खेती

खुबानी के फायदे

खुबानी के फायदे

खुबानी के फायदे : खुबानी आमतौर पर गर्मी के दिनों में देखने को मिलती है। कुछ लोग इसे टेस्ट लेने के लिए खाते है तो कुछ इसका फायदा लेने के लिए इसका सेवन करते है। खुबानी में बहुत से औषधीय गुण शामिल होते है जो त्वचा और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद होते है लेकिन आज हम आपको खुबानी के कुछ सेहत से जुड़ें फायदों के बारे में बताएंगे, जो आपको कई तरह के बीमारियों से दूर रखेंगे। 

लिवर की बीमारी 

मौसंबी की खेती

मौसंबी की खेती

मौसंबी की उन्नत खेती

मौसंबी की उन्नत खेती

निंबु वर्गीय फलो मे मौसंबी यह अत्यंत महत्वपुर्ण फसल है। देश मे मुख्य रूप महाराष्ट्र मे बडे पैमाने पर इस फसल का उत्पादन किया जाता है। जिसमें अहमद नगर, पुणे , जलगाॅव, जालना, औरंगाबाद, नागपुर, अमरावती जिले अग्रणी है। इसके अतिरीक्त मध्यप्रदेश मे छिंदवाड़ा जिले मे सौसर एवं पांढुरना तहसील मे इसका उत्पादन लिया जाता है। इसके अतिरीक्त आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, पंजाब, हरियाना राज्यो मे मौसंबी की खेती की जाती है।

मौसंबी के लिए जमीन

खजूर की खेती

खजूर की खेती

धोरों में बागवानी को लेकर किसानों में क्रेज बढ़ रहा है। अब तक खजूर व अनार की खेती करने वाले बाड़मेर के किसान थाइलैंड के ड्रैगन फल भी उगाने लगे हैं। जिले के 4 गांवों के किसानों ने पहली बार ड्रैगन के 2000 पौधे लगाए हैं। वातावरण मुफीद रहने से रेगिस्तानी इलाकों में इसकी खेती का प्रयोग सफल साबित हुआ है। यह फल मूल रूप से मध्य अमेरिका का है। इसके अलावा यह थाइलैंड, वियतनाम इजराइल और श्रीलंका में भी उपजता है। चीन में इसकी सबसे अधिक मांग होने से इसे ड्रैगन फ्रूट के नाम की पहचान मिली है। जिले के सिवाना क्षेत्र के मिठौड़ा, पादरु, जागसा व बुड़ीवाड़ा में थाइलैंड के ड्रैगन फलों की खेती की जा रही है। प्रगतिशील

धान की खेती करें उन्नत तरीके से पाये और भी ज्यादा उत्पादन की तकनीके इस प्रकार

धान की खेती करें उन्नत तरीके से पाये और भी ज्यादा उत्पादन की तकनीके इस प्रकार

भूमि की तैयारी इस प्रकार करें 

गर्मी में उपयुक्त समय मिलने पर खेत की गहरी जुताई मिट्टी पलट हल से अवश्य कर लें। मेड़ों की सफाई अवश्य करें। गोबर या कम्पोस्ट की खाद 10 से 12 टन प्रति हेक्टर अंतिम जुताई या वर्षा पूर्व खेत में फैलाकर मिलायें।

धान की खेती की प्रचलित पद्धतियां को जानें 

1. सीधे बीज बोने की पद्धतियां- खेत में सीधे बीज बोजकर निम्न तरह से धान की खेती की जाती है-

मशरूम की खेती करें और उन्नत तरीके से जानिए

मशरूम की खेती करें और उन्नत तरीके से जानिए

मशरुम की खेती का प्रचलन भारत में करीब 200 सालों से है। हालांकि भारत में इसकी व्यावसायिक खेती की शुरुआत हाल के वर्षों में ही हुई है। नियंत्रित वातावरण में मशरुम की पैदावार करना हाल के दिनों का उभरता ट्रेंड है। इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है और यह आयात निर्देशित एक व्यवसाय का रुप ले चुका है। हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और  राजस्थान (शीतकालीन महीनों में) जैसे राज्यों में भी मशरुम की खेती की जा रही है। जबकि इससे पहले इसकी खेती सिर्फ हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पहाड़ी इलाकों तक ही सीमित थी। मशरुम प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स, फॉलिक एसिड का बेहतरीन श्रोत है। यह रक्तहीनता से पीड़ित र

