ध्यान

मैं एक युवती के प्रेम में था। वह मुझे धोखा दे गई ! मैं क्या करूं

भगवान, मैं एक युवती के प्रेम में था। वह मुझे धोखा दे गई ! मैं क्या करूं

*प्रेम में थे या स्त्री पर कब्जा करने की आकांक्षा में थे? क्योंकि तुम्हारी भाषा कहती है कि वह मुझे धोखा दे गई और किसी और की हो गई! प्रेम को इससे क्या फर्क पड़ता है!*

*अगर वह युवती किसी और के साथ ज्यादा सुखी है, तो तुम्हें प्रसन्न होना चाहिए। क्योंकि प्रेम तो यही चाहता है कि जिसे हम प्रेम करते हैं, वह ज्यादा सुखी हो, वह आनंदित हो। अगर वह युवती तुम्हारे बजाय किसी और के पास ज्यादा आनंदित है, तो इसमें रस खो देने का कहां कारण है!* Read More : मैं एक युवती के प्रेम में था। वह मुझे धोखा दे गई ! मैं क्या करूं about मैं एक युवती के प्रेम में था। वह मुझे धोखा दे गई ! मैं क्या करूं

समाधि का पहला अनुभव कैसा होता है?

समाधि का पहला

होगा तो ही जानोगे। कहा जा सके, ऐसा नहीं है। कुछ-कुछ इशारे किये जा सकते हैं। जैसे अंधेरे में अचानक दीया जल जाये, ऐसा होता है। या जैसे बीमार मरता हो और अचानक कोई दवा लग जाये...मरते-मरते कोई दवा लग जाये; और जीवन की लहर, जीवन की पुलक फिर फैल जाये--ऐसा होता है। जैसे कोई मुर्दा जिंदा हो जाये--ऐसा होता है समाधि का पहला अनुभव। Read More : समाधि का पहला अनुभव कैसा होता है? about समाधि का पहला अनुभव कैसा होता है?

पुनर्जन्‍म की बात

प्रश्‍न—कुछ धर्म पुनर्जन्‍म में विश्‍वास करते है और कुछ नहीं करते। आप अपने बारे में कैसे जान सकते है कि आपने भी जीवन जिया है और पुन: जीएंगे?

ओशो—सिद्धांतों में मेरा विश्‍वास नहीं हे। मैं एक साधारण आदमी हूं कोई सिद्धांतवादी नहीं। सिद्धांतवादी तो महान विचारक होते है। वह यथार्थ के बारे में कुछ भी नहीं जानते, मगर वह इसके बारे में सिद्धांत गढ़ता रहते है। उसकी पूरा जीवन घूमता ही रहता है। और सत्‍य, यर्थाथ तो बस केंद्र में ही रह जाता है। किंतु सिद्धांतवादी इधर-उधर की हांकने में माहिर होता है। Read More : पुनर्जन्‍म की बात about पुनर्जन्‍म की बात

स्त्रियां पुरुष के लिए आकर्षक क्यों बनना चाहती हैं जबकि वे पुरुषों की कामुकता जरा भी पसंद नहीं करतीं ?

स्त्रियां पुरुष के लिए आकर्षक क्यों बनना चाहती हैं जबकि वे पुरुषों की कामुकता जरा भी पसंद नहीं करतीं ?

स्त्रियां पुरुष के लिए आकर्षक क्यों बनना चाहती हैं जबकि वे पुरुषों की कामुकता जरा भी पसंद नहीं करतीं ?
ओशो - इसके पीछे राजनीति है ।स्त्रियां आकर्षक दिखना चाहती हैं क्योंकि उसमें उन्हें ताकत मालूम होती है । वे जितनी आकर्षक होंगी उतनी पुरुष के आगे ताकतवर सिद्ध होंगी । और कौन ताकतवर बनना नहीं चाहता ? सारी जिंदगी लोग ताकतवर बनने के लिए संघर्ष करते हैं ।तुम धन क्यों चाहते हो ? उससे ताकत आती है । तुम देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति क्यों बनना चाहते हो ?उससे ताकत मिलेगी । तुम महात्मा क्यों बनना चाहते हो ?उससे ताकत मालूम होगी ।
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युवक कौन .... ??

युवक कौन ....

हिन्दुस्तान की जवानी तमाशबीन है। हम ऐसे रहते हैं खड़े होकर जीवन में, जैसे कोई जुलूस जा रहा है। वैसे रुके हैं, देख रहे हैं; कुछ भी हो रहा है! शोषण हो रहा है, जवान खड़ा हुआ देख रहा है! बेवकूफियां हो रही हैं, जवान खड़ा देख रहा है! बुद्धिहीन लोग देश को नेतृत्व दे रहे हैं, जवान खड़ा देख रहा है। जड़ता धर्मगुरु बनकर बैठी है, जवान खड़ा हुआ देख रहा है! सारे मुल्क के हितों को नष्ट किये जा रहे हैं, जवान खड़ा हुआ देख रहा है! 
यह कैसी जवानी है?

