पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी)

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान या पी.एस.एल.वी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा संचालित एक उपभोजित प्रक्षेपण प्रणाली है। भारत ने इसे अपने सुदूर संवेदी उपग्रह को सूर्य समकालिक कक्षा में प्रक्षेपित करने के लिये विकसित किया है। पीएसएलवी के विकास से पूर्व यह सुविधा केवल रूस के पास थी। पीएसएलवी छोटे आकार के उपग्रहों को भू-स्थिर कक्षा में भी भेजने में सक्षम है। अब तक पीएसएलवी की सहायता से 70 अन्तरिक्षयान (30 भारतीय + 40 अन्तरराष्ट्रीय) विभिन्न कक्षाओं में प्रक्षेपित किये जा चुके हैं। इससे इस की विश्वसनीयता एवं विविध कार्य करने की क्षमता सिद्ध हो चुकी है।
२२ जून, २०१६ में इस यान ने अपनी क्षमता की चरम सीमा को छुआ जब पीएसएलवी सी-34 के माध्यम से रिकॉर्ड २० उपग्रह एक साथ छोड़े गए। इससे पहले 28 अप्रैल 2008 को इसरो ने एक साथ 10 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजकर एक ही बार में सबसे ज़्यादा उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने का विश्वरिकॉर्ड बनाया था।

तकनीकी आंकड़े

  • कार्य : एकल प्रक्षेपण यान (Expendable launch vehicle)
  • निर्माता : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
  • आकार
    • ऊंचाई : 44 m
    • व्यास : 2.8 m
    • द्रव्यमान : 294,000 kg
    • चरणों की संख्या : 4
  • क्षमता
    • LEO तक पे-लोड : 3,250 kg
    • SSO तक पे-लोड : 1600 kg
    • GTO तक पे-लोड : 1000 kg
  • बूस्टर या शून्य-स्टेज
    • बूस्टरों की संख्या : 6
    • इंजन : 1 ठोस
    • प्रणोद (थ्रस्ट) : 502.600 kN
    • विशिष्ट आवेग (Specific impulse) : 262 sec
    • बर्न समय (Burn time) 44 seconds
    • ईंधन : HTPB (ठोस)
  • प्रथम चरण
    • इंजन : 1 ठोस
    • प्रणोद : 4,860 kN
    • विशिष्ट आवेग : 269sec
    • बर्न समय : 105 सेकेण्ड
    • ईंधन : HTPB (solid)
  • द्वितीय चरण (Second stage)
    • इंजन : 1 विकास
    • प्रणोद : 725 kN
    • विशिष्ट आवेग : 293 sec
    • बर्न समय : 158 seconds
    • ईंधन : N2O4/UDMH
  • तृतीय चरण
    • इंजन : 1 solid
    • प्रणोद : 328 kN
    • विशिष्ट आवेग : 294 sec
    • बर्न समय : 83 सेकेण्ड
    • इंधन : ठोस
  • चतुर्थ चरण
    • इंजन : 2 liquid
    • प्रणोद : 14 kN
    • विशिष्ट आवेग : 308 sec
    • बर्न समय : 425 seconds
    • ईंधन : MMH/UDMH

 

इसरो निजी क्षेत्र से जुड़ने को तैयार

 इसरो निजी क्षेत्र से जुड़ने को तैयार

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी अब भी नाबाद है और आगामी प्रक्षेपणों में चौके-छक्के जड़ कर वह टी-20 मैचों की गति से अपने जौहर दिखाने के लिए तैयार है.
    
अपनी तरह का पहला साहसिक कदम उठाते हुए इसरो अंतरिक्ष यानों के सिर्फ कुछ हिस्से बनाने के लिए नहीं बल्कि पूरे-पूरे उपग्रह बनाने के लिए निजी क्षेत्र के लिए दरवाजे खोल रहा है. अंतरिक्ष के क्षेत्र में यह इसरो की एक बड़ी छलांग है क्योंकि अब तक वह सभी उपग्रहों का निर्माण संस्था के भीतर ही करता आया है.