Yog

प्रतिदिन 10 से 15 मिनेट कपालभांति

प्रतिदिन 10 से 15 मिनेट
  कपालभांति करने से

कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है

ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है

गैस और एसिडिटी की समस्या नहीं होती

सिर दर्द से मुक्ति मिलती है

ह्रदय रोगों नही होते

चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ती

जुकाम और खांसी नहीं होती

हॉर्मोन और कोलेस्ट्रोल लेवल संतुलित रहता है

आलसपन से छुटकारा मिलता है

metabolism rate , हीमोग्‍लोबिन और थायराइड कंट्रोल में रहता है

महिलाओं की समस्‍याओ के लिए कपालभाती उत्तम माना जाता है

तनाव और डिप्रेशन से मुक्ति मिलती है

योग शास्त्र की भूमिका

योग शास्त्र की भूमिका

योग शास्त्र की भूमिका

योग का वर्णन वेदों में, 
फिर उपनिषदों में और 
फिर गीता में मिलता है,
 लेकिन पतंजलि और 
गुरु गोरखनाथ ने 
योग के बिखरे हुए ज्ञान को 
व्यवस्थित रूप से लिपिबद्ध किया।

 योग हिन्दू धर्म के 
छह दर्शनों में से एक है। 
ये छह दर्शन हैं:-- 
1.न्याय 
2.वैशेषिक 
3.मीमांसा 
4.सांख्य 
5.वेदांत और 
6.योग।* 

आओ जानते हैं योग के बारे में वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं।

पंचकोश सिद्धांत

पंचकोश सिद्धांत

योग की धारणा के अनुसार मानव का अस्तित्व पाँच भागों में बंटा है जिन्हें पंचकोश कहते हैं। ये कोश एक साथ विद्यमान अस्तित्व के विभिन्न तल समान होते हैं। विभिन्न कोशों में चेतन, अवचेतन तथा अचेतन मन की अनुभूति होती है। प्रत्येक कोश का एक दूसरे से घनिष्ठ संबंध होता है। वे एक दूसरे को प्रभावित करती और होती हैं।हमारे शरीर में 5(पांच) कोष होते हैं जिसे विज्ञान ने भी मान लिया है :-
1-अन्नमय कोष(physical Body)
2-प्राणमय कोष(Etherik Body )
3-मनोमय कोष (Astral Body )
4-विज्ञानमय कोष(Cosmic Body)
5-आनन्दमय कोष(Casual Body)

शीर्षासन से हो लाभान्वित

शीर्षासन से हो लाभान्वित

सिर के बल किए जाने की वजह से इसे शीर्षासन कहते हैं। शीर्षासन एक ऐसा आसन है जिसके अभ्यास से हम सदैव कई बड़ी-बड़ी बीमारियों से दूर रहते हैं। हालांकि यह आसन काफी मुश्किल है। यह हर व्यक्ति के लिए सहज नहीं है। शीर्षासन से हमारा पाचनतंत्र अच्छा रहता है, रक्त संचार सुचारू रहता है। शरीर को बल प्राप्त होता है। शीर्षासन करने के लिए के सबसे पहले समतल स्थान पर कंबल आदि बिछाकर वज्रासन की अवस्था में बैठ जाएं। अब आगे की ओर झुककर दोनों हाथों की कोहनियों को जमीन पर टिका दें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में जोड़ लें। अब सिर को दोनों हथेलियों के मध्य धीरे-धीरे रखें। सांस सामान्य रखें। सिर को जमीन पर टिकाने

हलासन की विशेष जानकारी

हलासन की विशेष जानकारी

पेट की चर्बी कम करने में:
 इस आसन के नियमित अभ्यास से आप अपने पेट की चर्बी को कम कर सकते हैं। और अपने वजन पर भी काबू पा सकते हैं।

बाल झड़ने के रोकने में:
 इस आसन के अभ्यास से खून का बहाव सिर के क्षेत्र में ज़्यदा होने लगता है और साथ ही साथ बालों को सही मात्रा में खनिज तत्व मिलने लगता है। जो बालों के सेहत के लिए अच्छा है।

चेहरे की खूबसूरती के लिए:
 इसके रोज़ाना अभ्यास से आपके चेहरे में निखार आने लगता है।

हृदय रोगों में योगासनों के लाभ

हृदय रोगों में योगासनों के लाभ

भारत में हर साल दिल की विमरियो या हार्ट अटैक से लाखो मौत होती हैं यह बीमारी मानसिक तनाव दूषित खान पान व्लड प्रेशर आदि कारणों से होती है योग एक जरिया है जिससे हम अपने दिल को बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं। ऐसे योगासन हैं, जिसमें सबसे ज्यादा फोकस सांसों पर होता है, जिससे हमारा रेस्पिरेटरी सिस्टम दुरुस्त रहता है।दिल की बीमारियों को कार्डिवस्‍कुलर डिजीज कहा जाता है। चिकित्‍सीय भाषा में दिल की बीमारियों के लिए यही शब्‍दावली इस्‍तेमाल की जाती है। रजिस्‍ट्रार जनरल ऑफ इंडिया और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक नए शोध के मुताबिक भारत में बड़ी संख्‍या में लोग दिल की बीमारियों के कारण गंवाते ह

