ध्यान

ओशो —हर चक्र की अपनी नींद

ओशो —हर चक्र की अपनी नींद

सहस्‍त्रार को छोड़ कर प्रत्‍येक चक्र की अपनी नींद है। सातवें चक्र में बोध समग्र होता है। यह विशुद्ध जागरण की अवस्‍था है। इसीलिए कृष्‍ण गीता में कहते है कि योगी सोता नहीं।

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पंख की भांति छूना ध्‍यान —ओशो

शिव ने कहा: आँख की पुतलियों को पंख की भांति छूने से उसके बीच का हलका पन ह्रदय में खुलता है।

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जिबरिश ध्यान विधि

इस ध्यान प्रयोग में आपको जब्बार बन जाना है। यह एक घंटे का ध्यान है; बीस-बीस मिनट के तीन चरण हैं। सायं तीन से छह बजे के बीच इसे करें।

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पहला चरण : खुले आकाश के नीचे विश्रामपूर्वक मुद्रा में लेट जाएं और खुली आंख से आकाश में झांकें। किसी बिन्दु-विशेष पर नहीं, बल्कि सम्पूर्ण आकाश में।

 

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ध्यान विधि : - ओशो

" ध्यान चेतना की विशुद्ध अवस्था है-जहां कोई विचार नहीं होते, कोई विषय नहीं होता। साधारणतया हमारी चेतना विचारों से, विषयों से, कामनाओं से आच्छादित रहती है। जैसे कि कोई दर्पण धूल से ढंका हो। हमारा मन एक सतत प्रवाह है- विचार चल रहे हैं, कामनाएं चल रही हैं, पुरानी स्मृतियां सरक रही हैं- रात-दिन एक अनवरत सिलसिला है। नींद में भी हमारा मन चलता रहता है, स्वप्न चलते रहते हैं। यह अ-ध्यान की अवस्था है। ठीक इससे उलटी अवस्था ध्यान की है।जब कोई विचार नहीं चलते और कोई कामनाएं सिर नहीं उठातीं, सारा ऊहापोह शांत हो जाता है और हम परिपूर्ण मौन में होते हैं-वह परिपूर्ण मौन ध्यान है। और उसी परिपूर्ण मौन में सत्य Read More : ध्यान विधि : - ओशो about ध्यान विधि : - ओशो

देखने के संबंध में सातवीं विधि

 : किसी विषय को देखो, फिर धीरे-धीरे उससे अपनी दृष्‍टि हटा लो, और फिर धीरे-धीरे उससे अपने विचार हटा लो। तब। "
‘’किसी विषय को देखो……….।‘’

किसी फूल को देखो। लेकिन याद रहे कि इस देखने का अर्थ क्‍या है। केवल देखो, विचार मत करो। मुझे यह बार-बार कहने की जरूरत नहीं है। तुम सदा स्‍मरण रखो कि देखने का देखना भर है; विचार मत करो। अगर तुम सोचते हो तो वह देखना नहीं है; तब तुमने सब कुछ दूषित कर दिया। यह शुद्ध देखना है महज देखना।

‘’किसी विषय को देखा…….।‘’

किसी फूल को देखो। गुलाब को देखा।

‘’फिर धीरे-धीरे उससे अपनी दृष्‍टि हटा लो।‘’ Read More : देखने के संबंध में सातवीं विधि about देखने के संबंध में सातवीं विधि

सैक्स मनुष्य की सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऊर्जा का नाम है।

सैक्स मनुष्य की सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऊर्जा का नाम है। यदि सैक्स सफल हो जाये तो परिग्रह बन जाता है। यदि सैक्स स्वयं की हीनता से विफल हो जाये तो चोरी बन जाता है। यदि सैक्स दूसरे के कारण से विफल हो जाये तो हिंसा बन जाता है। सैक्स के मार्ग पर, कामना के मार्ग पर, इच्छा के मार्ग पर, अगर कोई बाधा बनता हो तो सैक्स हिंसक हो उठता है। अगर कोई बाधा न हो, भीतर की ही क्षमता बाधा बनती हो तो सैक्स चोर हो जाता है। और अगर कोई बाधा न हो, भीतर की कोई अक्षमता न हो और सैक्स सफल हो जाये तो परिग्रह बन जाता है। इस सैक्स को गहरे से समझना जरूरी है। Read More : सैक्स मनुष्य की सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऊर्जा का नाम है। about सैक्स मनुष्य की सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऊर्जा का नाम है।

