खेती

भारतीय गाय इस धरती पर सभी गायो मे सर्वश्रेष्ठ क्यूँ है ?

यह जानकार आपको शायद झटका लगेगा की हमने अपनी देशी गायों को गली-गली आवारा घूमने के लिए छोड़ दिया है । क्यूंकी वे दूध कम देती हैं । इसलिए उनका आर्थिक मोल कम है , लेकिन ब्राज़ील हमारी इन देशी गायो की नस्ल का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है । जबकि भारत अमेरिका और यूरोप से घरेलू दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए विदेशी प्रजाती की गायों का आयात करता है । वास्तव मे 3 महत्वपूर्ण भारतीय प्रजाती गिर, कंकरेज , व ओंगल की गाय जर्सी गाय से भी अधिक दूध देती हैं । Read More : भारतीय गाय इस धरती पर सभी गायो मे सर्वश्रेष्ठ क्यूँ है ? about भारतीय गाय इस धरती पर सभी गायो मे सर्वश्रेष्ठ क्यूँ है ?

मशीन रोपाई के लिए पहला कदम चटाई नुमा नर्सरी तैयार करना होता है

मशीन रोपाई

धान रोपाई के परंपरागत तरीकों में बीज को नर्सरी में बोया जाता है फिर पौधे को धीरे से निकाल कर साफ करके गुच्छा बनाकर जुताई किए गए मिट्टी में बोया जाता है। हाथ से रोपाई करने का काम बहुत मुश्किल एवं थकाने वाला काम होता है। धान के रोपाई में कई घंटे तक झुककर काम करने से कई महिला एवं पुरूष के परिस्थिति कई पीढ़ी से किसानी काम का दर्दनाक हिस्सा है। आज के समय में खेती मजदूरों के फैक्ट्रियों एवं दूसरे कामों में जाने के कारण रोपाई के समय में मजदूरों में काफी कमी आ गई है। नया तकनीक और किसानी काम में विकास के कारण हाथ रोपाई की जगह अब मशीन रोपाई ले रही है। और इसके लिये धान रोपाई मशीन एक अच्छा उपाय है। मशी Read More : मशीन रोपाई के लिए पहला कदम चटाई नुमा नर्सरी तैयार करना होता है about मशीन रोपाई के लिए पहला कदम चटाई नुमा नर्सरी तैयार करना होता है

एलोवेरा की खेती भी किसानों को लाभ देती

ग्वारपाठा, घृतकुमारी या एलोवेरा जिसका वानस्पतिक नाम एलोवेरा बारबन्डसिस हैं तथा लिलिऐसी परिवार का सदस्य है। इसका उत्पत्ति स्थान उत्तरी अफ्रीका माना जाता है। एलोवेरा को विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है, हिन्दी में ग्वारपाठा, घृतकुमारी, घीकुंवार, संस्कृत में कुमारी, अंग्रेजी में एलोय कहा जाता है। एलोवेरा में कई औषधीय गुण पाये जाते हैं, जो विभिन्न प्रकार की बीमारियों के उपचार में आयुर्वेदिक एंव युनानी पद्धति में प्रयोग किया जाता है जैसे पेट के कीड़ों, पेट दर्द, वात विकार, चर्म रोग, जलने पर, नेत्र रोग, चेहरे की चमक बढ़ाने वाली त्वचा क्रीम, शेम्पू एवं सौन्दर्य प्रसाधन तथा सामान्य Read More : एलोवेरा की खेती भी किसानों को लाभ देती about एलोवेरा की खेती भी किसानों को लाभ देती

नाइट्रोजन क्या है ?

नाइट्रोजन

नाइट्रोजन हमारे ग्रह के वायुमंडल में सबसे प्रचूर मात्रा में एक तत्व है। लगभग वातावरण 78% नाइट्रोजन गैस से बना है।
नाइट्रोजन एक स्वाभाविक रूप से उत्त्पन तत्व है जो की दोनों पौधों और जानवरों के विकास में और प्रजनन के लिए आवश्यक है। नाइट्रोजन अमीनो एसिड और यूरिया का एक घटक है। एमिनो एसिड सभी प्रोटीन की इमारत का एक महत्वपूर्ण अंग हैं।
ध्यान दें - एमिनो एसिड।
जैविक नाइट्रोजन पौधे कैसे प्रयोग में लाते है ? जाने " नाइट्रोजन चक्र " के माध्यम से। 
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उर्वरकों का सही समय व सही तरीके से उपयोग

