ध्यान : अनुभव करें, विचारें नहीं

ध्यान : अनुभव करें, विचारें नहीं

तुम बगीचे में बैठे हो और सड़क पर ट्रैफिक है, शोरगुल है और तरहत्तरह की आवाजें आ रही हैं। तुम अपनी आंखें बंद कर लो और वहां होने वाली सबसे सूक्ष्म आवाज को पकड़ने की कोशिश करो। कोई कौआ कांव-कांव कर रहा है; कौए की इस कांव-कांव पर अपने को एकाग्र करो। सड़क पर यातायात का भारी शोर है, इसमें कौए की आवाज इतनी धीमी है, इतनी सूक्ष्म है कि जब तक तुम अपने बोध को उस पर एकाग्र नहीं करोगे तुम्हें उसका पता भी नहीं चलेगा। लेकिन अगर तुम एकाग्रता से सुनोगे तो सड़क का सारा शोरगुल दूर हट जाएगा और कौए की आवाज केंद्र बन जाएगी। और तुम उसे सुनोगे, उसके सूक्ष्म भेदों को भी सुनोगे। वह बहुत सूक्ष्म है, लेकिन तुम उसे सुन पाओगे।

 

तो अपनी संवेदनशीलता को बढ़ाओ। जब कुछ स्पर्श करो, जब कुछ सुनो, जब भोजन करो, जब स्नान करो तो अपनी इंद्रियों को खुली रहने दो। और विचार मत करो, अनुभव करो।

 

तुम स्नान कर रहे हो; अपने ऊपर गिरते हुए पानी की ठंडक को महसूस करो। उस पर विचार मत करो। यह मत कहो कि पानी बहुत ठंडा है, बहुत अच्छा है। कुछ मत कहो, कोई शब्द मत दो। क्योंकि जैसे ही तुम शब्द देते हो, तुम अनुभव से चूक जाते हो। जैसे ही शब्द आते हैं, मन सक्रिय हो जाता है। कोई शब्द मत दो। शीतलता को अनुभव करो, मगर यह मत कहो कि पानी ठंडा है। कुछ कहने की जरूरत नहीं है।

 

हम लगातार बोलते रहते हैं और हमें यह भी बोध नहीं रहता कि हम क्या बोल रहे हैं। मन की इस सतत बातचीत को बंद करो तो ही तुम अपने भावों को प्रगाढ़ कर सकते हो। और भाव प्रगाढ़ हो तो यह विधि तुम्हारे लिए चमत्कार कर सकती है।

 

अनुभव करो: मेरा विचार...

 

आंखों को बंद कर लो और विचार को अनुभव करो। विचारों की सतत धारा चल रही है; विचारों का एक प्रवाह, एक धारा बही जा रही है। इन विचारों को अनुभव करो। और उनकी उपस्थिति को अनुभव करो। तुम जितना ही उन्हें अनुभव करोगे, वे उतने ही अधिक प्रकट होंगे--पर्त दर पर्त। न सिर्फ वे विचार प्रकट होंगे जो सतह पर हैं; उनके पीछे और भी विचारों की पर्तें हैं; और उनके पीछे भी और-और पर्तें हैं--पर्तों पर पर्तें हैं।

 

और विधि कहती है, अनुभव करो: मेरा विचार। और हम कहे चले जाते हैं: 'ये मेरे विचार हैं।' लेकिन अनुभव करो: क्या वे सचमुच तुम्हारे हैं? क्या तुम कह सकते हो कि वे मेरे हैं? तुम जितना ही अनुभव करोगे उतना ही तुम्हारे लिए यह कहना कठिन होगा कि वे मेरे हैं। वे सब उधार हैं; वे सब बाहर से आए हैं। वे तुम्हारे पास आए हैं, लेकिन वे तुम्हारे नहीं हैं। कोई विचार तुम्हारा नहीं है, वह धूल है जो तुम पर आ जमी है। चाहे तुम्हें यह पता भी न हो कि किस स्रोत से यह विचार आया है तो भी विचार तुम्हारा नहीं है। और अगर तुम पूरी चेष्टा करोगे तो तुम जान लोगे कि यह विचार कहां से आया है।

 

सिर्फ आंतरिक मौन तुम्हारा है। किसी ने तुम्हें यह नहीं दिया है, तुम इसके साथ ही पैदा हुए थे और इसके साथ ही तुम मरोगे। विचार तुम्हें दिए गए हैं, तुम उनसे संस्कारित हो। अगर तुम हिंदू हो तो तुम्हारे विचार एक तरह के हैं। अगर तुम मुसलमान हो तो तुम्हारे विचार और तरह के हैं। और अगर तुम कम्युनिस्ट हो तो तुम्हारे विचार कुछ और ही हैं। वे तुम्हें दिए गए हैं, या संभवतः तुमने उन्हें स्वेच्छा से ग्रहण किया है, लेकिन कोई विचार तुम्हारा नहीं है।

