खेती

सूरजमुखी की खेती

जलवायु और भूमि

सूरजमुखी की खेती के लिए किस प्रकार की जलवायु  और भूमि की आवश्यकता पड़ती है?

सूरजमुखी की खेती खरीफ रबी जायद तीनो मौसम में की जा सकती हैI फसल पकते  समय शुष्क जलवायु की अति आवश्यकता पड़ती हैI सूरजमुखी की खेती अम्लीय एवम क्षारीय भूमि को छोड़कर सिंचित दशा वाली सभी प्रकार की भूमि में की जा सकती है, लेकिन दोमट भूमि सर्वोतम मानी जाती हैI

 

प्रजातियाँ

उन्नतशील प्रजातियाँ कौन कौन सी होती है, जिन्हें हमें खेत में बोना चाहिए?

केसर की खेती

बांसवाड़ा व डूंगरपुर से 50 ग्राम बीज के 1400 दाने ढाई हजार रु. में लाए। इन्हें कृषि अधिकारी सी.बी. मीणा की सलाह पर पांच बिस्वा जमीन पर प्रायोगिक तौर पर लगाया गया। प्रयोग सफल रहा। केसर के पौधों पर रेशे निकल आए। 

पहले दौर में ढाई किलो रेशे निकाले जा चुके हैं, जबकि दूसरे दौर में भी इतने ही रेशे निकलने की संभावना है। शर्मा ने बताया कि फसल की बुवाई में 15 से 20 हजार रुपए का खर्चा आया है। एक बिस्वा खेती में एक किलो केसर निकलने की संभावना है।

बन्दगोभी की खेती

बन्दगोभी में विटामिन “सी”, “बी1” पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं. इसके अतिरिक्त विटामिन “ए” और खनिज लवण भी पाये जाते है. बन्दगोभी की सामान्य बढ़वार हेतु अधिक समय तक ठण्डी जलवायु तथ वायुमण्डल में पर्याप्त नमी होनी चाहिए. बन्दगोभी में पाला व ठण्ड सहन करने की क्षमता फूल गोभी से अधिक होती हैं.

उन्नतशील किस्म:

गोल्डन एकर- यह जल्दी उगने वाली किस्म है पत्तियों का रंग बाहर से हल्का अन्दर से गहरा हरा. यह किस्म पौधा लगाये जाने के 60-65 दिन में सब्जी के लिए तैयार हो जाती है.

टिंडे की खेती

टिन्डा भी कुकरविटेसी परिवार की मुख्य फसलों में से है जो कि गर्मियों की सब्जियों में से प्रसिद्ध है । इसको पश्चिमी भारतवर्ष में बहुत पैदा किया जाता है । टिन्डा भारत के कुछ भागों में अधिक पैदा किया जाता है । जैसे-पंजाब, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान में मुख्य रूप से इसकी खेती की जाती है । टिन्डे के फलों को अधिकतर सब्जी बनाने के रूप में प्रयोग किया जाता है । सब्जी अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर भी बनायी जाती है । कच्चे फलों को दाल आदि में मिलाकर हरी सब्जी के रूप में खाया जाता है । इस प्रकार से इस फसल के फलों के प्रयोग से स्वास्थ्य के लिये अधिक पोषक-तत्व-युक्त सब्जी मिलती है ।

टमाटर की उन्नत उत्पादन तकनीक

आदर्श तापमान

टमाटर की फसल पाला नहीं सहन कर सकती है। इसकी खेती हेतु आदर्श तापमान 18. से 27 डिग्री से.ग्रे. है। 21-24 डिग्री से.ग्रे तापक्रम पर टमाटर में लाल रंग सबसे अच्छा विकसित होता है। इन्हीं सब कारणों से सर्दियों में फल मीठे और गहरे लाल रंग के होते हैं। तापमान 38 डिग्री से.ग्रे से अधिक होने पर अपरिपक्व फल एवं फूल गिर जाते हैं।

 

भूमि

उचित जल निकास वाली बलुई दोमट भूमि जिसमे पर्याप्त मात्रा मे जीवांश उपलब्ध हो।

 

टमाटर की किस्में

देसी किस्म-पूसा रूबी, पूसा-120,पूसा शीतल,पूसा गौरव,अर्का सौरभ, अर्का विकास, सोनाली

आलू की खेती

आलू की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी-

आलू किसी भी अच्छी सींचीत मिट्टी मे उग सकते है क्योंकी ये ज़मीन के नीचे उगते है और ढ़िली मिट्टी में उन्हे फैलने में आसानी होती और सांस लेने में आसानी होती है मगर उन्हे गीली मिट्टी बिल्कुल भी पसन्द नहीं है क्योकी उसमें हवा का प्रवाह अच्छे से नहीं होता है जिससे उन्हे पोषक तत्व सोखने में परेशानी होती है ।

 

ज़मीन तैयार करना

 

ज़मीन तैयार करने के लिए सबसे पहले उसकी 2-3 बार गुड़ाई करके छोड़ देना चाहिए उसके बाद ज़मीन की जुताई करनी चाहिए ताकी पौधो को अच्छे से नमी मिल पाऐ।
 
 

आलू बुख़ारा स्वस्थ के लिए ज़रूरी

 

स्वाद में खट्टा-मीठा आलूबुखारा गर्मियों में आने वाला मौसमी फल है. इसमें बॉडी के लिए जरूरी पोषक तत्व जैसे मिनरल्स और विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. आलूबुखारा डायट्री फाइबर से भरपूर होता है, जिसमें सार्बिटॉल और आईसेटिन प्रमुख हैं.

खासतौर पर यह फाइबर्स, शरीर के अंगों के सुचारू बनाते हैं और पाचन क्रिया को भी दुरूस्त करते हैं. इसके साथ ही यह सौंदर्य बढ़ाने के भी काम आता है. इसका इस्तेमाल तरह-तरह के लजीज पकवान बनाने में भी किया जाता है.

आइए जानें, इस फल को खाने से कैसे रहता है शरीर फिट...

जामुन की खेती

गहरे काले रंग का अंडाकार छोटा सा फल है जामुन, हल्के खट्टे, मीठे और कसौले स्वाद से भरपूर इस फल को खाने के बाद जीभ का रंग बैंगनी हो जाता है। बचपन में जामुन खाने के बाद अधिकतर बच्चे अपनी बैंगनी जीभ एक दूसरे को दिखाते रहते हैं.... लेकिन बचपन में जामुन के स्वाद और खेल में हमें यह नही पता होता कि जामुन न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी है, बल्कि इसकी खेती भी किसानों के लिए आर्थिक तौर पर लाभदायक है।

 

Pages