शलभासन

शलभासन

शलभासन योग करते समय शरीर का आकार शलभ (Locust) कीट की तरह होने से, इसे शलभासन(Locust Pose) कहा जाता हैं। कमर और पीठ के मजबूत करता है और पाचन क्रिया को सुधारता है। शलभासन करने की प्रक्रिया और लाभ नीचे दिए गए हैं :

शलभासन करने की प्रक्रिया 

  • साँसअंदर लेते हुए अपना दायाँ पैर उठाएँ। पैर को सीधा रखें। ध्यान दे कि कूल्हे पर झटका न आये।
  • रोकें (स्थिति को बनाये रखें) और साँस लेते रहे।
  • साँस छोड़ें और अपने दाएँ पैर को नीचे रखें।
  • प्रक्रिया अपने बाएँ पैर के साथ दोहराएँ। २-३ गहरी लंबी साँसे लें।
  • दोनों हाथों की मुठ्ठी बनाकर अपने जंघा के नीचे रख दे।
  • साँस अंदर लेते हुए और दोनों घुटनों को सीधा रखते हुए, कुछ गति के साथ दोनों पैरों को जितना हो सकता है उतना उपर उठाएँ।
  • रोकें (स्तिथि को बनाये रखें)
  • साँस छोड़े, अपने दोनों पैरों को नीचे लाएँ, दोनों हाथों को नीचे से हटा लें और विश्राम करें।
  • दूसरे कदम पर हाथों को नीचे रखते हुए पूर्ण प्रक्रिया दोबारा से दोहराएँ।

पेट के बल लेटकर दोनों हाथों को जंघाओं के नीचे लगाइये । श्वांस अन्दर भरकर दायीं टांग उपर उठायें, घुटने मुड़ने नहीं चाहिये। ठोड़ी भूमि पर टिकी रहे। 10 सेकण्ड रूककर श्वांस बाहर निकालते हुये टांग को नीचे लाएं । क्रमशः दूसरी टांग से भी करें। 3 से 5 बार करें। अगले क्रम में दोनों टांगों को साथ उठायें। तीन बार। कमरदर्द वाले दोनों टांगे साथ न उठायें। 

कब्ज, पाचनविकार, एवं कमरदर्द, सायटिका में विशेष लाभप्रद।

नोट: आसनों के अन्त में शरीर को बिल्कुल ढीला छोड शवासन में लेटें - 5 मिनट 

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