ध्यान

क्या यंत्र समाधि प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं?

क्या यंत्र समाधि प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं?

 एक मित्र ने और पूछा है कि स्लेटर ने चूहे के मस्तिष्क में इलेक्ट्रोड्स डालकर उसके मस्तिष्क के विशेष तंतु कंपित करके संभोग का आनंद दिलाया। समाधि भी अस्तित्व से एक तरह का संभोग है। क्या यह संभव नहीं है कि मस्तिष्क के कोई तंतु समाधिस्थ अवस्था में कंपित होते हों? और इनकी वैज्ञानिक व्यवस्था की जा सके, तो फिर साधारण आदमी को भी उसके समाधि वाले तंतुओं को कंपित करके समाधि का अनुभव दिया जा सकता है। फिर साधना की, योग की कोई जरूरत न रहेगी। योग तो कहता है कि समाधि को उपलब्ध करने वाला सहस्रार चक्र तक मस्तिष्क में छिपा हुआ है!

 

यंत्र और समाधि

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शरीर की शक्ति का ध्यान में उपयोग

ध्यान में उपयोग

शरीर को इतना शिथिल छोड़ देना है कि ऐसा लगने लगे कि वह दूर ही पड़ा रह गया है, हमारा उससे कुछ लेना-देना नहीं है। शरीर से सारी ताकत को भीतर खींच लेना है। हमने शरीर में ताकत डाली हुई है। जितनी ताकत हम शरीर में डालते हैं, उतनी पड़ती है; जितनी हम खींच लेते हैं, उतनी खिंच जाती है।

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साप्ताहिक ध्यान : कल्पना द्वारा नकारात्मक को सकारात्मक में बदलना

कल्पना द्वारा नकारात्मक

सुबह उठते ही पहली बात, कल्पना करें कि तुम बहुत प्रसन्न हो। बिस्तर से प्रसन्न-चित्त उठें-- आभा-मंडित, प्रफुल्लित, आशा-पूर्ण-- जैसे कुछ समग्र, अनंत बहुमूल्य होने जा रहा हो। अपने बिस्तर से बहुत विधायक व आशा-पूर्ण चित्त से, कुछ ऐसे भाव से कि आज का यह दिन सामान्य दिन नहीं होगा-- कि आज कुछ अनूठा, कुछ अद्वितीय तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है; वह तुम्हारे करीब है। इसे दिन-भर बार-बार स्मरण रखने की कोशिश करें। सात दिनों के भीतर तुम पाओगे कि तुम्हारा पूरा वर्तुल, पूरा ढंग, पूरी तरंगें बदल गई हैं। Read More : साप्ताहिक ध्यान : कल्पना द्वारा नकारात्मक को सकारात्मक में बदलना about साप्ताहिक ध्यान : कल्पना द्वारा नकारात्मक को सकारात्मक में बदलना

क्या आप सिगरेट छोड़ना चाहते हैं।

सिगरेट छोड़ना

शरीर एक यंत्र है। और उस यंत्र में आपने जो आदतें डाली है, उन आदतों को आपको नई आदतों से बदलना पडे़गा, नई बातें सुनकर नहीं। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपको सिगरेट पीना छोडना है तो आपको ताजगी पैदा करने की दूसरी आदतें डालना पडे़गी। नहीं तो आप कभी नहीं छोड़ पाएंगे।

इसलिए मैं आपको कहता हूँ कि जब भी आपको सिगरेट पीने का ख्याल हो तब दस गहरी श्वास लें, जिससे ज्यादा आक्सीजन भीतर चली जाएगी। तो ताजगी ज्यादा देर रुकेगी, जितनी देर निकोटिन से रुकती है, और ज्यादा स्वाभाविक होगी। यह एक नई आदत है। Read More : क्या आप सिगरेट छोड़ना चाहते हैं। about क्या आप सिगरेट छोड़ना चाहते हैं।

