देखने के संबंध में सातवीं विधि

 : किसी विषय को देखो, फिर धीरे-धीरे उससे अपनी दृष्‍टि हटा लो, और फिर धीरे-धीरे उससे अपने विचार हटा लो। तब। "
‘’किसी विषय को देखो……….।‘’

किसी फूल को देखो। लेकिन याद रहे कि इस देखने का अर्थ क्‍या है। केवल देखो, विचार मत करो। मुझे यह बार-बार कहने की जरूरत नहीं है। तुम सदा स्‍मरण रखो कि देखने का देखना भर है; विचार मत करो। अगर तुम सोचते हो तो वह देखना नहीं है; तब तुमने सब कुछ दूषित कर दिया। यह शुद्ध देखना है महज देखना।

‘’किसी विषय को देखा…….।‘’

किसी फूल को देखो। गुलाब को देखा।

‘’फिर धीरे-धीरे उससे अपनी दृष्‍टि हटा लो।‘’

पहले फूल को देखा, विचार हटाकर देखो। और जब तुम्‍हें लगे कि मन में कोई विचार नहीं बचा सिर्फ फूल बचा है। तब हल्‍के-हल्‍के अपनी आंखों को फूल से अलग करो। धीरे-धीर फूल तुम्‍हारी दृष्‍टि से ओझल हो जाएगा। पर उसका विंब तुम्‍हारे साथ रहेगा। विषय तुम्‍हारी दृष्‍टि से ओझल हो जाएगा। तुम दृष्‍टि हटा लोगे। अब बाहरी फूल तो नहीं रहा; लेकिन उसका प्रतिबिंब तुम्‍हारी चेतना के दर्पण में बना रहेगा।

‘’किसी विषय को देखा, फिर धीरे-धीरे उससे अपनी दृष्‍टि हटा लो, और फिर धीरे-धीरे उससे अपने विचार हटा लो। अब।‘’

तो पहल बाहरी विषय से अपने को अलग करो। तब भीतरी छवि बची रहेगी; वह गुलाब का विचार होगा। अब उस विचार को भी अलग करो। यह कठिन होगा। यह दूसरा हिस्‍सा कठिन है। लेकिन अगर पहले हिस्‍से को ठीक ढंग से प्रयोग में ला सको जिस ढंग से वह कहा गया है, तो यह दूसरा हिस्‍सा उतना कठिन नहीं होगा। पहले विषय से अपनी दृष्‍टि को हटाओं। और तब आंखें बद कर लो। और जैसे तुमने विषय से अपनी दृष्‍टि अलग की वैसे ही अब उसकी छवि से अपने विचार को, अपने को अलग कर लो। अपने को अलग करो; उदासीन हो जाओ। भीतर भी उसे मत देखो; भाव करो कि तुम उससे दूर हो। जल्‍दी ही छवि भी विलीन हो जाएगी।

पहले विषय विलीन होता है, फिर छवि विलीन होती है। और जब छवि विलीन होती है, शिव कहते है, ‘’तब, तब तुम एकाकी रह जाते हो। उस एकाकीपन में उस एकांत में व्‍यक्‍ति स्‍वयं को उपलब्‍ध होता है, वह अपने केंद्र पर आता है, वह अपने मूल स्‍त्रोत पर पहुंच जाता है।

यह एक बहुत बढ़िया ध्‍यान है। तुम इसे प्रयोग में ला सकते हो। किसी विषय को चुन लो। लेकिन ध्‍यान रहे कि रोज-रोज वही विषय रहे। ताकि भीतर एक ही प्रतिबिंब बने और एक ही प्रतिबिंब से तुम्‍हें अपने को अलग करना पड़े। इसी विधि के प्रयोग के लिए मंदिरों में मूर्तियां रखी गई थी। मूर्तियां बची है, विधि खो गई।

तुम किसी मंदिर में जाओ और इस विधि का प्रयोग करो। वहां महावीर या बुद्ध या राम या कृष्‍ण किसी की भी मूर्ति को देखो। मूर्ति को निहारो। मूर्ति पर अपने को एकाग्र करो। अपने संपूर्ण मन को मूर्ति पर इस भांति केंद्रित करो कि उसकी छवि तुम्‍हारे भीतर साफ-साफ अंकित हो जाए। फिर अपनी आंखों को मूर्ति से अलग करो और आंखों को बंद करो। उसके बाद छवि को भी अलग करो, मन से उसे बिलकुल पोंछ दो। तब वहां तुम अपने समग्र एकाकीपन में, अपनी समग्र शुद्धता में, अपनी समग्र निर्दोषता में प्रकट हो जाओगे।