 

अगर तुम देख सको कि विचार मेरे नहीं हैं तो कुछ भी तुम्हारा नहीं रह जाता है। क्योंकि विचार ही हर चीज की जड़ में हैं। मेरा घर, मेरी संपत्ति, मेरा परिवार--ये चीजें तो बाहरी हैं; लेकिन गहरे में विचार मेरे हैं। अगर विचार मेरे हैं तो ही ये चीजें, इनका विस्तार, इनका फैलाव मेरा हो सकता है। अगर विचार मेरे नहीं हैं तो कुछ भी महत्व का न रहा। क्योंकि यह भी एक विचार ही है कि तुम मेरी पत्नी हो, कि तुम मेरे पति हो। यह भी एक विचार ही है। और अगर बुनियादी तौर से विचार ही मेरा नहीं है तो पत्नी मेरी कैसे हो सकती है? या पति मेरा कैसे हो सकता है? विचार के मिटते ही सारा संसार मिट जाता है, तब तुम संसार में रह कर भी संसार में नहीं रहते हो।

 

Vote: 
No votes yet
Meditation Category: 

New Dhyan Updates

Total views Views today
सिरविहीन होने के प्रयोग को--करके देखो 258 5
ग्रंथियों का पता लगाने का एक प्रयोग 318 4
प्रेम जितना बढ़ेगा, सेक्‍स उतना क्षीण होगा: ओशो 284 4
ध्यान : गर्भ की शांति पायें 306 4
स्‍त्री-पुरूष जोड़ों के लिए नाद ब्रह्म ध्‍यान 607 4
ध्यान : काम ऊर्जा से मुक्ति 255 3
साधक के लिए पहली सीढ़ी शरीर है 360 3
साप्ताहिक ध्यान : अवधान को बढ़ा 180 3
समाधि का पहला अनुभव कैसा होता है? 381 3
व्यक्तियों को वस्तु मत बनाओ 226 3
सैक्स मनुष्य की सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऊर्जा का नाम है। 815 3
सहज योग 381 3
मैं अकेलेपन से बहुत दुखी हूं, मैं इसके लिए क्या करूं? 403 3
सफलता कोई मूल्य नहीं है 208 2
कर्म का नियम 241 2
जिस दिन जागरण पूर्ण होगा उस दिन : साक्षी साधना 270 2
पुनर्जन्‍म की बात 265 2
ध्यान : ध्वनि के केंद्र में स्नान करो 214 2
आप अच्छे हैं या स्वाभाविक? 262 2
नासाग्र को देखना (ध्‍यान)—ओशो 904 2
साप्ताहिक ध्यान : श्वास को शिथिल करो 139 2
ध्यान: श्वास को विश्रांत करें 191 2
जगत ऊर्जा का विस्तार है 315 2
शरीर और मन दो अलग चीजें नहीं हैं। 278 2
ओशो – अपनी नींद में ध्‍यान कैसे करें 567 2
अपनी श्वास का स्मरण रखें 334 2
ध्यान:: त्राटक ध्यान : ओशो 287 2
ओशो —हर चक्र की अपनी नींद 430 2
जिबरिश ध्यान विधि 479 2
ओशो देववाणी ध्यान 1,407 2
ध्यान : सब काल्पनिक है 245 2
बहुत समय बाद किसी मित्र से मिलने पर जो हर्ष होता है, उस हर्ष में लीन होओ। 322 2
प्यारे प्रभु! प्रश्नों के अंबार लगे हैं 289 2
प्रेम का अनुभव पूर्णता का अनुभव है : ईशावास्य उपनिषद 225 2
ध्यान : जहां कहीं भी तुम्हारा अवधान उतरे, उसी बिंदु पर, अनुभव। 209 2
संकल्प कैसे काम करता है? 822 2
साप्ताहिक ध्यान : "हां' का अनुसरण 141 1
साप्ताहिक ध्यान : कल्पना द्वारा नकारात्मक को सकारात्मक में बदलना 140 1
क्या आप सिगरेट छोड़ना चाहते हैं। 166 1
शब्दों के बिना देखना 199 1
ध्यान -:पूर्णिमा का चाँद 608 1
साप्ताहिक ध्यान : मौन का रंग 221 1
क्या जीवन को सीधा देखना संभव नहीं है? 269 1
ओशो – तीसरी आँख सूक्ष्‍म शरीर का अंग है 434 1
ध्यान : अपना मुंह बंद करो! 250 1
ध्यान : संतुलन ध्यान 196 1
ध्यान : अनुभव करें, विचारें नहीं 192 1
ध्वनि के केंद्र में स्नान करो 272 1
संन्यासी और गृहस्थी में क्या फर्क है? 237 1
चक्रमण सुमिरन एक वरदान है 493 1
मैं एक युवती के प्रेम में था। वह मुझे धोखा दे गई ! मैं क्या करूं 264 1
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : श्वास : सबसे गहरा मंत्र 179 1
स्वर्णिम प्रकाश ध्यान : ओशो 324 1
प्रेम से भर रहा है ? 213 1
ध्यान : संयम साधना 243 1
जब हनीमून समाप्त हो जाता है तो इसके बाद क्या? 274 1
