शांत प्रयोग सफल नहीं होता

शांत प्रयोग सफल नहीं होता

शांत प्रयोग सफल नहीं होता। क्योंकि आप भीतर इतने अशांत है कि जब आप आँख बंद करके बैठते हैं तो सिवाय अशांति के भीतर और कुछ भी नहीं होता। वह जो भीतर

अशांति है, वह चक्कर जोर से मारने लगती है। जब आप शांत होकर बैठते हैं, तब आपको सिवाय भीतर के उपद्रव के और कुछ भी नहीं दिखाई पड़ता।इसलिए, उचित तो यह है कि वह जो भीतर का उपद्रव है, उसे भी बाहर निकल जाने दें। हिम्मत से उसको भी बह जाने दें। उसके बह जाने पर, जैसे तूफान के बाद एक शांति आ जाती है, वैसी शांति आपको अनुभव होगी। तूफान तो धीरे-धीरे विलीन हो जाएगा और शांति स्थिर हो जाएगी।

यह कीर्तन का प्रयोग कैथार्सिस है। इसमें जो नाच रहे हैं लोग, कूद रहे हैं लोग, ये उनके भीतर के वेग हैं, जो निकल रहे हैं। इन वेगों के निकल जाने के बाद भीतर परम शून्यता का अनुभव होता है। उसी शून्यता से द्वार मिलता है और हम अनंत की यात्रा पर निकल जाते हैं।

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