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योग से सेहत को कितना फायदा?

योग से सेहत को कितना फायदा?

आना ट्रोएकेस: हम जानते हैं कि आजकल ज्यादातर बीमारियों का तनाव से कुछ ना कुछ संबंध होता है. रोजमर्रा के जीवन का तनाव शरीर के कई हिस्सों, हृदय के रोग से लेकर शरीर के पूरे प्रतिरोधी तंत्र पर पड़ता है. हजारों सालों से योग में इन तनावों से निपटने के तरीकों का विकास हुआ है, जिनसे जीवन में तनाव से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.

किन बीमारियों में योग के फायदे सिद्ध हो चुके हैं?

मिर्गी रोग को जड़ से खत्म करते हैं ये योगासन

मिर्गी रोग को जड़ से खत्म करते हैं ये योगासन

मिर्गी के लिए योग : मिर्गी एक दिमागी बीमारी है जिसमें रोगी को अचानक दौरा पड़ने लगता है। दौरा पड़ने पर व्यक्ति का दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है और उसका शरीर अकड़ जाता है। मिर्गी के रोग को ठीक करने के लिए रोगी कई तरह के इलाज करवाते हैं लेकिन कई बार इससे दौरे पड़ने की स्थिति में फर्क नहीं पड़ता। ऐसे में योगासन करके मिर्गी की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है। आइए जानिए ऐसे ही कुछ योग क्रियाओं के बारे में

बस करें ये छोटा सा आसन उपाय, कभी नहीं आएगा बुढ़ापा

नहीं आएगा बुढ़ापा

जिंदगी की शाम जब ढलने लगती है तो न सिर्फ शरीर में ढेरों बीमारियां अपना घर बना लेती हैं, बल्कि जीवन में एक सूनापन भी छा जाता है। 

हमारे देश में बहुत कम ऐसे लोग हैं, जो 60 साल की उम्र में भी उसी जीवंतता के साथ जीवन व्यतीत करते हैं। योग के सहारे इस उम्र में भी खुद को शारीरिक व मानसिक रूप से दुरुस्त रख सका जा सकता है।

वैसे तो उम्र ड़ाव पर ही योग के अनेक फायदे हैं, लेकिन स्त्रियों को तो योग के ज़रिये अतिरिक्त फायदा पहुंचता है। उम्र के अलग-अलग दौर में विभिन्न प्रकार के हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। 

योगासनों का सबसे बड़ा गुण

योगासनों का सबसे बड़ा गुण

 यह हैं कि वे सहज साध्य और सर्वसुलभ हैं। योगासन ऐसी व्यायाम पद्धति है जिसमें न तो कुछ विशेष व्यय होता है और न इतनी साधन-सामग्री की आवश्यकता होती है। योगासन अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान, सबल-निर्बल सभी स्त्री-पुरुष कर सकते हैं। आसनों में जहां मांसपेशियों को तानने, सिकोड़ने और ऐंठने वाली क्रियायें करनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर साथ-साथ तनाव-खिंचाव दूर करनेवाली क्रियायें भी होती रहती हैं, जिससे शरीर की थकान मिट जाती है और आसनों से व्यय शक्ति वापिस मिल जाती है। शरीर और मन को तरोताजा करने, उनकी खोई हुई शक्ति की पूर्ति कर देने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योगासनों का अपना अलग महत्त्व है।

कपालभाति प्राणायाम नहीं बल्कि षट्कर्म का अभ्यास है।

कपालभाति प्राणायाम नहीं बल्कि षट्कर्म का अभ्यास है।

कपालभाति प्राणायाम नहीं बल्कि षट्कर्म का अभ्यास है। इसके लिए पालथी लगाकर सीधे बैठें, आंखें बंदकर हाथों को ज्ञान मुद्रा में रख लें। ध्यान को सांस पर लाकर सांस की गति को अनुभव करें और अब इस क्रिया को शुरू करें। इसके लिए पेट के निचले हिस्से को अंदर की ओर खींचे व नाक से सांस को बल के साथ बाहर फेंके। यह प्रक्रिया बार-बार इसी प्रकार तब तक करते जाएं जब तक थकान न लगे। फिर पूरी सांस बाहर निकाल दें और सांस को सामान्य करके आराम से बैठ जाएं।

सुप्त-वज्रासन

विधि- स्थिति में आइए (दोनों पैरों को सामने फैलाकर बैठ जाएँगे ) दोनों पैर मिलाइए , हाथ बराबर में, कमर सीधी रखते हुए। अब वज्रासन स्थिति में बैठेंगे।पैरों में पीछे  अंतर रखेंगे जिससे नितंब जमीन से लग जाए अब  धीरे से दोनों कुहनियों के सहारे से  पीठ के बल जमीन पर लेट जाएँगे । घुटनो को ज़मीन से लगाएँगे ,हाथों को सिर के उपर रखेंगे या नमस्कार मुद्रा में सीने पर भी रख सकते हैं  कुछ देर इसी स्थिति में रहेंगे फिर
 दोनों कुहनियों की सहायता से उठकर बैठ जाते है।

