जिबरिश ध्यान विधि

इस ध्यान प्रयोग में आपको जब्बार बन जाना है। यह एक घंटे का ध्यान है; बीस-बीस मिनट के तीन चरण हैं। सायं तीन से छह बजे के बीच इसे करें।

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पहला चरण : खुले आकाश के नीचे विश्रामपूर्वक मुद्रा में लेट जाएं और खुली आंख से आकाश में झांकें। किसी बिन्दु-विशेष पर नहीं, बल्कि सम्पूर्ण आकाश में।

 

 

दूसरा चरण : अब बैठ जाएं, आंखें खुली रखें और आकाश के सामने जिबरिश में- यानी अर्थहीन, अनाप-शनाप बोलना शुरू करें। बीस मिनट के लिए 'जब्बार-जैसे' बन जाएं- जो भी मन में आए, बोलें, चीखें, चिंघाड़ें, किलकारियां मारें, ठहाके लगाएं- कुछ भी।

 

तीसरा चरण : शांत हो जाएं, आंख बन्द कर लें और विश्राम में चले जाएं। अब भीतर के आकाश में- अन्तराकाश में झांकें। बीस मिनट अनाप-शनाप बक चुकने पर आप अपने को इतना शांत और आकाशवत् महसूस करेंगे कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि आपके भीतर इतना बड़ा आकाश है। इसे अकेले करें।

 

 

 

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