खेती

शरीफा की खेती

परिचय

झारखंड की भूमि और जलवायु शरीफा की खेती के लिये अत्यंत उपयुक्त है। यहाँ के जंगलों में इसके पौधे अच्छे फल देते है जिसे इक्ट्ठा करके स्थानीय बाजारों में अगस्त-अक्टूबर तक बेचा जाता है। यदि इसकी वैज्ञानिक विधि से खेती की जाय तो यहाँ के किसान इससे अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते है साथ ही पोषण सुरक्षा में भी मदद मिलेगी।

अंजीर स्वस्थ के लिए ज़रूरी

अंजीर (अंग्रेजी नाम फ़िग, वानस्पतिक नाम: "फ़िकस कैरिका", प्रजाति फ़िकस, जाति कैरिका, कुल मोरेसी) एक वृक्ष का फल है जो पक जाने पर गिर जाता है। पके फल को लोग खाते हैं। सुखाया फल बिकता है। सूखे फल को टुकड़े-टुकड़े करके या पीसकर दूध और चीनी के साथ खाते हैं। इसका स्वादिष्ट जैम (फल के टुकड़ों का मुरब्बा) भी बनाया जाता है। सूखे फल में चीनी की मात्रा लगभग ६२ प्रतिशत तथा ताजे पके फल में २२ प्रतिशत होती है। इसमें कैल्सियम तथा विटामिन 'ए' और 'बी' काफी मात्रा में पाए जाते हैं। इसके खाने से कोष्ठबद्धता (कब्जियत) दूर होती है।

आडू खाने के फायदे

आडू को अंग्रेजी में पीच कहा जाता है| यह एक फल होता है जो पीले कलर का होता है| इसमें अधिक बीज पाए जाते है| यह कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर होता है जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है| 1. इस फल में कैलोरी बहुत कम होती है जो शरीर के लिए लाभदायक होता है| इसका सेवन आप नाश्ते में कर सकते हैं| आपका पेट लम्बे समय तक भरा भरा रहेगा| इसको खाने से मोटापे को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है| 2. विटामिन सी आड़ू में अधिक होता है जो शरीर में विटामिन की कमी को पूरा करता है| इसको खाने से इम्यून सिस्टम हैल्दी रहता है| 3.

पपीते की खेती

परिचय

पपीते का फल थोड़ा लम्बा व गोलाकार होता है तथा गूदा पीले रंग का होता है। गूदे के बीच में काले रंग के बीज होते हैं। पेड़ के

ऊपर के हिस्से में पत्तों के घेरे के नीचे पपीते के फल आते हैं ताकि यह पत्तों का घेरा कोमल फल की सुरक्षा कर सके। कच्चा पपीता हरे रंग का और पकने के बाद हरे पीले रंग का होता है। आजकल नयी जातियों में बिना बीज के पपीते की किस्में ईजाद की गई हैं।  एक पपीते का वजन 300, 400 ग्राम से लेकर 1 किलो ग्राम तक हो सकता है।

पिस्ता स्वस्थ के लिए ज़रूरी

पिस्ता एक प्रकार का मेवा है। ड्राइ फ्रूट्स के रूप में इस्तेमाल होने वाला पिस्ता न केवल एक बेहतर स्नैक है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। एक ताजा अध्ययन के अनुसार इसका नियमित सेवन शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को नियंत्रित कर ब्लड में शुगर के लेवल को घटाता है।

चीकू या सपोटा की खेती

झारखंड प्रदेश के कृषि योग्य भूमि के अधिकांश क्षेत्र पर खाद्यान्न फसलों की खेती की जाती हैजिसकी उत्पादकता बहुत ही कम है। बागवानी फसलों की खेती द्वारा इन क्षेत्रों का उत्पादकता बढ़ाया जा सकता है एवं अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। वर्तमान समय में झारखंड में फलोत्पादन लगभग 0.25 लाख हेक्टेयर भूमि में किया जाता है जो बहुत ही कम है। फलस्वरूप प्रति व्यक्ति प्रति दिन केवल 37 ग्राम फल की उपलब्धता है जबकि संतुलित आहार के लिये 85 ग्राम फल की आवश्यकता है। झारखंड की जलवायु फल उत्पादन के लिये बहुत ही अच्छी है। यहाँ फलों की अधिक से अधिक क्षेत्रों में खेती करके पर्यावरण में सुधार एवं कुपोषण निवारण के साथ-

अनार उत्पादन की तकनीक

अनार की खेती

भारत में अनार की खेती मुखय रूप से महाराष्ट्र में की जाती है। राजस्थान, उत्तरप्रदेश, आंध्रप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, गुजरात में छोटे स्तर में इसके बगीचे देखे जा सकते हैं। इसका रस स्वादिष्ट तथा औषधीय गुणों से भरपूर होता है। भारत में अनार का क्षेत्रफल 113.2 हजार हेक्टेयर, उत्पादन 745 हजार मैट्रिक टन एवं उत्पादकता 6.60 मैट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। (2012-13)

जलवायु

खजूर खाने के फायदे

 खजूर के पेड़ों की खेती सदियों से की जा रही है. खासतौर से मध्‍य पूर्व के देशों में तो खजूर हमेशा से भोजन का अहम हिस्‍सा रहा है. खजूर की खासियत यह है कि इसे आप फ्रेश भी खा सकते हैं और सुखाकर भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं. एक खजूर की लंबाई तीन से सात सेंटीमीटर तक हो सकती है. जहां पके हुए खजूर का रंग गहरे पीले और लाल रंग का होता है वही सूखा खजूर ज्‍यादातर भूरे रंग का होता है. मिठास के आधार पर खजूर को तीन हिस्‍सों में बांटा जाता है- नरम खजूर, हल्‍का सूखा खजूर और पूरी तरह से सूखा हुआ खजूर.

अनानास स्वस्थ के लिए ज़रूरी

अनन्नास (अंग्रेज़ी:पाइनऍप्पल, वैज्ञा:Ananas comosus) एक खाद्य उष्णकटिबन्धीय पौधे एवं उसके फल का सामान्य नाम है हालांकि तकनीकी दृष्टि से देखें, तो ये अनेक फलों का समूह विलय हो कर निकलता है।

[1] यह मूलतः पैराग्वे एवं दक्षिणी ब्राज़ील का फल है।

[2] अनन्नास को ताजा काट कर भी खाया जाता है और शीरे में संरक्षित कर या रस निकाल कर भी सेवन किया जाता है। इसे खाने के उपरांत मीठे के रूप में सलाद के रूप में एवं फ्रूट-कॉकटेल में मांसाहार के विकल्प के रूप में प्रयोग भी किया जाता है।

मुनक्का स्वस्थ के लिए ज़रूरी

मुनक्का (Dry Grapes) अंगूर को सुखाकर बनाया जाता है, इसमें बीज पाये जाते है। मुनक्का दो प्रकार का होता है – लाल और काला। मुनक्का का इस्तेमाल बहुत तरह के घरेलू उपचारों में किया जाता है, भारत में आज के समय में काफी जगह जैसे- कुमाऊ, नासिक, देहरादून, पूना और औरंगाबाद आदि पर मुख्य रूप से इनकी खेती की जाती है। मुनक्का हमारे शरीर के लिए भी बहुत ही फायदेमंद और शक्तिवर्धक होता है तो आईये आज हम मुनक्के से होने वाले लाभों के बारे में बात करेंगें।

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