खेती

अंगूर की खेती

अंगूर की  खेती

अंगूर संसार के उपोष्ण कटिबंध के फलों में विशेष महत्व रखता है. हमारे देश में लगभग 620 ई.पूर्व ही उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में अंगूर की व्यवसायिक खेती एक लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित हो गई थी लेकिन उत्तरी भारत में व्यवसायिक उत्पादन धीरे - धीरे बहुत देर से शुरू हुआ. आज अंगूर ने उत्तर भारत में भी एक महत्वपूर्ण फल के रूप में अपना स्थान बना लिया है और इन क्षेत्रों में इसका क्षेत्रफल काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है. Read More : अंगूर की खेती about अंगूर की खेती

आम की खेती

इससे जैली जैम सीरप आदि बनाये जाते हैI यह विटामीन ए व् बी का अच्छा श्रोत हैI

 

जलवायु और भूमि

आम की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु और भूमि की आवश्यकता होती है?
आम की खेती उष्ण एव समशीतोष्ण दोनों प्रकार की जलवायु में की जाती हैI आम की खेती समुद्र तल से 600 मीटर की ऊँचाई तक सफलता पूर्वक होती है इसके लिए 23.8 से 26.6 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अति उतम होता हैई आम की खेती प्रत्येक किस्म की भूमि में की जा सकती हैI परन्तु अधिक बलुई, पथरीली, क्षारीय तथा जल भराव वाली भूमि में इसे उगाना लाभकारी नहीं है, तथा अच्छे जल निकास वाली दोमट भूमि सवोत्तम मानी जाती हैI

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टमाटर की पौध तैयार करना

पौध की रोपाई

जब पौध पांच से छः पत्ती की हो जाए तो इसे 60 सेन्टी मीटर चाौडी तथा जमीन की सतह से 20 सेन्टी मीटर ऊंची उठी हुई क्यारिया बनाकर इन पर रोपाई करते है। क्यारियो के दोनो तरफ 20 सेन्टी मीटर चैडी नालिया बनाते है। क्यारियो पर पौध की रोपाई करते समय पौधे से पौधे की दूरी 30 सेन्टी मीटर रखते है।

खेत की सिचांई

किसान भाईयो टमाटर की फसल के लिये पहली सिचांई पौध रोपई के बाद की जाती है। इसके बाद फसल की आवश्यकता अनुसार समय-समय पर सिचांई करते रहना चाहिये।

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सूरजमुखी की खेती

जलवायु और भूमि

सूरजमुखी की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु  और भूमि की आवश्यकता पड़ती है?

सूरजमुखी की खेती खरीफ रबी जायद तीनो मौसम में की जा सकती हैI फसल पकते  समय शुष्क जलवायु की अति आवश्यकता पड़ती हैI सूरजमुखी की खेती अम्लीय एवम क्षारीय भूमि को छोड़कर सिंचित दशा वाली सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है, लेकिन दोमट भूमि सर्वोतम मानी जाती हैI

 

प्रजातियाँ

उन्नतशील प्रजातियाँ कौन कौन सी होती है, जिन्हें हमें खेत में बोना चाहिए? Read More : सूरजमुखी की खेती about सूरजमुखी की खेती

केसर की खेती

बांसवाड़ा व डूंगरपुर से 50 ग्राम बीज के 1400 दाने ढाई हजार रु. में लाए। इन्हें कृषि अधिकारी सी.बी. मीणा की सलाह पर पांच बिस्वा जमीन पर प्रायोगिक तौर पर लगाया गया। प्रयोग सफल रहा। केसर के पौधों पर रेशे निकल आए। 

पहले दौर में ढाई किलो रेशे निकाले जा चुके हैं, जबकि दूसरे दौर में भी इतने ही रेशे निकलने की संभावना है। शर्मा ने बताया कि फसल की बुवाई में 15 से 20 हजार रुपए का खर्चा आया है। एक बिस्वा खेती में एक किलो केसर निकलने की संभावना है। Read More : केसर की खेती about केसर की खेती

बन्दगोभी की खेती

बन्दगोभी में विटामिन “सी”, “बी1” पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं. इसके अतिरिक्त विटामिन “ए” और खनिज लवण भी पाये जाते है. बन्दगोभी की सामान्य बढ़वार हेतु अधिक समय तक ठण्डी जलवायु तथ वायुमण्डल में पर्याप्त नमी होनी चाहिए. बन्दगोभी में पाला व ठण्ड सहन करने की क्षमता फूल गोभी से अधिक होती हैं.

उन्नतशील किस्म:

गोल्डन एकर- यह जल्दी उगने वाली किस्म है पत्तियों का रंग बाहर से हल्का अन्दर से गहरा हरा. यह किस्म पौधा लगाये जाने के 60-65 दिन में सब्जी के लिए तैयार हो जाती है. Read More : बन्दगोभी की खेती about बन्दगोभी की खेती

टिंडे की खेती

टिन्डा भी कुकरविटेसी परिवार की मुख्य फसलों में से है जो कि गर्मियों की सब्जियों में से प्रसिद्ध है । इसको पश्चिमी भारतवर्ष में बहुत पैदा किया जाता है । टिन्डा भारत के कुछ भागों में अधिक पैदा किया जाता है । जैसे-पंजाब, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान में मुख्य रूप से इसकी खेती की जाती है । टिन्डे के फलों को अधिकतर सब्जी बनाने के रूप में प्रयोग किया जाता है । सब्जी अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर भी बनायी जाती है । कच्चे फलों को दाल आदि में मिलाकर हरी सब्जी के रूप में खाया जाता है । इस प्रकार से इस फसल के फलों के प्रयोग से स्वास्थ्य के लिये अधिक पोषक-तत्व-युक्त सब्जी मिलती है । Read More : टिंडे की खेती about टिंडे की खेती

टमाटर की उन्नत उत्पादन तकनीक

आदर्श तापमान

टमाटर की फसल पाला नहीं सहन कर सकती है। इसकी खेती हेतु आदर्श तापमान 18. से 27 डिग्री से.ग्रे. है। 21-24 डिग्री से.ग्रे तापक्रम पर टमाटर में लाल रंग सबसे अच्छा विकसित होता है। इन्हीं सब कारणों से सर्दियों में फल मीठे और गहरे लाल रंग के होते हैं। तापमान 38 डिग्री से.ग्रे से अधिक होने पर अपरिपक्व फल एवं फूल गिर जाते हैं।

 

भूमि

उचित जल निकास वाली बलुई दोमट भूमि जिसमे पर्याप्त मात्रा मे जीवांश उपलब्ध हो।

 

टमाटर की किस्में

देसी किस्म-पूसा रूबी, पूसा-120,पूसा शीतल,पूसा गौरव,अर्का सौरभ, अर्का विकास, सोनाली Read More : टमाटर की उन्नत उत्पादन तकनीक about टमाटर की उन्नत उत्पादन तकनीक

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