ध्यान : संतुलन ध्यान

ध्यान : संतुलन ध्यान

लाओत्से के साधना-सूत्रों में एक गुप्त सूत्र आपको कहता हूं, जो उसकी किताबों में उलेखित नहीं है, लेकिन कानों-कान लाओत्से की परंपरा में चलता रहा है। वह सूत्र है लाओत्से की ध्यान की पद्धति का। वह सूत्र यह है।

 

लाओत्से कहता है कि पालथी मार कर बैठ जाएं और भीतर ऐसा अनुभव करें कि एक तराजू है, बैलेंस, एक तराजू। उसके दोनों पलड़े आपकी दोनों छातियों के पास लटके हुए हैं और उसका कांटा ठीक आपकी दोनों आंखों के बीच, तीसरी आंख जहां समझी जाती है, वहां उसका कांटा है। तराजू की डंडी आपके मस्तिष्क में है। दोनों उसके पलड़े आपकी दोनों छातियों के पास लटके हुए हैं। और लाओत्से कहता है, चौबीस घंटे ध्यान रखें कि वे दोनों पलड़े बराबर रहें और कांटा सीधा रहे।

 

लाओत्से कहता है कि अगर भीतर उस तराजू को साध लिया, तो सब सध जाएगा। लेकिन आप बड़ी मुश्किल में पड़ेंगे! जरा इसका प्रयोग करेंगे, तब आपको पता चलेगा। जरा सी श्वास भी ली नहीं कि एक पलड़ा नीचा हो जाएगा, एक पलड़ा ऊपर हो जाएगा। अकेले बैठे हैं, और एक आदमी बाहर से निकल गया दरवाजे से। उसको देख कर ही, अभी उसने कुछ किया भी नहीं, एक पलड़ा नीचा, एक ऊपर हो जाएगा।

 

लाओत्से ने कहा है कि भीतर चेतना को एक संतुलन! दोनों विपरीत द्वंद्व एक से हो जाएं और कांटा बीच में बना रहे।

 

जीवन में सुख हो या दुख, सम्मान या अपमान, अंधेरा या उजाला, भीतर के तराजू को साधते चला जाए कोई, तो एक दिन उस परम संतुलन पर आ जाता है, जहां जीवन तो नहीं होता, अस्तित्व होता है; जहां लहर नहीं होती, सागर होता है; जहां मैं नहीं होता, सब होता है।

 

<p>ओशो: ध्यान विज्ञान #43</p>

 