उसे पा लेना ही मुक्‍त है। उसे पा लेना ही सत्‍य है। "

​ओशो 

Vote: 
No votes yet

New Dhyan Updates

Total views Views today
साधक के लिए पहली सीढ़ी शरीर है 434 6
ओशो की सक्रिय ध्यान विधि 1,630 4
जिबरिश ध्यान विधि 588 3
नासाग्र को देखना (ध्‍यान)—ओशो 1,110 3
ध्यान: श्वास को विश्रांत करें 255 3
स्वर्णिम प्रकाश ध्यान : ओशो 398 2
स्त्रियां पुरुष के लिए आकर्षक क्यों बनना चाहती हैं जबकि वे पुरुषों की कामुकता जरा भी पसंद नहीं करतीं ? 626 2
सिरविहीन होने के प्रयोग को--करके देखो 400 2
साप्ताहिक ध्यान : अनुभव करें, विचारें नहीं 193 2
ध्यान आता है, एक फुसफुसाहट की तरह 383 2
ध्यान : ज्ञान और अज्ञान, दोनों के पार 280 2
ध्यान : अपने विचारों से तादात्मय तोड़ें 266 2
दूसरे का अवलोकन करो 360 2
ग्रंथियों का पता लगाने का एक प्रयोग 413 2
कर्म का नियम 296 2
शरीर और मन दो अलग चीजें नहीं हैं। 340 2
ध्यान : संयम साधना 306 1
ध्यान :: गर्भ की शांति पायें 256 1
ध्यान विधि : - ओशो 406 1
ध्यान : स्टॉप! (जैसे ही कुछ करने की वृत्ति हो, रुक जाओ।) 259 1
ध्यान : "हां' का अनुसरण 337 1
ओशो देववाणी ध्यान 1,609 1
साप्ताहिक ध्यान : संयम साधना 219 1
आज के युग मे ओशो सक्रिय ध्यान 465 1
सैक्स मनुष्य की सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऊर्जा का नाम है। 982 1
ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ? 279 1
साप्ताहिक ध्यान "मैं यह नहीं हूं' 183 1
ध्यान : गर्भ की शांति पायें 365 1
ध्यान : अपनी श्वास का स्मरण रखें 225 1
शरीर की शक्ति का ध्यान में उपयोग 229 1
ध्यान : क्या आप स्वयं के प्रति सच्चे हैं? 353 1
ओशो स्टाॅप मेडिटेशन 320 1
सम्मोहन: दुर्व्यसनों से छुटकारा पाने का सशक्त उपाय 213 1
ओशो डाइनैमिक ध्‍यान 374 1
साप्ताहिक ध्यान : ध्वनि के केंद्र में स्नान करो 282 1
सफलता कोई मूल्य नहीं है 257 1
साप्ताहिक ध्यान : कल्पना द्वारा नकारात्मक को सकारात्मक में बदलना 189 1
क्या आप सिगरेट छोड़ना चाहते हैं। 231 1
जिस दिन जागरण पूर्ण होगा उस दिन : साक्षी साधना 329 1
ध्यान : प्रमुदिता प्रकाश है 256 1
साक्षी को खोजना— ओशो 757 1
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : संतुलन ध्यान 166 1
साप्ताहिक ध्यान:: त्राटक ध्यान 232 1
ध्यान : अपने हृदय में शांति का अनुभव करें 361 1
ध्यान : ध्वनि के केंद्र में स्नान करो 261 1
ध्यान : अनुभव करें, विचारें नहीं 248 1
पंख की भांति छूना ध्‍यान —ओशो 400 1
देखने के संबंध में सातवीं विधि 401 1
ध्यान : श्वास : सबसे गहरा मंत्र 312 1
साप्ताहिक ध्यान : अवधान को बढ़ा 237 1
ध्वनि के केंद्र में स्नान करो 347 1
मैं एक युवती के प्रेम में था। वह मुझे धोखा दे गई ! मैं क्या करूं 329 1
ओशो – अपनी नींद में ध्‍यान कैसे करें 686 1
साप्ताहिक ध्यान : श्वास को शिथिल करो 185 1
ओशो —हर चक्र की अपनी नींद 542 1
अपनी श्वास का स्मरण रखें 397 1
प्रेम से भर रहा है ? 267 0
जब हनीमून समाप्त हो जाता है तो इसके बाद क्या? 335 0
साप्ताहिक ध्यान : संतुलन ध्यान 205 0
क्या यंत्र समाधि प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं? 182 0
