भ्रस्त्रिका प्राणायाम

भ्रस्त्रिका प्राणायाम
  • श्वांस को लम्बा गहरा धीरे-धीरे नाक के द्वारा फेफड़ों में डायफ्राॅम तक भरेंगे पेट नहीं फुलायेंगे और श्वासं बिना अन्दर रोके, लिये गये श्वांस को नासिका द्वारा धीरे धीरे पूरा ही बाहर छोड़ देंगे तथा बाहर भी श्वांस को बिना रोके पूर्व की भांति श्वासं को भरेंगे। इस अभ्यास को जारी रखें।
  • नये साधक थकने पर बीच में कुछ देर के लिये विश्राम कर सकते हैं। तथा अपने उथले श्वासं की गहराई को बढ़ाने का प्रयास करें।
  • गर्मी में 3 मिनट व सर्दी में 7 मिनट तक किया जा सकता है।

लाभ : सर्दी, जुकाम, पुराना नजला, क्षय, आदि समस्त कफ सम्बन्धी रोग दूर होते हैं। थाॅयराईड, टांसिल आदि गले सम्बन्धी रोगो में लाभकारी। अतिनिद्रा अनिद्रा, आलस्य से मुक्ति। फेफड़े, हृदय एवं मस्तिष्क स्वस्थ होता है।

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