सुंदर, सलोनी, छरहरी और सुडौल काया किसे पसंद नहीं है?

सुंदर, सलोनी, छरहरी और सुडौल काया किसे पसंद नहीं है?

सुंदर, सलोनी, छरहरी और सुडौल काया किसे पसंद नहीं है? प्राय: सभी स्त्रियां ऐसा ही होना चाहती हैं किन्तु वातावरण, रहन-सहन, खान-पान दिनचर्या एवं अनेक प्रकार की मजबूरियों के कारण बहुतों को चुपचाप मन मारकर रह जाना पड़ता है।
आम जीवन में स्त्री-पुरुष दोनों में ही शारीरिक फिटनेस या सुडौलता के प्रति जिज्ञासा बढ़ी है, परिणामस्वरूप प्रत्येक छोटे-बड़े शहरों व कस्बों में आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित व्यायामशाला, हैल्थ क्लब, जिम, क्लब एवं फिटेनस सेंटर दिखाई दे रहे हैं।
कभी-कभी यह भी देखने में आता है कि अल्पायु में ही शरीर का विकास इस प्रकार बेडौल हो जाता है कि आयु दुगनी-तिगुनी लगने लगती है तथा संबंधित अनेक विकृतियां दृष्टिगत हो जाती हैं। युवतियों को सूर्यनमस्कार, कटिचक्रासन, जानुशिरासन, गोरक्षासन, गोमुखासन, भुजंगासन, वातायनासन, गुल्डासन, उत्थिन कोणासन तथा प्राणायाम का अभ्यास करते रहने से स्वस्थ एवं सुडौल काया बनी रहती है।
दुबली-पतली एवं कमजोर महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए सूर्यनमस्कार, मकरासन, हस्तपादासन, शलभासन आदि का अभ्यास करते हुए सब्जियों का सूप, फलों का रस, नींबू पानी में दो चम्मच शहद डालकर नित्य प्रति सुबह अवश्य ही पीते रहना चाहिए।
प्रौढ़ महिलाओं के जांघों पर प्राय: अनावश्यक मोटापा तथा भारीपन आ जाता है। पुट्ठा व कमर बेडौल हो जाते हैं। प्राय: प्रसव के बाद पेट भी ढीला होकर बेडौल व बड़ा हो जाता है। इस अवस्था में शरीर को स्वस्थ एवं सुडौल बनाये रखने के लिए गोमुखासन, मकरासन, गर्भासन, अद्र्धमस्स्येन्द्रासन, धनुरासन, समकोणासन, शवासन, सेतुबंधनासन, आदि आसनों का अभ्यास लाभदायक होता है।
इन आसनों के साथ ही प्राणायाम नियमित रूप से करते रहने से न केवल शरीर की विकृतियां ही दूर होती हैं बल्कि युवावस्था की सभी स्थितियां पूर्ववत् आ जाती हैं तथा आजीवन बनी रहती हैं।
प्रौढ़ावस्था की समस्याएं महिलाओं में प्राय: उम्र बढऩे के साथ-साथ ही बढ़ती चली जाती हैं। आयु बढऩे के साथ ही मोटापा अधिक बढ़ जाने से उनकी अनेक शारीरिक समस्याएं भी बढऩे लगती हैं।
इस अवस्था में सूक्ष्म व्यायाम, कटिचक्रासन, सूर्यनमस्कार, त्रिकोणासन, ताड़ासन, शलभासन, शिथिलापन, शवासन, योगनिद्रा, नौकासन एवं वीरभद्रासन आदि में जितना भी और जो भी हो सके, 20-30 मिनट तक नियमित रूप से प्रात:काल करना चाहिए। साथ ही प्राणायाम भी करते रहना चाहिए।
उपरोक्त आसनों के साथ ही निम्नांकित वैज्ञानिक सुझावों का भी पालन स्वस्थ एवं सुडौल शरीर के लिए लाभकारी होता है।

  • भोजन करने के आधे घंटे पहले और आंधे घंटे बाद में ही पानी पीना चाहिए। खाना खाने के बीच में पानी पीने से बचना चाहिए।
  • खाना खाने के कुछ मिनट पहले केवल सलाद चबा-चबाकर खायें।
  • योगाभ्यास तथा प्राणायाम को नियमित एवं खाली पेट ही प्रात: या सायंकाल करना चाहिए।
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