ध्यान

व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : क्या आप स्वयं के प्रति सच्चे हैं?

स्वयं के प्रति सच्चे

जानने के लिए अपने श्वास के प्रति सजग हों। 

 

" जब तुम कह रहे हो कि तुम खुश हो और तुम खुश नहीं हो, तो तुम्हारी श्वास अनियमित होगी।श्वास सहज नहीं होगी।यह असंभव है।"

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व्यस्त लोगों के लिये ध्यान : संतुलन ध्यान

संतुलन ध्यान

लाओत्से के साधना-सूत्रों में एक गुप्त सूत्र आपको कहता हूं, जो उसकी किताबों में उलेखित नहीं है, लेकिन कानों-कान लाओत्से की परंपरा में चलता रहा है। वह सूत्र है लाओत्से की ध्यान की पद्धति का। वह सूत्र यह है।

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साप्ताहिक ध्यान : अनुभव करें, विचारें नहीं

विचारें नहीं

तुम बगीचे में बैठे हो और सड़क पर ट्रैफिक है, शोरगुल है और तरहत्तरह की आवाजें आ रही हैं। तुम अपनी आंखें बंद कर लो और वहां होने वाली सबसे सूक्ष्म आवाज को पकड़ने की कोशिश करो। कोई कौआ कांव-कांव कर रहा है; कौए की इस कांव-कांव पर अपने को एकाग्र करो। सड़क पर यातायात का भारी शोर है, इसमें कौए की आवाज इतनी धीमी है, इतनी सूक्ष्म है कि जब तक तुम अपने बोध को उस पर एकाग्र नहीं करोगे तुम्हें उसका पता भी नहीं चलेगा। लेकिन अगर तुम एकाग्रता से सुनोगे तो सड़क का सारा शोरगुल दूर हट जाएगा और कौए की आवाज केंद्र बन जाएगी। और तुम उसे सुनोगे, उसके सूक्ष्म भेदों को भी सुनोगे। वह बहुत सूक्ष्म है, लेकिन तुम उसे सुन पाओग Read More : साप्ताहिक ध्यान : अनुभव करें, विचारें नहीं about साप्ताहिक ध्यान : अनुभव करें, विचारें नहीं

क्या यंत्र समाधि प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं?

क्या यंत्र समाधि प्राप्त करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं?

 एक मित्र ने और पूछा है कि स्लेटर ने चूहे के मस्तिष्क में इलेक्ट्रोड्स डालकर उसके मस्तिष्क के विशेष तंतु कंपित करके संभोग का आनंद दिलाया। समाधि भी अस्तित्व से एक तरह का संभोग है। क्या यह संभव नहीं है कि मस्तिष्क के कोई तंतु समाधिस्थ अवस्था में कंपित होते हों? और इनकी वैज्ञानिक व्यवस्था की जा सके, तो फिर साधारण आदमी को भी उसके समाधि वाले तंतुओं को कंपित करके समाधि का अनुभव दिया जा सकता है। फिर साधना की, योग की कोई जरूरत न रहेगी। योग तो कहता है कि समाधि को उपलब्ध करने वाला सहस्रार चक्र तक मस्तिष्क में छिपा हुआ है!

 

यंत्र और समाधि

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शरीर की शक्ति का ध्यान में उपयोग

ध्यान में उपयोग

शरीर को इतना शिथिल छोड़ देना है कि ऐसा लगने लगे कि वह दूर ही पड़ा रह गया है, हमारा उससे कुछ लेना-देना नहीं है। शरीर से सारी ताकत को भीतर खींच लेना है। हमने शरीर में ताकत डाली हुई है। जितनी ताकत हम शरीर में डालते हैं, उतनी पड़ती है; जितनी हम खींच लेते हैं, उतनी खिंच जाती है।

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साप्ताहिक ध्यान : कल्पना द्वारा नकारात्मक को सकारात्मक में बदलना