इसलिए दूसरा सूत्र तुमसे कहता हूं और वह यह कि जवानी संघर्ष से पैदा होती है। Read More : युवक कौन .... ?? about युवक कौन .... ??

प्रेम से भर रहा है ?

एक युवक एक युवती को देख कर प्रेम से भर जाए ।
किस चीज के प्रति प्रेम से भर रहा है ?
उस युवती में उसे कोई सौंदर्य दिखाई पडा़ है जो
बिलकुल अज्ञात है और रहस्यपूर्ण है ।
जिसे वह नहीं समझ पा रहा ।
जो उसकी समझ के पार हुआ जा रहा है ।
कोई अज्ञात सौंदर्य उसके प्राणों को खींच रहा है
जो उसकी समझ के बाहर है ।
वह आकर्षित हो गया है ।
वह उस युवती को प्रेम करके , विवाह करके घर
ले आता है । और महीने-पंद्रह दिन बीतता नहीं कि
प्रेम क्षीण होता मालूम पड़ता है ।
वर्ष दो वर्ष बीतते हैं कि वह ऊब जाता है । क्यों ?
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प्यारे प्रभु! प्रश्नों के अंबार लगे हैं

चौथा प्रश्न: प्यारे प्रभु! प्रश्नों के अंबार लगे हैं
उत्तर चुप हैं
कौन सहेजे इन कांटों को
बगिया चुप है, माली चुप है
प्रश्न स्वयं में रहता चुप है
दिनकर चुप है, रातें चुप हैं
उठी बदरिया कारी-कारी
लगा अंधेरा बिलकुल घुप है
प्रभु, इस स्थिति का निराकरण करने की अनुकंपा करें। Read More : प्यारे प्रभु! प्रश्नों के अंबार लगे हैं about प्यारे प्रभु! प्रश्नों के अंबार लगे हैं

संकल्प कैसे काम करता है?

अचेतन है संकल्प का मार्ग, और ध्यान की सीढ़ी है संकल्प ।

हमारा संकल्प बहुत ही क्षीण हो गया है । नाम मात्र को ही रह गया है। सुबह जिस बात का संकल्प हम लेते हैं शाम होते - होते वह बात ही भूला देते हैं । जीवन की छोटी - छोटी बातों को ही हम नहीं समझ पाते हैं, तंबाखू और धूम्रपान जैसे व्यसनों ने हमें अपना गुलाम बना लिया है । रोज यह कह कर कि "आज आखरी बार है... कल से ऐसा नहीं होगा..." हम अपने मन की चालबाजियों में फंसते चले जाते हैं । Read More : संकल्प कैसे काम करता है? about संकल्प कैसे काम करता है?

साधक के लिए पहली सीढ़ी शरीर है

साधक के लिए

साधक के लिए पहली सीढ़ी क्या है?

साधक के लिए पहली सीढ़ी शरीर है। लेकिन शरीर के संबंध में न तो कोई ध्यान है, न शरीर के संबंध में कोई विचार है। और थोड़े समय से नहीं, हजारों वर्षों से शरीर उपेक्षित है। यह उपेक्षा दो प्रकार की है। एक तो उन लोगों ने शरीर की उपेक्षा की है, जिन्हें हम भोगी कहते हैं—जों जीवन में खाने—पीने और कपड़े पहनने के अतिरिक्त और किसी अनुभव को नहीं जानते। उन्होंने शरीर की उपेक्षा की है, शरीर का अपव्यय, शरीर को व्यर्थ खोया है, शरीर की वीणा को खराब किया है। Read More : साधक के लिए पहली सीढ़ी शरीर है about साधक के लिए पहली सीढ़ी शरीर है

संन्यासी और गृहस्थी में क्या फर्क है?

संन्यासी और गृहस्थी

संन्यासी और गृहस्थी में क्या फर्क है?

घर छोड़कर भागो मत - घर में ही संन्यासी की तरह रहो

संन्यासी और गृहस्थी में जगह का फर्क नहीं है, भाव का फर्क है। संन्यासी और गृहस्थी में परिस्थिति का फर्क नहीं है, मनःस्थिति का फर्क है Read More : संन्यासी और गृहस्थी में क्या फर्क है? about संन्यासी और गृहस्थी में क्या फर्क है?

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