खेती

बैगन की खेती

गांवखेडी देवी के किसान फूलसिंह के लिए बैंगन की खेती खुशहाली लेकर आई है। वे बैंगन की बाड़ी से दो लाख रुपए बीघा तक कमाई कर रहे हैं। एक बार दिल्ली यात्रा के दौरान सब्जी मंडी में जाना हुआ। वहां बैंगन के भाव 40 रुपए किलो थे। इन भावों ने उन्हें बैंगन की बाड़ी करने के लिए प्रेरित किया। 

उन्होंने वैज्ञानिकों से मशविरा कर मिट्टी और पानी की जांच के बाद खेती शुरू की। उन्होंने कम समय में तैयार होने वाली और आठ माह तक उत्पादन देने वाली बैंगन की बीई 706 किस्म लगाई। दो साल पहले एक बीघा में 2 लाख रुपए का मुनाफा हुआ। बाद में उन्होंने इसे पांच बीघा में लगाया है। 

केले की खेती

परिचय

केला भारत वर्ष का प्राचीनतम स्वादिष्ट पौष्टिक पाचक एवं लोकप्रीय फल है अपने देश में प्राय:हर गाँव में केले के पेड़ पाए जातेहैइसमे शर्करा एवं खनिज लवण जैसे कैल्सियम तथा फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाए जाता हैI फलों का उपयोग पकने पर खाने हेतु कच्चा सब्जी बनाने के आलावा आटा बनाने तथा चिप्स बनाने के कम आते हैI  इसकी खेती लगभग पूरे भारत वर्ष में की जाती हैI

 

जलवायु एवं भूमि

कटहल की खेती

कटहल की खेती

कटहल का पौधा एक सदाबहार, 8-15 मी. ऊँचा बढ़ने वाला, फैलावदार एवं घने क्षेत्रकयुक्त बहुशाखीय वृक्ष होता है जो भारत को देशज है। भारत वर्ष में इसकी खेती पूर्वी एवं पश्चिमी घाट के मैदानों, उत्तर-पूर्व के पर्वतीय क्षेत्रों, संथाल परगना एवं छोटानागपुर के पठारी क्षेत्रों, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं बंगाल के मैदानी भागों में मुख्य रूप से की जाती है। कटहल के वृक्ष की छाया में कॉफी, इलाइची, काली मिर्च, जिमीकंद हल्दी, अदरक इत्यादि की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है।

आडू की खेती

आड़ू या सतालू (अंग्रेजी नाम : पीच (Peach); वास्पतिक नाम : प्रूनस पर्सिका; प्रजाति : प्रूनस; जाति : पर्सिका; कुल : रोज़ेसी) का उत्पत्तिस्थान चीन है। कुछ वैज्ञानिकों का मत है कि यह ईरान में उत्पन्न हुआ। यह पर्णपाती वृक्ष है। भारतवर्ष के पर्वतीय तथा उपपर्वतीय भागों में इसकी सफल खेती होती है। ताजे फल खाए जाते हैं तथा फल से फलपाक (जैम), जेली और चटनी बनती है। फल में चीनी की मात्रा पर्याप्त होती है। जहाँ जलवायु न अधिक ठंढी, न अधिक गरम हो, 15 डिग्री फा. से 100 डिग्री फा.

पपीते की खेती

परिचय

पपीते का फल थोड़ा लम्बा व गोलाकार होता है तथा गूदा पीले रंग का होता है। गूदे के बीच में काले रंग के बीज होते हैं। पेड़ के

ऊपर के हिस्से में पत्तों के घेरे के नीचे पपीते के फल आते हैं ताकि यह पत्तों का घेरा कोमल फल की सुरक्षा कर सके। कच्चा पपीता हरे रंग का और पकने के बाद हरे पीले रंग का होता है। आजकल नयी जातियों में बिना बीज के पपीते की किस्में ईजाद की गई हैं।  एक पपीते का वजन 300, 400 ग्राम से लेकर 1 किलो ग्राम तक हो सकता है।

लौकी की खेती कब

लौकी की खेती कब

अगर आप घर में सब्जी उगाने के शौकीन है.तो  सबसे पहले आप एक बड़ा सा कंटेनर लें फिर उसमें मिट्टी और गोबर (60% soil +30% khad+10 sand )खाद का मिश्रण अच्छी तरह से मिला लें. और फिर कंटेनर में डाल दें. इसके बाद आप लौकी के बीज  मिट्टी में दबा दें . बीज आधा इंच से अधिक गहरा ना लगायें.बीज लगाने के बाद उसमें में थोडा पानी भी डाल दें  4-5 दिन  में लौकी के बीज से अंकुरण हो जाता है. इसके बाद आप अपनी छत पर करीब 8 -12  फुट ऊंचा जाल ( रस्सी या बांस से )से बना लें  उस पर लौकी की बेल को आप चढ़ा दीजिये.

मेथी की उन्नत खेती

मेथी की उन्नत खेती

मेथी की उन्नत खेती

मेथी उत्तरी भारत की पत्तियों वाली सब्जी की मुख्य फसल है । इस फसल की प्रारम्भिक अवस्था में पत्तियों को प्रयोग किया जाता है । यह लगभग भारत वर्ष में सभी

जगह उगायी जाती है । मेथी की फसल को पहाड़ी क्षेत्रों में भी आसानी से उगाया जा सकता है जो कि शरद ऋतु के मौसम में पैदा की जाती है ।

गेहू की खेती

गेहू की खेती

गेहूँ की खेती विश्व के प्रायः हर भाग में होती है । संसार की कुल 23 प्रतिशत भूमि पर गेहूँ की ख्¨ती की जाती है ।  गेहूँ विश्वव्यापी महत्त्व की फसल है। मुख्य रूप से एशिया में धान की खेती की जाती है, तो भी विश्व के सभी प्रायद्वीपों में गेहूँ उगाया जाता है।  विश्व में सबसे अधिक क्षेत्र फल में गेहूँ उगाने वाले प्रमुख तीन  राष्ट्र भारत, रशियन फैडरेशन और  संयुक्त राज्य अमेरिका है । गेहूँ उत्पादन में चीन के बाद भारत तथा अमेरिका का क्रम आता है ।

  

उपयुक्त जलवायु क्षेत्र

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