कल्पना द्वारा नकारात्मक

सुबह उठते ही पहली बात, कल्पना करें कि तुम बहुत प्रसन्न हो। बिस्तर से प्रसन्न-चित्त उठें-- आभा-मंडित, प्रफुल्लित, आशा-पूर्ण-- जैसे कुछ समग्र, अनंत बहुमूल्य होने जा रहा हो। अपने बिस्तर से बहुत विधायक व आशा-पूर्ण चित्त से, कुछ ऐसे भाव से कि आज का यह दिन सामान्य दिन नहीं होगा-- कि आज कुछ अनूठा, कुछ अद्वितीय तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है; वह तुम्हारे करीब है। इसे दिन-भर बार-बार स्मरण रखने की कोशिश करें। सात दिनों के भीतर तुम पाओगे कि तुम्हारा पूरा वर्तुल, पूरा ढंग, पूरी तरंगें बदल गई हैं। Read More : साप्ताहिक ध्यान : कल्पना द्वारा नकारात्मक को सकारात्मक में बदलना about साप्ताहिक ध्यान : कल्पना द्वारा नकारात्मक को सकारात्मक में बदलना

क्या आप सिगरेट छोड़ना चाहते हैं।

सिगरेट छोड़ना

शरीर एक यंत्र है। और उस यंत्र में आपने जो आदतें डाली है, उन आदतों को आपको नई आदतों से बदलना पडे़गा, नई बातें सुनकर नहीं। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपको सिगरेट पीना छोडना है तो आपको ताजगी पैदा करने की दूसरी आदतें डालना पडे़गी। नहीं तो आप कभी नहीं छोड़ पाएंगे।

इसलिए मैं आपको कहता हूँ कि जब भी आपको सिगरेट पीने का ख्याल हो तब दस गहरी श्वास लें, जिससे ज्यादा आक्सीजन भीतर चली जाएगी। तो ताजगी ज्यादा देर रुकेगी, जितनी देर निकोटिन से रुकती है, और ज्यादा स्वाभाविक होगी। यह एक नई आदत है। Read More : क्या आप सिगरेट छोड़ना चाहते हैं। about क्या आप सिगरेट छोड़ना चाहते हैं।

ध्यान : अपनी श्वास का स्मरण रखें

अपनी श्वास का स्मरण

"अगर तुम अपनी सांस पर काबू पा सको तो अपनी भावनाओं पर काबू पा सकोगे। अवचेतन सांस की लय को बदलता रहता है, अत: अगर तुम इस लय के प्रति और उसमें होने वाले सतत बदलाव के बारे में होश से भर जाओगे तो तुम अपनी अवचेतन जड़ों के बारे में, अवचेतन की गतिविधि के बारे में सजग हो जाओगे।"

दि न्यू एल्केमी

 

 1) जब भी स्मरण हो, दिन भर गहरी सांस लो, जोर से नहीं वरन धीमी और गहरी; और शिथिलता अनुभव करो, तनाव नहीं।

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साप्ताहिक ध्यान : ध्वनि के केंद्र में स्नान करो

केंद्र में स्नान

ध्वनि के केंद्र में स्नान करो, मानो किसी जलप्रपात की अखंड ध्वनि में स्नान कर रहे हो। या कानों में अंगुली डाल कर नादों के नाद, अनाहत को सुनो।

इस विधि का प्रयोग कई ढंग से किया जा सकता है। एक ढंग यह है कि कहीं भी बैठ कर इसे शुरू कर दो। ध्वनियां तो सदा मौजूद हैं। चाहे बाजार हो या हिमालय की गुफा, ध्वनियां सब जगह हैं। चुप होकर बैठ जाओ। Read More : साप्ताहिक ध्यान : ध्वनि के केंद्र में स्नान करो about साप्ताहिक ध्यान : ध्वनि के केंद्र में स्नान करो

ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ?

ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ?

जब कामवासना पकड़े , तब डरो मत। शांत होकर बैठ जाओ। जोर से श्वास को बाहर फेंको –उच्छवास।

भीतर मत लो श्वास को। क्योंकि जैसे भी तुम भीतर गहरी श्वास को लोगे, भीतर जाती श्वास काम-ऊर्जा को नीचे की तरफ धकाती है। जब तुम्हें काम-वासना पकड़े, तब एक्सहेल करो। बाहर फेंको श्वास को। नाभि को भीतर खींचो, पेट को भीतर लोग और श्वास को बाहर फेंको जितनी फेंक सको। Read More : ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ? about ओशो: जब कामवासना पकड़े तब क्या करें ?

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