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कपालभाति प्राणायाम नहीं बल्कि षट्कर्म का अभ्यास है।

कपालभाति प्राणायाम नहीं बल्कि षट्कर्म का अभ्यास है।

कपालभाति प्राणायाम नहीं बल्कि षट्कर्म का अभ्यास है। इसके लिए पालथी लगाकर सीधे बैठें, आंखें बंदकर हाथों को ज्ञान मुद्रा में रख लें। ध्यान को सांस पर लाकर सांस की गति को अनुभव करें और अब इस क्रिया को शुरू करें। इसके लिए पेट के निचले हिस्से को अंदर की ओर खींचे व नाक से सांस को बल के साथ बाहर फेंके। यह प्रक्रिया बार-बार इसी प्रकार तब तक करते जाएं जब तक थकान न लगे। फिर पूरी सांस बाहर निकाल दें और सांस को सामान्य करके आराम से बैठ जाएं।

सुप्त-वज्रासन

विधि- स्थिति में आइए (दोनों पैरों को सामने फैलाकर बैठ जाएँगे ) दोनों पैर मिलाइए , हाथ बराबर में, कमर सीधी रखते हुए। अब वज्रासन स्थिति में बैठेंगे।पैरों में पीछे  अंतर रखेंगे जिससे नितंब जमीन से लग जाए अब  धीरे से दोनों कुहनियों के सहारे से  पीठ के बल जमीन पर लेट जाएँगे । घुटनो को ज़मीन से लगाएँगे ,हाथों को सिर के उपर रखेंगे या नमस्कार मुद्रा में सीने पर भी रख सकते हैं  कुछ देर इसी स्थिति में रहेंगे फिर
 दोनों कुहनियों की सहायता से उठकर बैठ जाते है।

सावधानी-  अधिक कमर दर्द व घुटने दर्द  के रोगी न करें।

लाभ-

शशांकासन

शशांक का अर्थ होता है खरगोश। आसन में व्यक्ति का आकार खरगोश के समान होता है, इसलिए इसे शशांकासन कहते हैं।
 

विधि-  सर्वप्रथम वज्रासन में आइए अर्थात दोनो पैरों को घुटनों से मोड़कर पीछे की ओर नितम्ब  के नीचे रखें और एड़ियों पर बैठ जाएं। हाथों को पीठ के पीछे ले जाइए अब दायें हाथ से बायें हाथ को थामिये।
अब कमर से आगे को झुकेंगे और सर को घुटनो के सामने फर्श पर लगायेंगे फिर धीरे से बापिस आएँगे ।
साँस निकालते हुए नीचे जाएँगे और साँस लेते हुए वापिस आएँगे 10-20 सेकेंड रोक सकते हैं ।
आसन को रोकते समय साँस को भी रोकते हैं।इस क्रिया को 4 से 5 बार करें।

मयूरासन

इस आसन में आकृति मोर के समान बनती है इसलिए इसे मयूरासन कहते हैं। इस आसन को प्रतिदिन करने से कभी मधुमेह रोग के आप शिकार नही होते।

विधि-  

पवन-मुक्त आसन

दूषित वायु को शरीर से निष्कासित करता है।

विधि- सर्वप्रथम चित लेट जायें (शवासन में)। पैरो को पास ,हाथों को शरीर के बराबर में  ज़मीन पर रख लें ,धीरे से दायें पैर को घुटने से मोड़कर ,दोनो हाथो की उंगलियों को आपस में फसांते हुए दाएँ घुटने के नीचे से पैर को थामिये अब ठोड़ी को घुटने से लगाइए फिर सिर को वापिस पीछे रखते हुए पैर को भी सीधा कर लीजिए।

 ठीक इसी तरह बायें पैर से भी दोहराईए। 4-5 बार दोनो तरफ से दोहराएँगे।

साँस निर्देश-  साँस लेते हुए पैर को  थामिये और साँस को निकलते हुए ठोड़ी को घुटने से लगाइए।

सेतुबंधासन

विधि-

सर्वप्रथम सीधे पीठ के बल चित लेट जाइए। हाथों को शरीर के बराबर में सटाकर रखिए। अब दोनो पैरो को घूटने से मोड़कर, साँस लेते हुए कमर के हिस्से को उपर उठाएँगे ।साँस निकालते हुए कमर को वापिस फर्श पर लाएँगे।
-अभ्यास को साँस के साथ ही दोहराएँगे।
-शुरू में 5-7 बार दोहरा सकते हैं।

