खेती

गाजर की उन्नत क़िस्में

गाजर की उन्नत क़िस्में

गाजर हमारे शरीर के लिए अनेक प्रकार से लाभकारी हैं। इसमें बीटा केरोटीन पाया जाता हैं जो ‘विटामिन ए’ में बदल जाता हैं। इसमें कैंसर दूर करने के गुण पाए जाते हैं। बीटा केरोटीन एंटीऑक्सीडेंट होता हैं और यह कोशिकओं को नष्ट होने से रोकता हैं, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता हैं। यह शरीर की रोगो से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता हैं और टॉनिक की तरह कार्य करता हैं।
पूसा मेघाली 
यह नारंगी गूदे, छोटी टॉप तथा कैरोटीन की अधिक मात्रा वाली संकर प्रजाति है। इसकी फ़सल बुवाई से 100-110 दिन में तैयार हो जाती है।

खरीफ प्याज उत्पादन तकनीक

खरीफ प्याज उत्पादन तकनीक

प्याज की फसल के लिए ऐसी जलवायु की अवश्यकता होती है जो ना बहुत गर्म हो और ना ही ठण्डी। अच्छे कन्द बनने के लिए बड़े दिन तथा कुछ अधिक तापमान होना अच्छा रहता है। आमतौर पर सभी किस्म की भूमि में इसकी खेती की जाती है, लेकिन उपजाऊ दोमट मिट्टी, जिसमे जीवांश खाद प्रचुर मात्रा में हो व जल निकास की उत्तम व्यवस्था हो, सर्वोत्तम रहती है। भूमि अधिक क्षारीय व अधिक अम्लीय नहीं होनी चाहिए अन्यथा कन्दों की वृद्धि अच्छी नहीं हो पाती है। अगर भूमि में गंधक की कमी हो तो 400 किलो जिप्सम प्रति हेक्टर की दर से खेत की अन्तिम तैयारी के समय कम से कम 15 दिन पूर्व मिलायें।

परिचय

लोबिया की खेती कैसे करें

लोबिया की खेती कैसे करें

लोबिया (काऊपीज) की फसल कम समय, कम शक्ति तथा कम धन में अधिक लाभ देती है। पंजाब तथा कई अन्य राज्यों में यह फसल पहले से अधिक मात्रा में बोइ जाने लगी है। यह फसल गर्मी की ऋतु में फरवरी तथा जून-जुलाई को बोइ जाती है। यह फसल 45-50 दिन में पककर तैयार हो जाती है।

परिचय

वर्मीवाश एक तरल जैविक खाद

वर्मीवाश एक तरल जैविक खाद

यदि हमारी खेती प्रमाणिक तौर पर 100 फीसदी जैविक हो जाये, तो क्या हो? यह सोचते ही मेरे मन में सबसे पहले जो कोलाज उभरता है, उसमें स्वाद भी है, गन्ध भी, सुगन्ध भी तथा इंसान, जानवर और खुद खेती की बेहतर होती सेहत भी। इस चित्र के लिये एक टैगलाइन भी लिखी है - “अब खेती और किसान पर कोई तोहमत न लगाए कि मिट्टी, भूजल और नदी को प्रदूषित करने में उनका भी योगदान है।’’

गेहू की खेती कैसे और कब

जिले में श्रीविधि से गेहूं की खेती कारगर साबित हो रही है। अगर तुलना करें तो इसमें परंपरागत खेती से बुआई का खर्च चौथाई से भी कम हो रहा है और उपज डेढ़ गुना मिल रही है लेकिन इस खेती में बीज को उपचारित कर बुआई की विधि थोड़ी अलग है। रसायनिक खादों के इस्तेमाल से मुक्ति मिल रही है। अब तो किसान बुआई के लिए कतार से कतार और पौधे से पौधे के बीच एक निश्चित दूरी रखने के लिए कोनोवीडर मशीन की सहायता ले रहे हैं। यह खेती छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। जिले में इस विधि के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि विभाग की ओर से विशेष पहल की जा रही है।

