दिवंगत पत्रकार गौरी लंकेश पत्रिके लिंगायत समुदाय से ही आती थीं

दिवंगत पत्रकार गौरी लंकेश पत्रिके लिंगायत समुदाय से ही आती थीं. पिछले साल उनकी हत्या हो गई थी. (फोटोःट्विटर) अपने को हिंदू मानने वाले वीरशैव खुद को 'वीरशैव लिंगायत' भी कह देते हैं. इस नाते से लिंगायत हिंदू धर्म के और करीब लगने लगते हैं. खासकर इसलिए कि बसवन्ना ने लिंगायत 'धर्म' की स्थापना की थी कि नहीं, इसे लेकर मतभेद है. लेकिन सारे लिंगायत खुद को वीरशैव नहीं मानते. वो लिंगायत कहलाना ही पसंद करते हैं. सारा मामला पहचान का है और कोई अपनी पहचान से समझौता नहीं करना चाहता. इसलिए लिंगायतों को हिंदू धर्म के अंदर या बाहर बताना आसान नहीं है. पहचान की राजनीति लिंगायत समुदाय कर्नाटक की आबादी में 17 फीसदी के करीब हैं. माने एक बहुत बड़ा वोट बैंक. आमतौर पर ये भाजपा के वोटर माने जाते हैं. लेकिन कांग्रेस इन्हें अपने पाले में करना चाहती है. तो उसने अलग धर्म का दर्जा दिए जाने की मांग को हमेशा हवा दी. सिद्धारमैया सरकार के कहने पर ही कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने सात सदस्यों का एक पैनल बनाया, जिसने इस मांग पर विचार किया. रिटायर्ड हाईकोर्ट जज एचएन नागमोहन दास इस पैनल के अध्यक्ष थे. हाल ही में इस पैनल ने राज्य को अपनी रिपोर्ट सौंपी. इसमें कहा गया कि राज्य केंद्र से लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने की सिफारिश कर दे. पैनल के मुताबिक ईष्टलिंग पहनने वाले वो वीरशैव, जो बसवन्ना को धर्मगुरु मानते हैं और 'वचन' की पवित्रता में विश्वास करते हैं, लिंगायत माने जा सकते हैं.