथा बलुई या चिकनी मिट्टी में यह काफी पैदावार देती है। किन्तु जल-निकास का उचित प्रबंध होना चाहिए तथा भूमि कड़ी परत या चट्टान वाली नहीं होना चाहिए, क्योंकि अम्लीय मिट्टी में लीची का पौधा काफी तेज गति से बढ़ता है तथा मिट्टी में चूने की कमी नहीं होनी चाहिए। फ्लोरिडा में लीची के लिए 5.0 से 5.5 पी.एच. Read More : लीची की खेती about लीची की खेती

करेला की खेती कैसे करें करेला की खेती को करने के उन्नत तरीके जानें

करेला की खेती कैसे करें करेला की खेती को करने के उन्नत तरीके जानें

हमारे देश में करेला की खेती काफी समय से होती आ रही है । इसका ग्रीष्मकालीन सब्जियों में महत्वपूर्ण स्थान है । पौष्टिकता एवं अपने औषधीय गुणों के कारण यह काफी लोकप्रिय है । आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के अनुसार मधुमेह के रोगियों के लिये करेला की सब्जी का सेवन लाभदायक रहता है । इसके फलों से सब्जी बनाई जाती है । इसके छोटे-छोटे टुकड़े करके धूप में सुखाकर रख लिया जाता हैं, जिनका बाद में बेमौसम की सब्जी के रूप में भी उपयोग किया जाता है ।

करेला की खेती के लिये जलवायु क्या होनी चाहिए  Read More : करेला की खेती कैसे करें करेला की खेती को करने के उन्नत तरीके जानें about करेला की खेती कैसे करें करेला की खेती को करने के उन्नत तरीके जानें

चाय की खेती कैसे करें

चाय की खेती कैसे करें

चाय (अंग्रेज़ी:Tea) एक महत्त्वपूर्ण पेय पदार्थ है और संसार के अधिकांश लोग इसे पसन्द करते हैं। चाय मुलायम एवं नयी पत्ती, बन्द वानस्पतिक कली आदि से तैयार की जाती है। चाय में मुख्यतः कैफ़ीन का अंश पाया जाता है। इसकी ताज़ी पत्तियों में टैनिन की मात्रा 25.1% पायी जाती है, जबकि संसाधित पत्तियों में टैनिन की मात्रा 13.3% तक होती है। सर्वोत्तम चाय कलियों से बनायी जाती है। चाय की खेती में 'लाल किट्ट' तथा 'शैवाल' जनित 'चित्ती रोग' का प्रकोप होता है। चाय के लिए न्यूनतम वर्षा 125 से 150 सेमी होना चाहिए तथा तापमान 21°C से 27°C तक उपयुक्त होता है। विश्व में चाय के उत्पादन में भा Read More : चाय की खेती कैसे करें about चाय की खेती कैसे करें

धान की खेती प्रमुख रोग नियत्रंण प्रबंधन

धान की खेती प्रमुख रोग नियत्रंण प्रबंधन

विश्व में धान (चावल) के कुल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा कम आय  वाले देशों में छोटे स्तर के किसानों द्वारा उगाया जाता है। इसलिए विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास और जीवन में सुधार के लिए दक्ष और उत्पादक धान (चावल) आधारित पद्धति आवश्यक है। अतंर्राष्ट्रीय धान (चावल) वर्ष 2004 ने धान (चावल) को केन्द्र बिंदु मानकर कृषि, खाद्य सुरक्षा, पोषण, कृषि जैव विविधता,पर्यावरण, संस्कृति, आर्थिकी, विज्ञान, लिंगभेद और रोजगार के परस्पर संबंधों को नये नजरिये से देखा है। अंतर्राष्ट्रीय धान (चावल) वर्ष, ‘सूचना प्रदाता’ के रूप में हमारे समक्ष है ताकि सूचना आदान-प्रदान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और ठोस Read More : धान की खेती प्रमुख रोग नियत्रंण प्रबंधन about धान की खेती प्रमुख रोग नियत्रंण प्रबंधन

सिंघाड़े की खेती में अधिक फायदा

सिंघाड़े की खेती में अधिक फायदा

गर आपके घर के पास कोई तालाब हो तो ये सही समय है सिंघाड़े की बुवाई का। जून, जुलाई और अगस्त महीने तक किसान बुवाई कर सकते हैं। सितम्बर महीने से सिघाड़े के पौधों में सिघाड़े उगने शुरू हो जाते हैं और अक्टूबर से लेकर जनवरी तक पौधे से सिघाड़े निकलते रहते हैं।

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जानें तरबूज की खेती करने के उन्नत तरीके

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तरबूज और खरबूज जायद मौसम की प्रमुख फसल हैं। इसकी खेती मैदानों से लेकर नदियों के पेटे में सफलतापूर्वक की जा सकती हैं। ये कम समय, कम खाद और कम पानी में उगाई जा सकने वाली फसलें हैं। उगने में सरल, बाजार तक ले जाने में आसानी और अच्छे बाजार भाव से इसकी लोकप्रियता बढाती जा रही हैं इसके कच्चे फलो का उपयोग सब्जी के रूप में किया जाता हैं। पके हुए फल मीठे, शीतल, दस्तावर एवं प्यास को शांत करते हैं। Read More : जानें तरबूज की खेती करने के उन्नत तरीके about जानें तरबूज की खेती करने के उन्नत तरीके

चाय की खेती कैसे करें

चाय की खेती कैसे करें

चाय (अंग्रेज़ी:Tea) एक महत्त्वपूर्ण पेय पदार्थ है और संसार के अधिकांश लोग इसे पसन्द करते हैं। चाय मुलायम एवं नयी पत्ती, बन्द वानस्पतिक कली आदि से तैयार की जाती है। चाय में मुख्यतः कैफ़ीन का अंश पाया जाता है। इसकी ताज़ी पत्तियों में टैनिन की मात्रा 25.1% पायी जाती है, जबकि संसाधित पत्तियों में टैनिन की मात्रा 13.3% तक होती है। सर्वोत्तम चाय कलियों से बनायी जाती है। चाय की खेती में 'लाल किट्ट' तथा 'शैवाल' जनित 'चित्ती रोग' का प्रकोप होता है। चाय के लिए न्यूनतम वर्षा 125 से 150 सेमी होना चाहिए तथा तापमान 21°C से 27°C तक उपयुक्त होता है। विश्व में चाय के उत्पादन में भा Read More : चाय की खेती कैसे करें about चाय की खेती कैसे करें

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