ध्यान : अपनी श्वास का स्मरण रखें

अपनी श्वास का स्मरण

"अगर तुम अपनी सांस पर काबू पा सको तो अपनी भावनाओं पर काबू पा सकोगे। अवचेतन सांस की लय को बदलता रहता है, अत: अगर तुम इस लय के प्रति और उसमें होने वाले सतत बदलाव के बारे में होश से भर जाओगे तो तुम अपनी अवचेतन जड़ों के बारे में, अवचेतन की गतिविधि के बारे में सजग हो जाओगे।"

दि न्यू एल्केमी

 

 1) जब भी स्मरण हो, दिन भर गहरी सांस लो, जोर से नहीं वरन धीमी और गहरी; और शिथिलता अनुभव करो, तनाव नहीं।

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साप्ताहिक ध्यान : ध्वनि के केंद्र में स्नान करो

केंद्र में स्नान

ध्वनि के केंद्र में स्नान करो, मानो किसी जलप्रपात की अखंड ध्वनि में स्नान कर रहे हो। या कानों में अंगुली डाल कर नादों के नाद, अनाहत को सुनो।

इस विधि का प्रयोग कई ढंग से किया जा सकता है। एक ढंग यह है कि कहीं भी बैठ कर इसे शुरू कर दो। ध्वनियां तो सदा मौजूद हैं। चाहे बाजार हो या हिमालय की गुफा, ध्वनियां सब जगह हैं। चुप होकर बैठ जाओ। Read More : साप्ताहिक ध्यान : ध्वनि के केंद्र में स्नान करो about साप्ताहिक ध्यान : ध्वनि के केंद्र में स्नान करो

ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ?

ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ?

जब कामवासना पकड़े , तब डरो मत। शांत होकर बैठ जाओ। जोर से श्वास को बाहर फेंको –उच्छवास।

भीतर मत लो श्वास को। क्योंकि जैसे भी तुम भीतर गहरी श्वास को लोगे, भीतर जाती श्वास काम-ऊर्जा को नीचे की तरफ धकाती है। जब तुम्हें काम-वासना पकड़े, तब एक्सहेल करो। बाहर फेंको श्वास को। नाभि को भीतर खींचो, पेट को भीतर लोग और श्वास को बाहर फेंको जितनी फेंक सको। Read More : ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ? about ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ?

ओशो – अपनी नींद में ध्‍यान कैसे करें

ध्यान : काम ऊर्जा से मुक्ति

ध्यान : काम ऊर्जा से मुक्ति

जब काम ऊर्जा वैसी नहीं बह रही जैसी बहनी चाहिए, तो यह बहुत सी समस्याएं पैदा करती है। यदि काम ऊर्जा बिल्कुल सही बह रही है तब हर चीज सही गूंजेगी, हर चीज लयबद्ध रहती है। तब तुम सरलता से सुर में हो और एक किस्म का तारतम्य होगा। एक बार काम ऊर्जा कहीं अटक जाती है तो सारे शरीर पर प्रभाव होते हैं। और पहले वे दिमाग में आएंगे हैं, क्योंकि सेक्स और दिमाग विपरीत धुरी हैं। 

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ध्यान : "हां' का अनुसरण

ध्यान : "हां' का अनुसरण

एक महीने के लिए सिर्फ "हां' का अनुसरण करें, हां के मार्ग पर चलें। एक महीने के लिए "नहीं' के रास्ते पर न जाएं। "हां' को जितना संभव हो सके सहयोग दें। उससे आप अखंड होंगे। "नहीं' कभी जोड़ती नहीं। "हां' जोड़ती है, क्योंकि "हां' स्वीकार है, "हां' श्रद्धा है, "हां' प्रार्थना है। "हां' कहने में समर्थ होना ही धार्मिक होना है। दूसरी बात, "नहीं' का दमन नहीं करना है। यदि आप उसका दमन करेंगे, तो वह बदला लेगी। यदि आप उसे दबाएंगे तो वह और-और शक्तिशाली होती जाएगी और एक दिन उसका विस्फोट होगा और वह आपकी "हां' को बहा ले जाएगी। तो "नहीं' को कभी न दबाएं, सिर्फ उसकी उपेक्षा करें।

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