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हमारे शरीर को 13 प्रकार की अग्नियां चलाती हैं,

अग्नियां चलाती

हमारे शरीर को 13 प्रकार की अग्नियां चलाती हैं, जिनमें खाना पचाने में उपयोगी सात धातुओं की अग्नि, पांच भूतों की अग्नि व एक भूख लगाने वाली जठराग्नि होती है। अतः जो इन 13 प्रकार की अग्नियों को बल दे, उसे अग्निसार कहते हैं। यह क्रिया पेट के रोगों से जीवन भर बचाव के लिए बड़ी महत्वपूर्ण है। यह भी षट्कर्म का एक अभ्यास है।

योग से करें अपनी समस्याओं को दूर

योग से करें अपनी समस्याओं को दूर

 क्या आप भी हर रोज सुबह उठकर कब्ज की समस्या से दो-चार होते हैं। ढंग से पेट साफ ना होने की वजह से क्या आपका भी दिमाग दिन भर पेट में ही अटका रहता है। लाइफ में बढ़ रहा स्ट्रेस और डेडलाइन्स का प्रेशर हमें हमारी रोजमर्रा के जरुरी कामों को करने के लिए भी समय नहीं दे रहे, जिसका बुरा असर हमारे शरीर पर पड़ रहा है। ऐसे में हमारीआंत से जुड़ी सभी समस्याएं फिर चाहे वो कब्ज हो या एसिडिटी या कुछ और...इन्हें दूर करने के लिए हमें अपनी कुछ आदतें बदलनी होंगी और सबसे जरुरी- 'योग' को बनाना ...

ध्यानयोग की विधियाँ

ध्यानयोग की विधियाँ

शिव ने कहा: होश को दोनों भौहों के मध्य में लाओ और मन को विचार के समक्ष आने दो। देह को पैर से सिर तक प्राण तत्व से भर जाने दो, ओर वहां वह प्रकाश की भांति बरस जाए।
“होश को दोनों भौंहों के मध्य में लाऔ।”……अपनी आंखें बंद कर लो, और अपनी आंखों को दोनों भौंहों के ठीक बीच में केंद्रित करो। आंखे बंद करके ठीक मध्य में होश को केंद्रित करो, जैसे कि तुम अपनी दोनों आँखो से देख रहे हो। उस पर पूरा ध्यान दो।

महराजगंज में पढ़ाई के साथ योग भी सीखेंगे राजकीय विद्यालय के मेधावी

वैश्विक स्तर पर छाप छोड़ चुके योग के जरिए निरोग होने का मंत्र अब राजकीय माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थी भी सीखेंगे। इसके लिए जिले के सभी 26 राजकीय इंटर कॉलेजों में योग गुरु तैनात किए गए हैं। स्कूल समय में ये शिक्षक विद्यार्थियों को योगाभ्यास के साथ ही विभिन्न आसन भी सिखाएंगे। 
दो घंटे चलेगी योग की कक्षा 

आसन

विभिन्न ग्रंथों में आसन के लक्षण हैं - उच्च स्वास्थ्य की प्राप्ति, शरीर के अंगों की दृढ़ता, प्राणायामादि उत्तरवर्ती साधनक्रमों में सहायता, स्थिरता, सुख दायित्व आदि। पंतजलि ने स्थिरता और सुख को लक्षणों के रूप में माना है। प्रयत्नशैथिल्य और परमात्मा में मन लगाने से इसकी सिद्धि बतलाई गई है। इसके सिद्ध होने पर द्वंद्वों का प्रभाव शरीर पर नहीं पड़ता। किंतु पतंजलि ने आसन के भेदों का उल्लेख नहीं किया। उनके व्याख्याताओं ने अनेक भेदों का उल्लेख (जैसे - पद्मासन, भद्रासन आदि) 

योगा का गलत तरीका नुकसान पहुचा सकता है

योग शरीर को स्वस्थ और फिट रखने का बेहतरीन माध्यम है। आजकल दुनिया भर में योग के प्रति लोगों की जागृति में इजाफा हुआ है। लोग निरोग होने के लिए नियमित योग कर रहे हैं। योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाला अभ्यास है जिसमें अनुशासन का बड़ा महत्व है। मतलब यह कि एक निश्चित नियम के अनुसार योग करने से ही उसका लाभ हमें मिलता है। इसलिए योग करने से पहले जरूरी है कि हम उसकी ठीक से जानकारी कर लें। गलत तरीके से योग करना सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इन सबके अलावा योग से पहले यह बात भी जान लेना जरूरी है कि योग के पहले और बाद में क्या करना चाहिए और क्या नहीं। तो आइए हम आपको बताते हैं कि योग क

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