हेयर योगा : योग में चमत्कार

हेयर योगा

उम्र से पहले बालों का सफेद होना एक आम समस्या है और इससे निजात पाने के लिए कारगर है- ग्रे हेयर योगा। इस योगा में हाथों के नाखूनों को आपस में रगड़ा जाता है। आप एक हाथ के नेल्स को दूसरे हाथ के नेल्स से रब करें। इसे एक दिन पांच मिनट के लिए 5 बार करें। अगर आप इसे योग को छह महीने के लिए नियमित तौर पर करते हैं तो बालों के असमय सफेद होने की समस्या से निजात पायी जा सकती है।

डिप्रेशन को खत्म करने की दिशा में : योग

डिप्रेशन को खत्म करने की दिशा में : योग

कई बार हम लंबे समय तक इसे नजरंदाज करते रहते हैं। इस तरह ना तो हम प्रफेशनली अपना बेस्ट दे पाते हैं और न ही निजी जिंदगी में खुश रह पाते हैं। ऐसा माना गया है कि डिप्रेशन का इलाज योग में भी है। आइए जानें कि किस तरह दिनचर्या से कुछ वक्त निकालकर योग के जरिए हम डिप्रेशन को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं- 

हृदय रोग को दूर भगाए योगासन

हृदय रोग को दूर भगाए योगासन

हृदय रोगों की संख्याल के बढ़ने कीसबसे बड़ी वजह है लोगों का अपनी सेहत को हल्के में लेना। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने काम को ज्यादा प्रथामिकता देते हैं। लेकिन जरा सोचिए अगर आप स्वस्थ नहीं रहेंगे तो काम कैसे कर पाएंगे। ऐसे में अगर आप थोड़ा सा समय योग के लिए निकालें तो आप अपने दिल को चुस्त दुरुस्त रख पाएंगे। आईए जानें हृदय रोग में कौन से कौन योग करना चाहिए। 
ताड़ासन 

स्त्री-पुरुष दोनों में ही शारीरिक फिटनेस योग से

आम जीवन में स्त्री-पुरुष दोनों में ही शारीरिक फिटनेस या सुडौलता के प्रति जिज्ञासा बढ़ी है, परिणामस्वरूप प्रत्येक छोटे-बड़े शहरों व कस्बों में आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित व्यायामशाला, हैल्थ क्लब, जिम, क्लब एवं फिटेनस सेंटर दिखाई दे रहे हैं।

वीर्यवान व्यक्ति ही अपना सर्वांगीण विकास कर सकता है

वीर्यवान व्यक्ति

हमारे ऋषियों ने योग का प्रयोग भोग के वजाय आध्यात्मिक प्रगति करने के लिए जोर दिया है जो नैतिक दृष्टि से सही भी है | परन्तु ईश्वर की सृष्टि को बनाये रखने के लिए संसारिकता भी आवश्यक है, वीर्यवान व्यक्ति ही अपना सर्वांगीण विकास कर सकता है,संतानोत्पत्ति के लिए वीर्यवान होना आवश्यक है पौरूषवान (वीर्यवान) व्यक्ति ही सम्पूर्ण पुरुष कहलाने का अधिकारी होता है | वीर्य का अभाव नपुंसकता है इसलिए मौज-मस्ती के लिए वीर्य का क्षरण निश्चित रूप से दुखदायी होता है | ऐसे व्यक्ति स्वप्नदोष,शीघ्रपतन और नपुंसकता जैसे कष्ट सहने को विवश होते हैं |

क्‍या हैं यागासन के लाभ

यागासन के लाभ

(1) योगासनों से भीतरी ग्रंथियां अपना काम अच्छी तरह कर सकती हैं और युवावस्था बनाए रखने एवं वीर्य रक्षा में सहायक होती है।
(2) योगासनों द्वारा पेट की भली-भांति सुचारु रूप से सफाई होती है और पाचन अंग पुष्ट होते हैं। पाचन-संस्थान में गड़बड़ियां उत्पन्न नहीं होतीं।
(3) योगासन मेरुदण्ड-रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाते हैं और व्यय हुई नाड़ी शक्ति की पूर्ति करते हैं।
(4) योगासन पेशियों को शक्ति प्रदान करते हैं। इससे मोटापा घटता है और दुर्बल-पतला व्यक्ति तंदरुस्त होता है।

Pages