लाभ-कमर दर्द में च्मत्कारिक लाभ हैं ।कमर की मासपेशियों को मजबूत कर रकसंचार तेज करता है। कमर की चर्बी को भी कम करता है।
पेट के रोगों में भी लाभप्रद है। मेरुदण्ड को लचीला बनाता है।

 

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन

विधि सर्वप्रथम स्थिति में आइए ।
पैरो को सामने की ओर बिल्कुल सीधा कर मिला लीजिए,अब हाथों को उपर उठा कर कानो की सीध में तानिये,हथेलियाँ दोनो हाथों की आमने-सामने रखते हुए मेरुदण्ड को सीधा रखेंगे,
साँस निकालते हुए आगे की ओर झुकिए ,शरीर और हाथ फर्श के समानांतर रखते हुए,
दोनो पैर के अंगूठों को दोनों हाथों से  पकड़कर रखते हैं ,सीना जांघों से सटा लीजिए और ललाट को घुटने से लगाते हैं।   साँस को सामान्य बनाए रखिए। शुरू में 10-20 सेकेंड ही रोकते हैं और स्थिति में बापिस आ जाते हैं।

सिद्धासन

सिद्धासन

आसनों में सिद्धासन श्रेष्ठ है।

विधि-पहले बाएँ पैर को मोड़कर एड़ी को गुदा द्वार एवं यौन अंगों के मध्य भाग में रखिए। फिर  दाहिने पैर के पंजे को बाई पिंडली पर रखिए। 

बाएँ पैर के टखने पर दाएँ पैर का टखना होना चाहिए। घुटने जमीन पर टिकाए  रखें। पैरों का क्रम बदल भी सकते हैं, हाथों को दोनो घुटनों के ऊपर ज्ञानमुद्रा में रखें।
साँस सामान्य,आज्ञाचक्रमें ध्यान केन्द्रित करें। 

एकपाद उत्तानासन

विधि-सर्वप्रथम सीधे चित्त पीठ के बल लेट जाइए हाथों को बिल्कुल शरीर के बराबर रखिए अब धीरे से साँस लेते हुए दायें पैर को( घुटने से सीधा रखते हुए ) 60 डिग्री का कोण बनाते हुए उठाइए और साँस निकालते हुए वापिस लाइए ठीक  इसी तरह  बायें पैर से दोहराईए 

एक बार दायें से और एक बार बायें से 

इसी  तरह 4-5 बार दोहराए

हंसासन

विधि-  

सर्वप्रथम स्थिति में आएँगे ।पैरों को सामने की और सीधा कर बैठेंगे ।अब वज्रासन में आ जाइए घुटनों में फासला करते हुए आगे की और झुकेंगे।
दोनों हथेलियों को ज़मीन पर घुटनो के बीच में रखिए। उंगलियाँ पीछे की और रहेंगी ।कोहनियों को मोड़ते हुए नाभि के पास सटाइए। सिर को ज़मीन से लगा लीजिए। अब पैरों को पीछे की ओर ले जाइए। पंजों को ज़मीन पर लगा लीजिए ।एड़ी से सिर तक शरीर को एक सीधी रेखा में रखिए ।फर्श पर कोण बनाते हुए।
कुछ देर ५-१० सेकेंड रुकने के बाद स्थिति में आ जाए ,साँस सामान्य बनाए रखे।

लाभ-

सर्वांगासन

विधि-सर्वप्रथम सीधे पीठ के बल लेट जायें । दोनो हाथों को शरीर के बराबर,हथेलियाँ ज़मीन पर ,अब दोनो पैरो को 30 डिग्री पर उठाइए, हाथों को कमर पर रख कर सहारा दीजिए और दोनो पैरो को 90 डिग्री के कोण बनाते हुए सीधा कर लीजिए । कोहनियाँ फर्श पर लगी रहेंगी ।  ठुड्डी को सीने से सटा लीजिए। कुछ देर इसी स्थिति में (5-10 सेकेंड ) रुकिये। बहुत धीरे से वापिस आइए ।

 अब आराम के लिए सीधे शवासन मे  आ जाइए।
 

सावधानियाँ- कमर दर्द, गर्दन दर्द ,हृदय रोगी, हाई बीपी  व स्लिप डिस्क के रोगी न करें।
 

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