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अच्छी नींद के लिये योग करें

अच्छी नींद के लिये

यदि आदतन आप को रात को अच्छी नींद नहीं आती,तो यह संभव है कि आप की उम्र तेजी से ज्यादा बढ़ रही है और इसके अतिरिक्त आप को अच्छा नहीं लगता होगा और आपकी भ्रमित सोच होगी | जब हम नींद में होते हैं तब हमारा शरीर के कोशिका स्तर में सुधार होता है और विषाक्त पदार्थों का निष्कासन होता है | इसलिये प्रतिदिन ६-८ घंटों की नींद आवश्यक है |

यदि आप की पर्याप्त नींद नहीं होती, तो योग इसमें सहायता करेगा | निरंतर योग के अभ्यास से कई रोगों का निदान हुआ है जिसमें अनिद्रा और असामान्य नींद की आदतें शामिल है | दिन के अंत में योग तनाव से मुक्ति देता है जिससे रात में अच्छी नींद आती है | Read More : अच्छी नींद के लिये योग करें about अच्छी नींद के लिये योग करें

पवनमुक्तासन कैसे किया जाता है

पवनमुक्तासन कैसे किया जाता है

सीधे लेटकर दांये पैर के घुटने को छाती पर रखें। दोनों हाथों को अंगुलियां एक दूसरे में डालते हुये घुटने पर रखें, श्वांस बाहर निकालते हुये घुटने को दबाकर छाती से लगायें एवं सिर को उठाते हुये घुटने से नासिका का स्पर्श करें। 10 से 30 सैकण्ड रोकते हुये फिर पैर को सीधा कर दें। इसी तरह दूसरे पैर से करें। अन्त में दोनों पैरों से एक साथ करें।

वायु विकार, स्त्रीरोग, मोटापा, कमरदर्द, हृदयरोग में लाभप्रद। यदि कमर में दर्द हो तो सिर उठाकर घुटने से नासिका ना लगायें। केवल पैरो को दबाकर छाती से स्पर्श करें। इससे स्लिपडिस्क, सायटिका, कमरदर्द में लाभ होता है।  Read More : पवनमुक्तासन कैसे किया जाता है about पवनमुक्तासन कैसे किया जाता है

सिंहनाद

योग
  • वज्रासन में बैठकर, थोड़ा झुकते हुये दोनों घुटनों के बीच में हथेलियों को जमीन पर पीेछे की और टिकाकर, गर्दन को घुमायेंगे। अब श्वासं भरकर मुहं खोलकर जीभ बाहर निकालकर ऊपर की और गर्दन करके, आंखें फैलाकर ऊपर देखते हुये गले के अन्दर से शेर की भांति दहाड़ मारेंगे। इस स्थिती में कुछ देर रूकना है। 2-3 बार करना है। सिहांसन करने के पश्चात गले से लार छोड़ते हुये हल्के हाथ से गले की मालिश करनी चाहिये।
  • इससे गले में खराश नहीं होती। टाँसिल, थायराईड व अन्य गले सम्बन्धी रोगों में उपयोगी है।
  • अस्पष्ट उच्चारण, तुतलाकर बोलने वालों के लिये महत्वपूर्ण है।
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योगासन क्या करता है

योगासन क्या करता है
1. शरीर के अन्दर एवं बाह्य दोनों नस नाडि़यों, ग्रन्थियों व मांसपेशियों को लचीला, पुष्ट, सुदृढ बनाता है।
2. इससे शरीर में स्फुर्ति, ताजगी व हल्केपन का अनुभव होता है, अन्य परिश्रम हेतु पूर्ण उत्साह एवं अभिरूचि होती है।
3. इसे सब उम्र के व्यक्ति कर सकते। व्यस्त व्यक्ति भी 10 मिनट निकाल सकते हैं।
4. 10 से 15 मिनट का समय स्वस्थ रहने हेतु पर्याप्त है।

5. योगासन में किसी भी वस्तु, स्थान या व्यक्ति विशेष पर अवलम्बित नहीं रहना पड़ता जब इच्छा वहीं पर कर सकते हैं।

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शलभासन

शलभासन

शलभासन योग करते समय शरीर का आकार शलभ (Locust) कीट की तरह होने से, इसे शलभासन(Locust Pose) कहा जाता हैं। कमर और पीठ के मजबूत करता है और पाचन क्रिया को सुधारता है। शलभासन करने की प्रक्रिया और लाभ नीचे दिए गए हैं :