गन्ने की खेती करें इस प्रकार

 गन्ने की खेती करें इस प्रकार

व्यावसायिक फसलों में गन्ने का महत्त्वपूर्ण स्थान है । गन्ने की खेती के लिए गर्म जलवायु अच्छी मानी जाती है । अच्छे विकास के लिए तापमान 26-32 डिग्री से.ग्रे. उत्तम होता है । खेती के लिए मध्यम से काली कछारी एवं चिकनी दोमट मिटटी डोरसा कन्हार सर्वोत्तम रहती है।

 खेती की तैयारी:

खरीफ फसल काटने के बाद खेती की गहरी जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करें । इसके बाद देषी हल या कल्टीवेटर से जुताई करके पाटा चलाकर खेत समतल करें ।

बोने का समय:

खीरे की खेती करें और भी उन्नत तरीके से

खीरे की खेती करें और भी उन्नत तरीके से

 खीरा एक मौसमी फसल है, खीजो की गर्मी के मौसम में ज्यदातर किया जाता है | खीरे की खेती पुरे भारत में की जाती है यह एक Short term फसल है जो की अपना Life Cycle को 60 से 80 दिनों में पूरा करता है | खीरा हमारे शरीर में पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है, खीरे में Protein, vitamin C, Iron, Carbohydrate जैसे तत्व पाए जाते है  | वैसे तो खीरा गर्मी के मौसम में होता है पर वर्षा ऋतू में खीरे की फसल अधिक होती है |

मटर की खेती करें उन्नत तरीके से और पाये अधिक मुनाफा

मटर की खेती

  सब्जियो मे मटर का स्थान प्रमुख है। इसकी खेती हरी फल्ली (सब्जी), साबुत मटर, एवं दाल के लिये किया जाता है। आजकल मटर की डिब्बा बंदी भी काफी लोकप्रिय है। इसमे प्रचुर मात्रा मे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, रेशा, पोटेशियम एवं विटामिन्स पाया जाता है मटर की अगेती प्रजातियों की सब्जियों के रूप में हर साल बड़ी मांग है, जिसको देखते हुए रबी सीजन की मुख्य दलहनी फसल मटर की अगेती प्रजातियों को सितंबर में बुवाई के लिए विकसित किया गया है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक बिजेन्द्र सिंह ने बताया '' दलहनी सब्जियों में मटर लोगों की पहली पसंद है, इससे जहां भोजन में प्रोटीन की

मेंथा की खेती का सही समय पर और उसके फायदे

मेंथा की खेती का सही समय पर और उसके फायदे

मेंथा की खेती करने का सही समय 

हमारे देश में मेंथा की खेती बड़े पैमाने पर होती है, इसे कई अलग –अलग नामों से भी जाना जाता है, देश के कई हिस्सों में इसे मेंथा प्रीपरेटा कहा जाता है तो कई किसान इसे पुदीना भी कहते हैं। कुल मिलाकर मेंथा, मेंथा प्रीपरेटा और पुदीना की एक ऐसी प्रजाति है, जिससे बहु उपयोगी तेल निकाला जाता है, जिसकी खेती आर्थिक तौर किसानों के लिए बेहद लाभदायक है।

तोरई की खेती कब करें और पाये अधिक मुनाफा

 तोरई की खेती कब करें और पाये अधिक मुनाफा

भूमि का प्रयोग करें इस प्रकार 

इसको सभी  प्रकार की मिट्टियों  में उगाया जा सकता है परन्तु  उचित जल निकास धारण क्षमता वाली जीवांश युक्त हलकी दोमट भूमि इसकी सफल खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गई है वैसे उदासीन पी.एच. मान वाली भूमि इसेक लिए अच्छी रहती है नदियों के किनारे वाली भूमि इसकी खेती के लिए उपयुक्त रहती है कुछ अम्लीय भूमि में इसकी खेती की जा सकती है पहली जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करें इसके बाद २-३ बार हैरो या कल्टीवेटर चलाएँ | खेत कि तैयारी में मिट्टी भुरभुरी हो जानी  चाहिए  यह फसल अधिक निराइ  की फ

तोरई की खेती कब की जाती है ?

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