सघन खेती एवं असंतुुलित उर्वरक उपयोग के कारण कृषि भूमि में पोषक तत्वों की उपलब्ध मात्रा में कमी एवं असंतुलन की स्थिति उत्पन्न होती जा रही है, फलस्वरूप भूमि की उर्वरता एवं उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस उत्पादन में पोषक तत्वों का महत्वपूर्ण योगदान है इसलिए उर्वरकों के बढ़ते मूल्यों को देखते हुए इनके कुशल समुचित और समन्वित उपयोग करना आवश्यक हो गया है परंतु महत्वपूर्ण तो यह है कि उर्वरकों की क्षमता को कैसे बढ़ाया जाए अर्थात् जो उर्वरक हम उपयोग कर रहे हैं उनका पौधा भरपूर उपयोग कैसे करें। क्योंकि जो हम नत्रजन उपयोग करते हैं उसका 40 से 60 प्रतिशत तथा फास्फोरस का 15 से 20 प्रतिशत ही पौ Read More : उर्वरकों का सही समय व सही तरीके से उपयोग about उर्वरकों का सही समय व सही तरीके से उपयोग

किसी भी जीवित पोधे के शरीर में सबसे ज्यादा मात्रा किस तत्व/योगिक की होती है, दूसरे नं पर क्या और बाकी क्या ?

भारात्मक आधार पर रासायनिक रूप से पेड़-पौधों 65 से 70 प्रतिशत जल 25 से 30 प्रतिशत कार्बन एवं ढाई से तीन प्रतिशत सूक्ष्म तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) होते हैं. 
पदार्थों के प्रकार के अनुसार सर्वाधिक रूप से जल की मात्रा होती है। इसे पेड़ पौधे भूमि से जड़ों द्वारा अवशोषित करते हैं। इसके पश्चात कार्बन होता है जोकि जटिल कार्बनिक यौगिकों के रूप में होता है। पौधों के लिए इसका मुख्य स्रोत वायुमंडल में उपलब्ध CO2 गैस है। 
पेड़-पौधे के समुचित विकास निम्न पोषक तत्वों की आवश्यकता पड़ती है, इन तत्वों को निम्न चार वर्गों में बाँटा गया है:
मूल तत्व - कार्बन, हाइड्रोजन व ऑक्सीजन
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जैविक खेती का एक आसान तरीका.

जैविक खाद ( एक एकड़ खेत के लिए ) कैसे बनाये !
एक पलास्टिक के ड्रम में नीचे लिखी पाँच चीजों को आपस में मिला लें.
10 किलो गोबर ( देशी गाय का, बैल का, या भैंस का )
10 लीटर मूत्र (देशी गाय का, बैल का, या भैंस का )
1 किलो गुड़ ( कैसा भी चलेगा, जो सड़ गया हो आपके उपयोग का ना हो तो वो ज्यादा अच्छा है )
अब इसमे 1 किलो पिसी हुई दाल या चोकर (कैसा भी चलेगा, आपके उपयोग का ना हो तो ज्यादा अच्छा )
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मेढऩाली पद्धति से सोयाबीन की खेती-

मेढ़़वाली पद्धति से सोयाबीन की बुवाई करने से वर्षा की अनिश्चितता से होने वाली हानि की संभावना को कम किया जा सकता है। मेढऩाली पद्धति में बीजाई मेढ़ो पर की जाती है तथा दो मेढ़ों के मध्य लगभग 15 से.मी. Read More : मेढऩाली पद्धति से सोयाबीन की खेती- about मेढऩाली पद्धति से सोयाबीन की खेती-

धान के पोषण में विभिन्न पोषक तत्वों की भूमिका

धान की नाइट्रोजन आवश्यकता बहुत अधिक है। फसल लगभग पकने के समय तक नाइट्रोजन चाहती है फिर भी कल्ले बनने की अवस्था में नाइट्रोजन की मांग विशेष अधिक रहती है। धान में नाइट्रोजन की कमी से पौधों की वृद्धि रुक जाती है, कल्ले कम निकलते हंै, पत्तियां आकार में छोटी हो जाती है और पीली पड़ जाती है बालें छोटी हो जाती हैं और उपज कम हो जाती है। नाइट्रोजन के अभाव के कारण दाने आकार में छोटे हो जाते हैं और उनमें प्रोटीन की मात्रा कम हो जाती है।
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