शलभासन करने की प्रक्रिया 

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अनुलोम विलोम प्राणायाम

अनुलोम विलोम प्राणायाम

दांये हाथ को ऊपर उठायें। दांये हाथ के अंगुठे से दाहिनी नासिका बन्द करें और बांयी नासिका से श्वांस को लम्बा गहरा धीरे धीरे फेफड़ों में भरेंगे। पूरा श्वांस भरने के पश्चात दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली से बांयी नासिका को बन्द कर देंगे व अंगूठे को दांयी नासिका से हटा लेंगे अर्थात दांयी नासिका खोलते हुये, लिये गये श्वांस को बिना अन्दर रोके दांयी नासिका से धीरे धीरे पूरा बाहर छोड़ देंगे तथा बाहर भी श्वांस को बिना रोके जिस नासिका (दांयी) से श्वांस बाहर छोड़ा है उसी नासिका से श्वांस को धीरे धीरे फेफड़ों में भरेंगे। पूरा श्वांस भरने के पश्चात दायें हाथ के अंगुठे से दाहिनी नासिका बंद कर देंगे और बांयी Read More : अनुलोम विलोम प्राणायाम about अनुलोम विलोम प्राणायाम

भ्रस्त्रिका प्राणायाम

भ्रस्त्रिका प्राणायाम
  • श्वांस को लम्बा गहरा धीरे-धीरे नाक के द्वारा फेफड़ों में डायफ्राॅम तक भरेंगे पेट नहीं फुलायेंगे और श्वासं बिना अन्दर रोके, लिये गये श्वांस को नासिका द्वारा धीरे धीरे पूरा ही बाहर छोड़ देंगे तथा बाहर भी श्वांस को बिना रोके पूर्व की भांति श्वासं को भरेंगे। इस अभ्यास को जारी रखें।
  • नये साधक थकने पर बीच में कुछ देर के लिये विश्राम कर सकते हैं। तथा अपने उथले श्वासं की गहराई को बढ़ाने का प्रयास करें।
  • गर्मी में 3 मिनट व सर्दी में 7 मिनट तक किया जा सकता है।
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व्यायाम व जिम्नास्टिक

व्यायाम व जिम्नास्टिक

1. शरीर के केवल बाह्य मांसपेशियों व मसल को कड़ा व मजबूत बनाता है।

2. इसको करने से शरीर में आलस्य थकावट आती है तथा दूसरे परिश्रम करने की अनिच्छा होती है।

3. अधिक वृद्ध, स्त्री, कमजोर, रोगी वयस्त व्यक्ति नहीं कर सकते।

4. अधिक समय व शक्ति की जरूरत होती है

5. खेल, व्यायाम में हम दूसरी वस्तु या व्यक्ति पर निर्भर रहते हैं, जिसके अभाव में व्यायाम नहीं कर सकते।

6. इसके अभ्यास से शरीर में कठोरता व भारीपन होता है, जिससे ढलती उम्र में वात, गठिया रोग हो जाते हैं। शरीर अल्पायु हो जाता है जैसे - पहलवान, कुश्ती लड़ने वालों का। Read More : व्यायाम व जिम्नास्टिक about व्यायाम व जिम्नास्टिक

सेतुबंधासन आसन से लाभान्वित

सेतुबंधासन

भूमि पर सीधे लेट जाइए। दोनों घुटनों को मोड़कर रखिए। कटिप्रदेश को ऊपर उठा कर दोनों हाथो को कोहनी के बल खड़े करके कमर के नीचे लगाइये। अब कटि को ऊपर स्थिति रखते हुए पैरों को सीधा किजिए। कंधे व सिर भूमि पर टिके रहें। इस स्थिति में 6-8 सेंकण्ड रहें। वापस आते समय नितम्ब एवं पैरों को धीरे-धीरे जमीन पर टेकिए। हाथो को एकदम कमर से नहीं हटाना चाहिये। शवासन में कुछ देर विश्राम करके पुनः अभ्यास को 4-6 बार दोहराएं। Read More : सेतुबंधासन आसन से लाभान्वित about सेतुबंधासन आसन से लाभान्वित

हाथों व कन्धे के व्यायाम

हाथों व कन्धे के व्यायाम
  • हाथों की अंगुलियों को परस्पर मिलाते हुये मोड़ना, हाथों को सामने की और फैलाकर अंगुलियों के पोरों को धीरे-धीरे मोड़ें सीधा करें। इसके पश्चात अंगूठे व अंगुलियों को मोड़कर दबाते हुए मुक्का जैसी आकृति बनायें फिर धीरे-धीरे खोलें ऐसा 5-7 बार करें। अब अंगुठे को मोड़कर अंगुलियों से दबाते हुए दोनों हाथों की मुटिठयों को बन्द करके क्रमशःदोनों और घुमायें। कोहनियां सीधी रहनी चाहिये।
  • अब कोहनियों के लिये कोहनी को दूसरे हाथ की हथेली पर रखकर दोनों और गोल घुमायें।
  • अब कन्धे के लिये दोनो कन्धों को क्रमशः ऊपर नीचे करें फिर आगे व पीछे की और गोल घुमायें।
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