कमर दर्द को आसान

काम चाहे घर में हो या ऑफिस में, कार्य चाहे खडे़ रहकर करने का हो या बैठकर करनेका अक्सर कमर में दर्द हो ही जाता है। कमर दर्द की वजह से आपको बड़ी परेशानी होती है। महिलाओं में कमर दर्द एक आम समस्या हो गई है। खासकर कामकाजी महिलाएं तो इस समस्या के साथ जीने की आदी दिखती हैं। जब इससे बचने और उससे मुक्ति के उपाय बेहद आसान हैं तो क्यों इस समस्या से जूझा जाए। राजेश मिश्रा बता रहे हैं इससे मुक्ति के उपाय -
कमर दर्द के कई कारण होते हैं यथा- सर्जिकल डिलेवरी, सोने, उठने-बैठने के गलत नियम आदि। परन्तु आजकल जो ज्यादातर मामलों में कमर दर्द देखने में आ रहा है उसका कारण है ऊंची हील वाली चप्पलें पहनना। जो आज का प्रमुख फैशन भी है।

 

क्यों होता है कमर में दर्द

डाक्टर हमेशा से ऊंची एड़ी वाली चप्पलें व सैंडिल पहनने से बचने की सलाह देते आ रहे हैं। फैशन के चलते उनकी सलाह सुनना कोई पसंद नहीं करता है। हर किसी महिला को शारीरिक बढ़ाने हेतु इस तरह की चप्पलें व सैंडिल अधिक भाती हैं। एस्ट्रोजन हार्मोंस भी इस दर्द के लिये जिम्मेदार होता है। होता यह है कि चालीस-पैंतालीस वर्ष के उपरांत महिलाओं में मासिक चक्र लगभग बंद हो जाता है जिससे रीढ़ की हड्डी में कठोरता आने व कमर के आसपास चर्बी जम जाने से यह दर्द शुरू हो जाता है। एस्ट्रोजन की कमी यानि शरीर में कैल्शियम की कमी को दर्शाता है जिससे ओस्टियोपोरेसिस नामक रोग होता है जो हड्डी से जुड़ा रोग है।

अन्य कारण

उठने बैठने के गलत तरीके या झटकेदार तरीके से उठने बैठने के कारण कभी रीढ़ की डिस्क खिसक जाती है। इसके अलावा ज्यादा आरामतलब जिंदगी तथा कुछ घातक बीमारियां भी इस रोग की जनक मानी जाती है। प्रायः पीछे के पॉकेट में मोटी पर्स या मोबाइल रखना लड़कियां फैशन समझती हैं, पर यह भी कमर दर्द के लिए सबसे बड़ा कारण बन जाता है। 

 

छुटकारा पाने के लिये क्या करें

छुटकारा पाने के लिये सर्वोत्तम उपाय प्राकृतिक चिकित्सा ही है। योग अपनाकर कमर को लचीला बनाया जा सकता है जिससे कमर दर्द में राहत मिल सकती है। तात्कालिक राहत के लिये प्रचलित चिकित्सा पध्दति जैसे एलौपैथिक, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, बायोकेमिक जैसी अन्य पध्दतियों को भी साथ में अपना सकते हैं।.

दर्द से मुक्ति के लिये योग करें

कमर दर्द में नीचे दिये जा रहे चार आसन अति उपयोगी हैं। इन्हें आजमाइये और दर्द से छुटकारा पाइये।

शलभ आसन

 

1. इस आसन को करने के लिये सर्वप्रथम पेट के बल लेट जाइये।

 

2. अब दोनों हाथों को अपनी जांघ के नीचे रविये।

3. श्वांस अंदर भरते हुए पहले दाहिने पैर को बिना मोड़े धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाइये कुछ सेकेंड रुककर दाहिने पैर को उसी स्थिति में रखे हुए बायें दो दाहिने पैर की तरह ऊपर की ओर उठाइये। ध्यान रखिये कि हर स्थिति में आपको ठोड़ी जमीन से जुड़ी रहनी चाहिये। श्वांस छोड़ते हुए पूर्ण स्थिति में आइये।

4. आप अपनी क्षमतानुसार क्रम को दोहराइये।

मकरासन

 

1. पेट के बल लेटकर हाथ की कोहनियों को मोड़कर बिल्कुल सीधे हथेलियों पर ठोड़ी को रखिये।

 

2. धीरे-धीरे लम्बी श्वांस खींचते हुए दोनों पैर की एड़ियों को कूल्हे से सटाने का प्रयास कीजिए। श्वांस छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में आ जाइये।

धनुरासन

 

इस आसन का सीधा-सा अर्थ है शरीर को मोड़कर धनुष के समान बनाना।

 

1. पेट के बल लेटकर दोनों पैरों के घुटने को मोड़कर कूल्हे के ऊपर लाकर दोनों हाथों से दोनों पंजों को पकड़िये।

2. श्वांस भरते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठाइये एवं धनुष के समान रचना बनाईये। इस दौरान गर्दन सीधे रखते सामने की ओर देखिए। 

3. क्षमतानुसार रुककर धीरे-धीरे छोड़ते हुए पूर्व स्थिति में लौट आइये।

भुजंगासन

 

यानि फन फैलाये सांप के समान आकृति वाला आसन।

 

1. इसमें भी पहले वाले आसन की तरह पेट के बल लेटकर हथेलियों को छाती के बाजू में रखकर पंजे मिलाते हुए कोहनी को थोड़ा ऊपर उठाकर श्वांस छाती में भरते हुए सिर को ऊपर उठाइये। नाभि जमीन में सटी हो। सिर को पीछे की ओर मोड़िये। थोड़ रुककर पूर्व स्थिति में आ जाइये।

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