गन्ने की खेती के फयदे अनेक

जिलेके गन्ना उत्पादक किसानों के लिए अच्छी खबर है। जींद शुगर मिल में इस बार गन्ने की पेराई का काम पिछले साल से 10 दिन पहले यानि 7 नवंबर को शुरू होगा। इससे उन किसानों को फायदा होगा जिन्होंने गन्ने की अगेती किस्म की बिजाई की हुई है। क्योंकि वे समय पर मिल में फसल डालकर खाली हुए खेत में गेहूं की बिजाई कर सकेंगे। किसानों के लिए राहत की बात यह है कि इस बार जिले में पिछले साल से गन्ने का रकबा कम है, जबकि इस बार शुगर मिल पिछले साल से ज्यादा गन्ने की पेराई करेगा। इसके चलते किसानों को यूपी, पंजाब प्रदेश के दूसरे जिलों में गन्ना ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

राजमा की खेती कैसे करें

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राजमा की खेती रबी ऋतु में की जाती है। अभी इसके लिए उपयुक्त समय है। यह मैदानी क्षेत्रों में अधिक उगाया जाता है। राजमा की अच्छी पैदावार हेतु 10 से 27 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान की आवश्यकता पड़ती है। राजमा हल्की दोमट मिट्टी से लेकर भारी चिकनी मिट्टी तक में उगाया जा सकता है।

राजमा उन्नतशील प्रजातियां है

राजमा में प्रजातियां जैसे कि पीडीआर 14, इसे उदय भी कहते है। मालवीय 137, बीएल 63, अम्बर, आईआईपीआर 96-4, उत्कर्ष, आईआईपीआर 98-5, एचपीआर 35, बी, एल 63 एवं अरुण है।

खेत की तैयारी

शलजम की खेती कैसे करें

शलजम की खेती के लिए आवश्यक भूमि व जलवायु 

शलजम की फसल को लगभग सभी प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है । लेकिन सफल-उत्पादन प्राप्त करने के लिए हल्की चिकनी दोमट या बलुई दोमट भूमि अति उत्तम सिद्ध हुई है । भूमि में जल-निकास ठीक होना चाहिए व भूमि उपजाऊ होनी चाहिए ।

शलजम शरद-ऋतु की फसल है । इसलिये ठण्डी जलवायु की आवश्यकता पड़ती है । यह अधिक ठन्ड व पाले को सहन कर लेती है । अच्छी वृद्धि के लिये ठन्ड व आर्द्रता वाली जलवायु सर्वोत्तम रहती है । पहाड़ी क्षेत्र में पैदावार अधिक मिलती है ।

शलजम की खेती के लिए खेत की तैयारी 

खरबूजा की खेती करें और भी उन्नत तरीके से जानें इसको किस प्रकार करना चाहिए

खरबूजा की खेती करें और भी उन्नत तरीके से जानें इसको किस प्रकार करना चाहिए

नदियों के किनारे कछारी भूमि में खरबूजे की खेती की जाती है मैदानी क्षेत्रों में उचित जल निकास वाली रेतीली दोमट भूमि सर्वोतम मानी गई है पहली जुताई मिटटी पलटने वाले हल से करें इसके बाद 2-3 बार हैरो या कल्टीवेटर चलाएँ |

जलवायु का प्रयोग 

इसके लिए उच्च तापमान और शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है इसकी सफल खेती के लिए 44-22सेल्सियस तापमान सर्वोत्तम माना गया है खरबूजे की फसल को पाले से अधिक हानी होती है फल पकने के समय यदि भूमि में अधिक नमी रहेगी तो फलों की मिठास कम हो जाती है |

उन्नत किस्मे निम्न प्रकार  है 

खीरे की आधुनिक खेती

खीरे की खेती

बाजार में खीरे की अधिक मांग बने रहने के कारण खीरे की खेती किसान भाइयो के लिए बहुत ही लाभदायक है।खीरे का उपयोग खाने के साथ सलाद के रूप मेंबढ़ता ही जा रहा है।जिससे बाजार में इसकी कीमते भी लगातार बढ़ रही है इसके साथ ही खीरे की खेती रेतली भूमि में अच्छी होती ऐसे में किसान भाइयो के पासजो ऐसी भूमि है जिसमे दूसरी फसलो का उत्पादन अच्छा नहीं होता है उसी भूमि में खीरे के खेती से अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है।

खेत की तैयारी

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