ग्रंथियों का पता लगाने का एक प्रयोग

ग्रंथियों का पता लगाने का एक प्रयोग

किसी दिन आधा घंटे को सप्ताह में एक एकांत कमरे मैं बंद हो जाएँ, और आपका शरीर जो करना चाहे, करने दें। हो सकता है शरीर आपका नाचे, हो सकता है आप कूदें,हो सकता है आप चिल्लाएं।यह हो सकता है।और तब आपको पता चलेगा कि यह क्या हो रहा है। ये सारी ग्रंथियां हैं, जो दबी हुई हैं और मौजूद हैं।और निकलना चाहती है,लेकिन समाज नहीं निकलने देता, और आप भी नहीं निकलने देते हैं।ऐसा शरीर बहुत-सी ग्रंथियों का घर बना हुआ है।
और जो शरीर ग्रंथियों से भरा हुआ है,वह शरीर शुद्ध नहीं होता, वह भीतर प्रवेश नहीं कर सकता। तो योग का पहला चरण होता है शरीर-शुद्धि। और शरीर- शुद्धि का पहला चरण है,शरीर कि ग्रंथियों का विसर्जन। तो नई ग्रंथियां तो बनाएं नहीं,और पुरानी ग्रंथियां विसर्जन करने का उपाय करें।और उसके उपाय के लिए जरुरी है कि सप्ताह में एक बार,दो बार अकेले कमरे में बंद हो जाएँ और शरीर जैसा करना चाहे, करने दें। चिल्लाएं, नाचें, कूदें, और आप हैरान होंगे,आधा घंटे कि उस उछल- कूद के बाद आप बहुत रिलेक्स्ड,बहुत शांत,बहुत स्वस्थ अनुभव करेंगे।
ओशो ध्यान सुत्र *

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