ओशो की सक्रिय ध्यान विधि

एक घंटे की अवधि के सक्रिय ध्यान के पांच चरण हैं। यह अकेले भी किया जा सकता है। और यदि इसे समूह में किया जाये तो यह और भी सशक्त हो जाता है। यह आपका निजी अनुभव है अत: आप अपने आस-पास दूसरे व्यक्तियों को भूल जायें और पूरा समय आँखें बंद रखें। बेहतर होगा यदि आप आँख पर पट्टी बांध लें। इसे खाली पेट व ढीले वस्त्रों में करना श्रेयस्कर होगा। 

“इस ध्यान में आपको पूरा समय सजग, होशपूर्ण व सचेत रहना होगा। साक्षी बनें रहें। भटक मत जायें। जब आप तीव्र श्वास ले रहे हैं तो संभव है आप भूल जायें - श्वास के साथ इतना तादात्मय कर लें कि साक्षी होना भूल जायें। तब आप चूक गये।  Read More : ओशो की सक्रिय ध्यान विधि about ओशो की सक्रिय ध्यान विधि

ओशो देववाणी ध्यान

हर रात को सोने के पहले तुम एक छोटा सा प्रयोग कर सकते हो जो बहुत ही सहायक होगा। प्रकाश बुझा लो, सोने के लिए तैयार हो कर अपने बिस्तर पर बैठ जाओ--पंद्रह मिनट के लिए। आंखें बंद कर लो और फिर कोई निरर्थक एकसुरी आवाज निकालना शुरू करो। उदाहरण के लिए ल ल ल ल--और प्रतीक्षा करो कि मन तुम्हें नई ध्वनियां देता जाए। एक ही बात याद रखनी है कि वे आवाजें या शब्द उस किसी भाषा के न हों जो तुम जानते हो। यदि तुम अंग्रेजी, जर्मन और इटालियन भाषा जानते हो तो उच्चारित शब्द इन भाषाओं के न हों। कोई भी भाषा जो तुम नहीं जानते हो--जैसे मान लो तिब्बती, चीनी, जापानी--उनकी ध्वनियां तुम उच्चारित कर सकते हो। लेकिन यदि तुम जाप Read More : ओशो देववाणी ध्यान about ओशो देववाणी ध्यान

स्‍त्री-पुरूष जोड़ों के लिए नाद ब्रह्म ध्‍यान

स्‍त्री-पुरूष जोड़ों के लिए नाद ब्रह्म ध्‍यान

ओशो ने इस विधि का एक भिन्‍न रूप जोड़ों के लिए दिया है। स्‍त्री और पुरूष आमने सामने बैठ जायें। और अपने हाथ क्रॉस करके एक दूसरे के हाथों को पकड ले। फिर पूरे शरीर को एक बड़े कपड़ से ढंक लेते है। यदि वे निर्वस्‍त्र हो तो और भी अच्‍छा होगा। कमरे में मंद प्रकाश जैसे छोटी-छोटी चार मोमबत्तियाँ जल रही हों। केवल एक ध्‍यान के लिए अलग से रखी एक अगरबत्‍ती का उपयोग कर सकते है।

आंखे बंद कर लें और तीस मिनट तक एक साथ, भौंरे की गुंजार करें। कुछ ही समय में महसूस होगा की ऊर्जा एक दूसरे में मिल रही है। Read More : स्‍त्री-पुरूष जोड़ों के लिए नाद ब्रह्म ध्‍यान about स्‍त्री-पुरूष जोड़ों के लिए नाद ब्रह्म ध्‍यान

ओशो नाद ब्रह्म ध्‍यान

नाद ब्रह्म एक प्राचीन तिब्‍बती विधि है जिसे सुबह ब्रह्ममुहूर्त में किया जाता रहा है। अब इसे दिन में किसी भी समय अकेले या अन्‍य लोगों के साथ किया जा सकता है। पेट खाली होना चाहिए और इस ध्‍यान के बाद पंद्रह मिनट तक विश्राम करना जरूरी है। यह ध्‍यान एक घंटे का है और इसके तीन चरण है। Read More : ओशो नाद ब्रह्म ध्‍यान about ओशो नाद ब्रह्म ध्‍यान

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