ध्यान

व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : श्वास : सबसे गहरा मंत्र

सबसे गहरा मंत्र

श्वास भीतर जाती है, इसका आपके प्राणों में पूरा बोध हो कि श्वास भीतर जा रही है। श्वास बाहर जाती है, इसका भी आपके प्राणों में पूरा बोध हो कि श्वास बाहर जा रही है। और आप पाएंगे कि एक गहन शांति उतर आई है। यदि आप श्वास को भीतर जाते हुए और बाहर जाते हुए, भीतर जाते हुए और बाहर जाते हुए देख सकें, तो यह अभी तक खोजे गए मंत्रों में से सबसे गहरा मंत्र है। Read More : व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : श्वास : सबसे गहरा मंत्र about व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : श्वास : सबसे गहरा मंत्र

साप्ताहिक ध्यान : संयम साधना

संयम साधना

कृष्ण ने दो निष्ठाओं की बात कही है। एक वे, जो इंद्रियों का संयम कर लेते हैं। जो इंद्रियों को विषय की तरफ--विषयों की तरफ इंद्रियों की जो यात्रा है, उसे विदा कर देते हैं; यात्रा ही समाप्त कर देते हैं। जिनकी इंद्रियां विषयों की तरफ दौड़ती ही नहीं हैं। संयम का अर्थ समझेंगे, तो खयाल में आए। दूसरे वे, जो विषयों को भोगते रहते हैं, फिर भी लिप्त नहीं होते। ये दोनों भी यज्ञ में ही रत हैं।

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साप्ताहिक ध्यान "मैं यह नहीं हूं'

मैं यह नहीं हूं'

मन कचरा है! ऐसा नहीं है कि आपके पास कचरा है और दूसरे के पास नहीं है। मन ही कचरा है। और अगर आप कचरा बाहर भी फेंकते रहें, तो जितना चाहे फेंकते रह सकते हैं, लेकिन यह कभी खतम होने वाला नहीं है। यह खुद ही बढ़ने वाला कचरा है। यह मुर्दा नहीं है, यह सकि"य है। यह बढ़ता रहता है और इसका अपना जीवन है, तो अगर हम इसे काटें तो इसमें नई पत्तियां अंकुरित होने लगती हैं।

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व्यस्त लोगों के लिये ध्यान -दूसरे का अवलोकन करो

अवलोकन करो

पहला चरण : दूसरे का अवलोकन करो

"बैठ जायें और एक दूसरे की आखों में देखें (बेहतर होगा पलकें कम से कम झपकें, एक कोमल टकटकी) बिना सोचे गहरे, और गहरे देखें।

 

"यदि आप सोचते नहीं, यदि आप केवल आंखों के भीतर टकटकी लगाकर देखते हैं तो शीघ्र ही तरंगें विलीन हो जायेंगी और सागर प्रकट होगा। यदि आप आंखों में गहरे देख सकते हैं तो आप अनुभव करेंगे कि व्यक्ति विलीन हो गया है, मुखड़ा मिट गया। एक सागरीय घटना पीछे छिपी है और यह व्यक्ति बस उस गहराई का लहराना था, कुछ अनजाने की, कुछ छुपे हुए की एक तरंग।"

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साप्ताहिक ध्यान:: त्राटक ध्यान

साप्ताहिक ध्यान : ज्ञान और अज्ञान, दोनों के पार

दोनों के पार

जीवन के विधायक पहलू पर ध्यान करो और फिर ध्यान को नकारात्मक पहलू पर ले जाओ, फिर दोनों को छोड़ दो क्योंकि तुम दोनों ही नहीं हो।इसे इस तरह देखो: जन्म पर ध्यान दो। एक बच्चा पैदा हुआ, तुम पैदा हुए। फिर तुम बढ़ते हो, जवान होते हो--इस पूरे विकास पर ध्यान दो। फिर तुम बूढ़े हो जाते हो और मर जाते हो। बिलकुल आरंभ से, उस क्षण की कल्पना करो जब तुम्हारे पिता और माता ने तुम्हें धारण किया था और मां के गर्भ में तुमने प्रवेश किया था। बिलकुल पहला कोष्ठ। वहां से अंत तक देखो, जहां तुम्हारा शरीर चिता पर जल रहा है और तुम्हारे संबंधी तुम्हारे चारों ओर खड़े हुए हैं। फिर दोनों को छोड़ दो, वह जो पैदा हुआ और वह जो मरा Read More : साप्ताहिक ध्यान : ज्ञान और अज्ञान, दोनों के पार about साप्ताहिक ध्यान : ज्ञान और अज्ञान, दोनों के पार