ध्यान :: गर्भ की शांति पायें 192 1
ध्यान विधि : - ओशो 344 1
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : श्वास को विश्रांत करें 147 1
स्त्रियां पुरुष के लिए आकर्षक क्यों बनना चाहती हैं जबकि वे पुरुषों की कामुकता जरा भी पसंद नहीं करतीं ? 493 1
ध्यान : स्टॉप! (जैसे ही कुछ करने की वृत्ति हो, रुक जाओ।) 215 1
ओशो की सक्रिय ध्यान विधि 1,409 1
ध्यान : "हां' का अनुसरण 274 1
प्रत्येक ध्यान के शीघ्र बाद करुणावान रहो 305 1
आज के युग मे ओशो सक्रिय ध्यान 390 1
ध्यान शरीर की आदत नहीं है 221 1
ओशो नाद ब्रह्म ध्‍यान 921 1
युवक कौन .... ?? 285 1
स्‍त्री-पुरूष जोड़ों के लिए नाद ब्रह्म ध्‍यान 653 1
शांत प्रयोग सफल नहीं होता 276 1
तकिया पीटना ( ध्यान ) - नकारात्मकता को निकाल फेंकना 329 1
ध्यान: क्या आप स्वयं के प्रति सच्चे हैं? 265 1
शरीर की शक्ति का ध्यान में उपयोग 163 1
साप्ताहिक ध्यान : सब काल्पनिक है 167 1
ध्यान आता है, एक फुसफुसाहट की तरह 293 1
ध्यान : क्या आप स्वयं के प्रति सच्चे हैं? 277 1
ध्यान : मौन का रंग 302 1
ओशो गौरीशंकर ध्‍यान 388 1
साप्ताहिक ध्यान : ध्वनि के केंद्र में स्नान करो 216 1
दूसरे का अवलोकन करो 266 1
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान -दूसरे का अवलोकन करो 138 1
ध्यान : अपने विचारों से तादात्मय तोड़ें 210 1
सम्मोहन: दुर्व्यसनों से छुटकारा पाने का सशक्त उपाय 162 1
ओशो नटराज ध्‍यान की विधि 354 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : नकारात्मकता को निकाल फेंकना 176 0
ध्यान :"मैं यह नहीं हूं' 249 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : संतुलन ध्यान 125 0
त्राटक-एकटक देखने की विधि है | 299 0
साप्ताहिक ध्यान:: त्राटक ध्यान 157 0
ध्यान : प्रमुदिता प्रकाश है 213 0
साक्षी को खोजना— ओशो 570 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान - व्यस्त लोगों के लिये ध्यान 105 0
देखने के संबंध में सातवीं विधि 332 0
ध्यान : अपने हृदय में शांति का अनुभव करें 281 0
पंख की भांति छूना ध्‍यान —ओशो 323 0
करने की बीमारी 200 0
ध्यान : श्वास : सबसे गहरा मंत्र 232 0
ध्यान : संतुलन ध्यान 229 0
विद्यार्थी क्यों अनुशासनहीन हो गए? 303 0
साप्ताहिक ध्यान : संतुलन ध्यान 152 0
ओशो जिबरिश ध्यान विधि 301 0
क्या यंत्र समाधि प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं? 129 0
ध्यान :: कभी, अचानक ऐसे हो जाएं जैसे नहीं हैं 274 0
साप्ताहिक ध्यान : संयम साधना 156 0
ध्यान : कल्पना द्वारा नकारात्मक को सकारात्मक में बदलना 212 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : क्या आप स्वयं के प्रति सच्चे हैं? 157 0
आप ट्रिम होना चाहते है, यह देखे 355 0
यही शरीर, बुद्ध: हां, तुम। 254 0
दूसरे को तुम उतना ही देख पाओगे जितना तुम अपने को देखते हो 246 0
साप्ताहिक ध्यान : अनुभव करें, विचारें नहीं 146 0
हँसने के पाँच फायदे 388 0
ओशो नियो-विपस्याना ध्यान 235 0
साप्ताहिक ध्यान "मैं यह नहीं हूं' 138 0
मैं--तू' ध्यान - (ओशो: ध्यान विज्ञान) 195 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान 265 0
ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ? 203 0
श्वास को शिथिल करो! 272 0
ध्यान : अपनी श्वास का स्मरण रखें 178 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान :: गर्भ की शांति पायें 119 0
साप्ताहिक ध्यान : ज्ञान और अज्ञान, दोनों के पार 132 0
ओशो स्टाॅप मेडिटेशन 256 0
ध्यान : ज्ञान और अज्ञान, दोनों के पार 234 0
ओशो डाइनैमिक ध्‍यान 316 0