सावधानी-  अधिक कमर दर्द व घुटने दर्द  के रोगी न करें।

लाभ-

शशांकासन

शशांक का अर्थ होता है खरगोश। आसन में व्यक्ति का आकार खरगोश के समान होता है, इसलिए इसे शशांकासन कहते हैं।
 

विधि-  सर्वप्रथम वज्रासन में आइए अर्थात दोनो पैरों को घुटनों से मोड़कर पीछे की ओर नितम्ब  के नीचे रखें और एड़ियों पर बैठ जाएं। हाथों को पीठ के पीछे ले जाइए अब दायें हाथ से बायें हाथ को थामिये।
अब कमर से आगे को झुकेंगे और सर को घुटनो के सामने फर्श पर लगायेंगे फिर धीरे से बापिस आएँगे ।
साँस निकालते हुए नीचे जाएँगे और साँस लेते हुए वापिस आएँगे 10-20 सेकेंड रोक सकते हैं ।
आसन को रोकते समय साँस को भी रोकते हैं।इस क्रिया को 4 से 5 बार करें।

मयूरासन

इस आसन में आकृति मोर के समान बनती है इसलिए इसे मयूरासन कहते हैं। इस आसन को प्रतिदिन करने से कभी मधुमेह रोग के आप शिकार नही होते।

विधि-  

पवन-मुक्त आसन

दूषित वायु को शरीर से निष्कासित करता है।

विधि- सर्वप्रथम चित लेट जायें (शवासन में)। पैरो को पास ,हाथों को शरीर के बराबर में  ज़मीन पर रख लें ,धीरे से दायें पैर को घुटने से मोड़कर ,दोनो हाथो की उंगलियों को आपस में फसांते हुए दाएँ घुटने के नीचे से पैर को थामिये अब ठोड़ी को घुटने से लगाइए फिर सिर को वापिस पीछे रखते हुए पैर को भी सीधा कर लीजिए।

 ठीक इसी तरह बायें पैर से भी दोहराईए। 4-5 बार दोनो तरफ से दोहराएँगे।

साँस निर्देश-  साँस लेते हुए पैर को  थामिये और साँस को निकलते हुए ठोड़ी को घुटने से लगाइए।

सेतुबंधासन

विधि-

सर्वप्रथम सीधे पीठ के बल चित लेट जाइए। हाथों को शरीर के बराबर में सटाकर रखिए। अब दोनो पैरो को घूटने से मोड़कर, साँस लेते हुए कमर के हिस्से को उपर उठाएँगे ।साँस निकालते हुए कमर को वापिस फर्श पर लाएँगे।
-अभ्यास को साँस के साथ ही दोहराएँगे।
-शुरू में 5-7 बार दोहरा सकते हैं।

लाभ-कमर दर्द में च्मत्कारिक लाभ हैं ।कमर की मासपेशियों को मजबूत कर रकसंचार तेज करता है। कमर की चर्बी को भी कम करता है।
पेट के रोगों में भी लाभप्रद है। मेरुदण्ड को लचीला बनाता है।

 

पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन

विधि सर्वप्रथम स्थिति में आइए ।
पैरो को सामने की ओर बिल्कुल सीधा कर मिला लीजिए,अब हाथों को उपर उठा कर कानो की सीध में तानिये,हथेलियाँ दोनो हाथों की आमने-सामने रखते हुए मेरुदण्ड को सीधा रखेंगे,
साँस निकालते हुए आगे की ओर झुकिए ,शरीर और हाथ फर्श के समानांतर रखते हुए,
दोनो पैर के अंगूठों को दोनों हाथों से  पकड़कर रखते हैं ,सीना जांघों से सटा लीजिए और ललाट को घुटने से लगाते हैं।   साँस को सामान्य बनाए रखिए। शुरू में 10-20 सेकेंड ही रोकते हैं और स्थिति में बापिस आ जाते हैं।

सिद्धासन

सिद्धासन

आसनों में सिद्धासन श्रेष्ठ है।

विधि-पहले बाएँ पैर को मोड़कर एड़ी को गुदा द्वार एवं यौन अंगों के मध्य भाग में रखिए। फिर  दाहिने पैर के पंजे को बाई पिंडली पर रखिए। 

बाएँ पैर के टखने पर दाएँ पैर का टखना होना चाहिए। घुटने जमीन पर टिकाए  रखें। पैरों का क्रम बदल भी सकते हैं, हाथों को दोनो घुटनों के ऊपर ज्ञानमुद्रा में रखें।
साँस सामान्य,आज्ञाचक्रमें ध्यान केन्द्रित करें। 

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