Vote: 
No votes yet

New Dhyan Updates

Total views Views today
ध्यान : मौन का रंग 129 13
ओशो की सक्रिय ध्यान विधि 853 9
नासाग्र को देखना (ध्‍यान)—ओशो 409 9
ध्यान : "हां' का अनुसरण 97 9
जिबरिश ध्यान विधि 214 3
ध्यान : ज्ञान और अज्ञान, दोनों के पार 99 3
ध्यान: क्या आप स्वयं के प्रति सच्चे हैं? 101 2
ध्यान : अपने विचारों से तादात्मय तोड़ें 87 2
आप अच्छे हैं या स्वाभाविक? 105 2
शरीर और मन दो अलग चीजें नहीं हैं। 102 2
साक्षी को खोजना— ओशो 269 2
जब हनीमून समाप्त हो जाता है तो इसके बाद क्या? 101 2
देखने के संबंध में सातवीं विधि 160 2
ध्यान : स्टॉप! (जैसे ही कुछ करने की वृत्ति हो, रुक जाओ।) 88 2
प्रेम जितना बढ़ेगा, सेक्‍स उतना क्षीण होगा: ओशो 123 2
ध्यान शरीर की आदत नहीं है 88 2
ओशो जिबरिश ध्यान विधि 158 1
मैं अकेलेपन से बहुत दुखी हूं, मैं इसके लिए क्या करूं? 203 1
बहुत समय बाद किसी मित्र से मिलने पर जो हर्ष होता है, उस हर्ष में लीन होओ। 157 1
युवक कौन .... ?? 143 1
ओशो नाद ब्रह्म ध्‍यान 530 1
मैं--तू' ध्यान - (ओशो: ध्यान विज्ञान) 77 1
स्‍त्री-पुरूष जोड़ों के लिए नाद ब्रह्म ध्‍यान 373 1
हँसने के पाँच फायदे 135 1
शब्दों के बिना देखना 81 1
सैक्स मनुष्य की सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऊर्जा का नाम है। 394 1
तकिया पीटना ( ध्यान ) - नकारात्मकता को निकाल फेंकना 132 1
ध्यान : क्या आप स्वयं के प्रति सच्चे हैं? 115 1
स्‍त्री-पुरूष जोड़ों के लिए नाद ब्रह्म ध्‍यान 294 1
श्वास को शिथिल करो! 100 1
ध्यान : ध्वनि के केंद्र में स्नान करो 96 1
संकल्प कैसे काम करता है? 287 1
साधक के लिए पहली सीढ़ी शरीर है 168 1
ध्यान -:पूर्णिमा का चाँद 123 1
त्राटक-एकटक देखने की विधि है | 151 1
पुनर्जन्‍म की बात 120 1
करने की बीमारी 75 1
पंख की भांति छूना ध्‍यान —ओशो 161 1
संन्यासी और गृहस्थी में क्या फर्क है? 108 1
ध्यान : संतुलन ध्यान 102 1
मैं एक युवती के प्रेम में था। वह मुझे धोखा दे गई ! मैं क्या करूं 110 1
ध्यान : संयम साधना 97 1
चक्रमण सुमिरन एक वरदान है 238 1
ओशो —हर चक्र की अपनी नींद 192 1
ध्यान विधि : - ओशो 139 1
स्त्रियां पुरुष के लिए आकर्षक क्यों बनना चाहती हैं जबकि वे पुरुषों की कामुकता जरा भी पसंद नहीं करतीं ? 192 1
समाधि का पहला अनुभव कैसा होता है? 153 0
व्यक्तियों को वस्तु मत बनाओ 78 0
व्यस्त लोगों के लिये ध्यान 112 0
सिरविहीन होने के प्रयोग को--करके देखो 137 0
प्यारे प्रभु! प्रश्नों के अंबार लगे हैं 138 0
ओशो देववाणी ध्यान 870 0
ध्यान : जहां कहीं भी तुम्हारा अवधान उतरे, उसी बिंदु पर, अनुभव। 87 0
प्रत्येक ध्यान के शीघ्र बाद करुणावान रहो 147 0
आज के युग मे ओशो सक्रिय ध्यान 244 0
सम्मोहन: दुर्व्यसनों से छुटकारा पाने का सशक्त उपाय 54 0
दूसरे को तुम उतना ही देख पाओगे जितना तुम अपने को देखते हो 131 0
ध्यान : गर्भ की शांति पायें 133 0
ध्यान : काम ऊर्जा से मुक्ति 43 0
शांत प्रयोग सफल नहीं होता 134 0
क्या जीवन को सीधा देखना संभव नहीं है? 121 0
ध्यान :"मैं यह नहीं हूं' 85 0
सहज योग 151 0
ध्यान : संतुलन ध्यान 88 0
ध्यान : प्रमुदिता प्रकाश है 92 0
ओशो गौरीशंकर ध्‍यान 169 0
ध्यान आता है, एक फुसफुसाहट की तरह 158 0
ओशो स्टाॅप मेडिटेशन 105 0
सफलता कोई मूल्य नहीं है 95 0
ध्यान : अनुभव करें, विचारें नहीं 74 0
ओशो डाइनैमिक ध्‍यान 158 0
दूसरे का अवलोकन करो 136 0
कर्म का नियम 94 0
ध्यान : श्वास : सबसे गहरा मंत्र 68 0
ओशो नटराज ध्‍यान की विधि 145 0
ग्रंथियों का पता लगाने का एक प्रयोग 154 0
ध्यान : अपना मुंह बंद करो! 122 0
जगत ऊर्जा का विस्तार है 80 0
ओशो – तीसरी आँख सूक्ष्‍म शरीर का अंग है 218 0
जिस दिन जागरण पूर्ण होगा उस दिन : साक्षी साधना 121 0
ध्यान : अपने हृदय में शांति का अनुभव करें 72 0
विद्यार्थी क्यों अनुशासनहीन हो गए? 107 0
ध्यान:: त्राटक ध्यान : ओशो 88 0
ध्यान :: गर्भ की शांति पायें 53 0
ध्यान :: कभी, अचानक ऐसे हो जाएं जैसे नहीं हैं 99 0
ध्वनि के केंद्र में स्नान करो 124 0
ध्यान : कल्पना द्वारा नकारात्मक को सकारात्मक में बदलना 41 0
ध्यान : सब काल्पनिक है 116 0
ओशो – अपनी नींद में ध्‍यान कैसे करें 170 0
यही शरीर, बुद्ध: हां, तुम। 96 0
अपनी श्वास का स्मरण रखें 175 0
प्रेम से भर रहा है ? 94 0
आप ट्रिम होना चाहते है, यह देखे 89 0
प्रेम का अनुभव पूर्णता का अनुभव है : ईशावास्य उपनिषद 91 0
ओशो नियो-विपस्याना ध्यान 72 0
स्वर्णिम प्रकाश ध्यान : ओशो 154 0