चक्रमण सुमिरन एक वरदान है

चक्रमण सुमिरन एक वरदान है. इसे गौतम बुद्ध ने आविष्कृत किया था इसके मूल स्वरूप में. यह एक ऐसी विधि है जिसमे व्यायाम, प्राणायाम. भक्ति, स्मरण, ध्यान, ऊर्जा ग्रहण, आदि विधाओं का सुंदर समन्वय है. सद्गुरु त्रिविर की अपार करुणा से यह ओशो धारा साधकों के लिए उपलब्ध है. इसकी महत्ता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है की प्रत्येक समाधि में सद्गुरु स्वयं प्रत्येक साधक को इसके लिए प्रशिक्षित करते हैं. 
सद्गुरु का आग्रह है की यदि किसी दिन सुमिरन छूट जाए तो भी प्रयास होना चाहिए की चक्रमण न छूते.
एक दिन चक्रमण सुमिरन के छूटने से ७ दिन पीछे हो जाती है साधना.
इतनी महिमा से युक्त चक्रमण सुमिरन के लाभ आइये जाने क्या क्या हैं?
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चक्रमण सुमिरन के लाभ-

१. स्वांस गहरी होने से प्राणायाम के समस्त लाभ मिलते हैं.
- फेफड़ों में ऑक्सीजन की प्रचुर आपूर्ति हो जाने से फेफड़ो से सम्बंधित विकार जैसे अस्थमा, दमा, खांसी, स्वांस रोग, काफ, सर्दी जुकाम, निमोनिया आदि रोग नही होते.

२. प्राण की आपूर्ति रक्त में प्रचुर मात्रा में हो जाने से व्याधियां दूर हो जाती हैं क्यूँ की प्राण की कमी से ही व्याधिया होती हैं.

३. रक्त व त्वचा सम्बन्धी व्याधियां नही होती.. क्यूँ की एक घंटे का स्वांस प्रयोग समस्त रक्त का शुद्धिकरण कर देता है.
अतः. रक्त विकार नही होते और यदि हों तो ठीक हो जाते हैं.

४ सौन्दर्य वर्धक है ये. प्राणों का संचार शरीर व नशों के समस्त अवरोध और ग्रंथियों को खोल देता है. ग्रंथियां खुलने से शरीर व मन में समस्वरता आ जाती है और सौन्दर्य आ जाता है.

५. ह्रदय रोगों में तेज चलना और गहरी स्वांश लाभकारी हैं. स्वांस से धमनियों को हलकी मसाज मिलती रहती है जिससे अवरोध खुल जाते हैं. ह्रदय रोगों की आशंका समाप्त हो जाती है.

६. चक्रों में अवरोध बड़े कष्टकारी हो जाते हैं कभी कभी. चक्रमण से यह अवरोध खुल जाते हैं. चक्र सक्रीय हो जाते हैं और साधक निर्भार हो जाता है.

७. नेत्र ज्योति बढती है क्यूँ की प्राण स्तर बढने से सबसे पहले नेत्र ठीक होते हैं.
चक्रमण के समय मुद्रा लगाने से प्राणों का संचार तीव्रतम हो जाता है. थोड़े ही दिनों में साधक का चश्मा हट जाता है.

८. सुमिरन से साधक एक तादात्म्य को प्राप्त होता है और परम सत्ता से नाद व नूर के माध्यम से ऐक्य का अनुभव करता है. सुमिरन भक्ति की अग्नि में घी की तरह है जो इसे और प्रज्ज्वलित करती है.

९. चक्रमण सुमिरन उच्च व निम्न रक्तचाप में बहुत लाभ दायक है. क्यूँ की मन व शरीर के तल पर यह समवेत कार्य करता है. यह मेरा स्वानुभव है. १ माह में मेरा उच्च रक्तचाप ठीक हो गया.

१०. कैंसर का प्रमुख कारण है कोशिकाओं को ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति न हो पाना, यह अभी शोध से प्रकाश में आया है.
सुमिरन से कैंसर की संभावना नही रहती. 

११. अन, तन और आत्मा में समस्वरता आती है और साधक परमात्मा से एकाकार हो जाता है. जगत से प्रेम हो जाता है. मन अहोभाव से आपूरित हो जाता है. अहोभाव जीवन की शैली हो जाती है.

१२. साधक धीरे धीरे परमात्मा से एकाकार हो जाता है.

 

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