कपाल भाति प्राणायाम :

कपाल अर्थात मस्तिष्क, भाति अर्थात तेज, प्रकाश आभा, यानि जिस प्राणायाम के करने से आभा, तेज, व ओज बढ़ता हो वह है कपालभाति प्राणायाम विधी:- श्वांस को लम्बा गहरा नासिका के द्वारा फेफड़ों में भरेंगे और लिये गये श्वांस को बिना अन्दर रोके नासाछिद्रों द्वारा प्रयासरत होकर इस प्रकार छोड़ेंगे कि श्वांस को बाहर छोड़ने के साथ ही पेट अन्दर की और पिचके। श्वांस भीतर जा रहा है उस और ध्यान नहीं देते हुए लगातार छोड़ने की क्रिया करनी है। मध्यमगति व मध्यम शक्ति के साथ करें व नये साधक थकने पर कुछ देर बीच में विश्राम कर सकते हैं। श्वांस को अधिक गहराई के साथ छोड़ने का प्रयास करें। और दिन प्रतिदिन लगातार करने की अवधि में वृद्धि करते हुये 5 से 10 मिनट तक करने की क्षमता का विकास करें।
 

ग्रीष्म ऋतु में पित्त प्रकृति वाले 2 मिनट ही करें। तीव्र गति से सांस को बाहर छोड़ने के लिये झटके से पेट हिलाने से पेट और वेट दोनों कम होते हैं। पाचन शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। कब्ज समाप्त होती है। हार्ट के ब्लाॅकेज खुल जाते हैं, फेफड़ो की स्वच्छता होने से अस्थमा जैसा असाध्य रोग समाप्त हो जाता है। रक्तशुद्धि होने से त्वचा रोग, एक्जिमा, एलर्जी स्वतः समाप्त होते हैं। पेट के विकार मिटने से मुखमण्डल पर तेज, आभा, कान्ति, लावण्य आता है। 

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