खेती

बन्दगोभी की खेती

बन्दगोभी में विटामिन “सी”, “बी1” पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं. इसके अतिरिक्त विटामिन “ए” और खनिज लवण भी पाये जाते है. बन्दगोभी की सामान्य बढ़वार हेतु अधिक समय तक ठण्डी जलवायु तथ वायुमण्डल में पर्याप्त नमी होनी चाहिए. बन्दगोभी में पाला व ठण्ड सहन करने की क्षमता फूल गोभी से अधिक होती हैं.

उन्नतशील किस्म:

गोल्डन एकर- यह जल्दी उगने वाली किस्म है पत्तियों का रंग बाहर से हल्का अन्दर से गहरा हरा. यह किस्म पौधा लगाये जाने के 60-65 दिन में सब्जी के लिए तैयार हो जाती है.

टिंडे की खेती

टिन्डा भी कुकरविटेसी परिवार की मुख्य फसलों में से है जो कि गर्मियों की सब्जियों में से प्रसिद्ध है । इसको पश्चिमी भारतवर्ष में बहुत पैदा किया जाता है । टिन्डा भारत के कुछ भागों में अधिक पैदा किया जाता है । जैसे-पंजाब, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान में मुख्य रूप से इसकी खेती की जाती है । टिन्डे के फलों को अधिकतर सब्जी बनाने के रूप में प्रयोग किया जाता है । सब्जी अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर भी बनायी जाती है । कच्चे फलों को दाल आदि में मिलाकर हरी सब्जी के रूप में खाया जाता है । इस प्रकार से इस फसल के फलों के प्रयोग से स्वास्थ्य के लिये अधिक पोषक-तत्व-युक्त सब्जी मिलती है ।

टमाटर की उन्नत उत्पादन तकनीक

आदर्श तापमान

टमाटर की फसल पाला नहीं सहन कर सकती है। इसकी खेती हेतु आदर्श तापमान 18. से 27 डिग्री से.ग्रे. है। 21-24 डिग्री से.ग्रे तापक्रम पर टमाटर में लाल रंग सबसे अच्छा विकसित होता है। इन्हीं सब कारणों से सर्दियों में फल मीठे और गहरे लाल रंग के होते हैं। तापमान 38 डिग्री से.ग्रे से अधिक होने पर अपरिपक्व फल एवं फूल गिर जाते हैं।

 

भूमि

उचित जल निकास वाली बलुई दोमट भूमि जिसमे पर्याप्त मात्रा मे जीवांश उपलब्ध हो।

 

टमाटर की किस्में

देसी किस्म-पूसा रूबी, पूसा-120,पूसा शीतल,पूसा गौरव,अर्का सौरभ, अर्का विकास, सोनाली

आलू की खेती

आलू की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी-

आलू किसी भी अच्छी सींचीत मिट्टी मे उग सकते है क्योंकी ये ज़मीन के नीचे उगते है और ढ़िली मिट्टी में उन्हे फैलने में आसानी होती और सांस लेने में आसानी होती है मगर उन्हे गीली मिट्टी बिल्कुल भी पसन्द नहीं है क्योकी उसमें हवा का प्रवाह अच्छे से नहीं होता है जिससे उन्हे पोषक तत्व सोखने में परेशानी होती है ।

 

ज़मीन तैयार करना

 

ज़मीन तैयार करने के लिए सबसे पहले उसकी 2-3 बार गुड़ाई करके छोड़ देना चाहिए उसके बाद ज़मीन की जुताई करनी चाहिए ताकी पौधो को अच्छे से नमी मिल पाऐ।
 
 

आलू बुख़ारा स्वस्थ के लिए ज़रूरी

 

स्वाद में खट्टा-मीठा आलूबुखारा गर्मियों में आने वाला मौसमी फल है. इसमें बॉडी के लिए जरूरी पोषक तत्व जैसे मिनरल्स और विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. आलूबुखारा डायट्री फाइबर से भरपूर होता है, जिसमें सार्बिटॉल और आईसेटिन प्रमुख हैं.

खासतौर पर यह फाइबर्स, शरीर के अंगों के सुचारू बनाते हैं और पाचन क्रिया को भी दुरूस्त करते हैं. इसके साथ ही यह सौंदर्य बढ़ाने के भी काम आता है. इसका इस्तेमाल तरह-तरह के लजीज पकवान बनाने में भी किया जाता है.

आइए जानें, इस फल को खाने से कैसे रहता है शरीर फिट...

जामुन की खेती

गहरे काले रंग का अंडाकार छोटा सा फल है जामुन, हल्के खट्टे, मीठे और कसौले स्वाद से भरपूर इस फल को खाने के बाद जीभ का रंग बैंगनी हो जाता है। बचपन में जामुन खाने के बाद अधिकतर बच्चे अपनी बैंगनी जीभ एक दूसरे को दिखाते रहते हैं.... लेकिन बचपन में जामुन के स्वाद और खेल में हमें यह नही पता होता कि जामुन न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी है, बल्कि इसकी खेती भी किसानों के लिए आर्थिक तौर पर लाभदायक है।

 

सेब की खेती

स्थान का चुनाव

फलों का बाग के लिए स्थान चुनते समय निम्नलिखि बातें ध्यान में रखनी चाहिए :

१. सदा ऐसे स्थान को बाग लगाने के लिए चुनना चाहिए, जहाँ की भूमि उपजाऊ हो। कंकड़ पत्थरवाली और ऊँची नीची जमीन फल के पेड़ों के लिए उपयुक्त नहीं होती। क्षारवाली, जिसमें नोना हों और रेतवाली भूमि भी फल के पेड़ों के लिए खराब होती है। हलकी दमट भूमि, जिसमें पानी का निकास अच्छा हो, सब प्रकार के फलों के पेड़ों के लिए उत्तम होती है।

शरीफा की खेती

परिचय

झारखंड की भूमि और जलवायु शरीफा की खेती के लिये अत्यंत उपयुक्त है। यहाँ के जंगलों में इसके पौधे अच्छे फल देते है जिसे इक्ट्ठा करके स्थानीय बाजारों में अगस्त-अक्टूबर तक बेचा जाता है। यदि इसकी वैज्ञानिक विधि से खेती की जाय तो यहाँ के किसान इससे अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते है साथ ही पोषण सुरक्षा में भी मदद मिलेगी।

अंजीर स्वस्थ के लिए ज़रूरी

अंजीर (अंग्रेजी नाम फ़िग, वानस्पतिक नाम: "फ़िकस कैरिका", प्रजाति फ़िकस, जाति कैरिका, कुल मोरेसी) एक वृक्ष का फल है जो पक जाने पर गिर जाता है। पके फल को लोग खाते हैं। सुखाया फल बिकता है। सूखे फल को टुकड़े-टुकड़े करके या पीसकर दूध और चीनी के साथ खाते हैं। इसका स्वादिष्ट जैम (फल के टुकड़ों का मुरब्बा) भी बनाया जाता है। सूखे फल में चीनी की मात्रा लगभग ६२ प्रतिशत तथा ताजे पके फल में २२ प्रतिशत होती है। इसमें कैल्सियम तथा विटामिन 'ए' और 'बी' काफी मात्रा में पाए जाते हैं। इसके खाने से कोष्ठबद्धता (कब्जियत) दूर होती है।

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