व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : श्वास को विश्रांत करें

श्वास को विश्रांत

जब भी आपको समय मिले, कुछ मिनटों के लिये अपनी श्वास-प्रक्रिया को शिथिल कर दें, और कुछ नहीं―पूरे शरीर को शिथिल करने की कोई आवश्यकता नहीं। रेलगाड़ी में बैठे हों या हवाई जहाज में, या फिर कार में, किसी को पता नहीं लगेगा की आप कुछ कर रहे हैं। बस अपनी श्वास-प्रक्रिया को शिथिल कर लें। जब यह सहज हो जाये तो इसे होने दें। तब आंखें बंद कर लें और इसे देखें- श्वास भीतर जा रही है, बाहर जा रही है, भीतर जा रही है... Read More : व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : श्वास को विश्रांत करें about व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : श्वास को विश्रांत करें

व्यस्त लोगों के लिये ध्यान :: गर्भ की शांति पायें

गर्भ की शांति पायें

जब भी तुम्हारे पास समय हो, बस मौन में निढाल हो जाओ, और मेरा अभिप्राय ठीक यही है-निढाल, मानो कि तुम एक छोटे बच्चे हो अपनी मा के गर्भ में

फर्श पर अपने घुटनों के बल बैठ जाओ और धीरे-धीरे अपना सिर भी फर्श पर लगाना चाहोगे, तब सिर फर्श पर लगा देना। गर्भासन में बैठ जाना जैसे बच्चा अपनी मां के गर्भ में अपने अंगों को सिमटाकर लेटा होता है। और शीघ्र ही तुम पाओगे कि मौन उतर रहा है, वही मौन जो मां के गर्भ में था। Read More : व्यस्त लोगों के लिये ध्यान :: गर्भ की शांति पायें about व्यस्त लोगों के लिये ध्यान :: गर्भ की शांति पायें

साप्ताहिक ध्यान : संतुलन ध्यान

संतुलन ध्यान

तिब्बत में एक बहुत छोटी सी विधि है--बैलेंसिंग, संतुलन उस विधि का नाम है। कभी घर में खड़े हो जाएं सुबह स्नान करके, दोनों पैर फैला लें और खयाल करें कि आपके बाएं पैर पर ज्यादा जोर पड़ रहा है कि दाएं पैर पर ज्यादा जोर पड़ रहा है। अगर बाएं पर पड़ रहा है तो फिर आहिस्ते से जोर को दाएं पर ले जाएं। दो क्षण दाएं पर जोर को रखें, फिर बाएं पर ले जाएं।

एक पंद्रह दिन, सिर्फ शरीर का भार बाएं पर है कि दाएं पर, इसको बदलते रहें। और फिर यह तिब्बती प्रयोग कहता है कि फिर इस बात का प्रयोग करें कि दोनों पर भार न रह जाए, आप दोनों पैर के बीच में रह जाएं। Read More : साप्ताहिक ध्यान : संतुलन ध्यान about साप्ताहिक ध्यान : संतुलन ध्यान

साप्ताहिक ध्यान : श्वास को शिथिल करो

शिथिल करो

जब भी आपको समय मिले, कुछ देर के लिए श्वास-प्रक्रिया को शिथिल कर दें। और कुछ नहीं करना है--पूरे शरीर को शिथिल करने की कोई जरूरत नहीं है। रेलगाड़ी में, हवाई जहाज में या कार में बैठे हैं, किसी और को मालूम भी नहीं पड़ेगा कि आप कुछ कर रहे हैं। बस श्वास-प्रक्रिया को शिथिल कर दें। जैसे वह सहज चलती है, वैसे चलने दें। फिर आंखें बंद कर लें और श्वास को देखते रहें--भीतर गई, बाहर आई, भीतर गई। Read More : साप्ताहिक ध्यान : श्वास को शिथिल करो about साप्ताहिक ध्यान : श्वास को शिथिल करो

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