ध्यान :: कभी, अचानक ऐसे हो जाएं जैसे नहीं हैं 338 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : श्वास को विश्रांत करें 191 0
ओशो जिबरिश ध्यान विधि 352 0
समाधि का पहला अनुभव कैसा होता है? 477 0
ध्यान : कल्पना द्वारा नकारात्मक को सकारात्मक में बदलना 286 0
ध्यान : सब काल्पनिक है 310 0
बहुत समय बाद किसी मित्र से मिलने पर जो हर्ष होता है, उस हर्ष में लीन होओ। 380 0
प्यारे प्रभु! प्रश्नों के अंबार लगे हैं 364 0
आप ट्रिम होना चाहते है, यह देखे 408 0
ध्यान शरीर की आदत नहीं है 280 0
ओशो नाद ब्रह्म ध्‍यान 1,092 0
यही शरीर, बुद्ध: हां, तुम। 321 0
प्रत्येक ध्यान के शीघ्र बाद करुणावान रहो 367 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : क्या आप स्वयं के प्रति सच्चे हैं? 204 0
युवक कौन .... ?? 332 0
व्यक्तियों को वस्तु मत बनाओ 269 0
प्रेम का अनुभव पूर्णता का अनुभव है : ईशावास्य उपनिषद 285 0
स्‍त्री-पुरूष जोड़ों के लिए नाद ब्रह्म ध्‍यान 739 0
ओशो नियो-विपस्याना ध्यान 306 0
दूसरे को तुम उतना ही देख पाओगे जितना तुम अपने को देखते हो 292 0
हँसने के पाँच फायदे 495 0
मैं--तू' ध्यान - (ओशो: ध्यान विज्ञान) 251 0
ध्यान: क्या आप स्वयं के प्रति सच्चे हैं? 319 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान 326 0
शांत प्रयोग सफल नहीं होता 385 0
तकिया पीटना ( ध्यान ) - नकारात्मकता को निकाल फेंकना 403 0
मैं अकेलेपन से बहुत दुखी हूं, मैं इसके लिए क्या करूं? 472 0
स्‍त्री-पुरूष जोड़ों के लिए नाद ब्रह्म ध्‍यान 741 0
साप्ताहिक ध्यान : सब काल्पनिक है 216 0
सहज योग 528 0
श्वास को शिथिल करो! 338 0
ध्यान : जहां कहीं भी तुम्हारा अवधान उतरे, उसी बिंदु पर, अनुभव। 248 0
ध्यान : मौन का रंग 360 0
ओशो गौरीशंकर ध्‍यान 471 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान :: गर्भ की शांति पायें 156 0
साप्ताहिक ध्यान : ज्ञान और अज्ञान, दोनों के पार 188 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान -दूसरे का अवलोकन करो 180 0
संकल्प कैसे काम करता है? 1,075 0
ध्यान : काम ऊर्जा से मुक्ति 330 0
शब्दों के बिना देखना 236 0
ओशो नटराज ध्‍यान की विधि 446 0
साप्ताहिक ध्यान : "हां' का अनुसरण 191 0
क्या जीवन को सीधा देखना संभव नहीं है? 373 0
ध्यान :"मैं यह नहीं हूं' 311 0
ओशो – तीसरी आँख सूक्ष्‍म शरीर का अंग है 521 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : नकारात्मकता को निकाल फेंकना 232 0
ध्यान -:पूर्णिमा का चाँद 704 0
साप्ताहिक ध्यान : मौन का रंग 275 0
ध्यान : अपना मुंह बंद करो! 310 0
ध्यान : संतुलन ध्यान 238 0
त्राटक-एकटक देखने की विधि है | 350 0
पुनर्जन्‍म की बात 325 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान - व्यस्त लोगों के लिये ध्यान 154 0
संन्यासी और गृहस्थी में क्या फर्क है? 293 0
करने की बीमारी 257 0
आप अच्छे हैं या स्वाभाविक? 320 0
जगत ऊर्जा का विस्तार है 383 0
चक्रमण सुमिरन एक वरदान है 566 0
प्रेम जितना बढ़ेगा, सेक्‍स उतना क्षीण होगा: ओशो 365 0
ध्यान : संतुलन ध्यान 274 0
विद्यार्थी क्यों अनुशासनहीन हो गए? 369 0
ध्यान:: त्राटक ध्यान : ओशो 361 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : श्वास : सबसे गहरा मंत्र 247 0