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सांस लेने की तकनीक प्राणायाम और ध्यान

सांस लेने की तकनीक प्राणायाम और ध्यान

सांस का नियंत्रण और विस्तार करना ही प्राणायाम है। साँस लेने की उचित तकनीकों का अभ्यास रक्त और मस्तिष्क को अधिक ऑक्सीजन देने के लिए, अंततः प्राण या महत्वपूर्ण जीवन ऊर्जा को नियंत्रित करने में मदद करता है । प्राणायाम भी विभिन्न योग आसन के साथ साथ चलता जाता है।  योग आसन और प्राणायाम का संयोग शरीर और मन के लिए, शुद्धि और आत्म अनुशासन का उच्चतम रूप माना गया है। प्राणायाम तकनीक हमें ध्यान का एक गहरा अनुभव प्राप्त करने हेतु भी तैयार करती है। Read More : सांस लेने की तकनीक प्राणायाम और ध्यान about सांस लेने की तकनीक प्राणायाम और ध्यान

प्राणायाम के लाभ और कैसे करे

प्राणायाम  के लाभ

प्राण का अर्थ, ऊर्जा अथवा जीवनी शक्ति है तथा आयाम का तात्पर्य ऊर्जा को नियंत्रित करनाहै। इस नाडीशोधन प्राणायाम के अर्थ में प्राणायाम का तात्पर्य एक ऐसी क्रिया से है जिसके द्वारा प्राण का प्रसार विस्तार किया जाता है तथा उसे नियंत्रण में भी रखा जाता है.

यहाँ 3 प्रमुख प्राणायाम के बारे में चर्चा की जा रही है:-

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

 प्राणायाम की विधि:- Read More : प्राणायाम के लाभ और कैसे करे about प्राणायाम के लाभ और कैसे करे

कमर दर्द को आसान

काम चाहे घर में हो या ऑफिस में, कार्य चाहे खडे़ रहकर करने का हो या बैठकर करनेका अक्सर कमर में दर्द हो ही जाता है। कमर दर्द की वजह से आपको बड़ी परेशानी होती है। महिलाओं में कमर दर्द एक आम समस्या हो गई है। खासकर कामकाजी महिलाएं तो इस समस्या के साथ जीने की आदी दिखती हैं। जब इससे बचने और उससे मुक्ति के उपाय बेहद आसान हैं तो क्यों इस समस्या से जूझा जाए। राजेश मिश्रा बता रहे हैं इससे मुक्ति के उपाय - Read More : कमर दर्द को आसान about कमर दर्द को आसान

योग से करें अपनी समस्याओं को दूर

योग से करें अपनी समस्याओं को दूर

 क्या आप भी हर रोज सुबह उठकर कब्ज की समस्या से दो-चार होते हैं। ढंग से पेट साफ ना होने की वजह से क्या आपका भी दिमाग दिन भर पेट में ही अटका रहता है। लाइफ में बढ़ रहा स्ट्रेस और डेडलाइन्स का प्रेशर हमें हमारी रोजमर्रा के जरुरी कामों को करने के लिए भी समय नहीं दे रहे, जिसका बुरा असर हमारे शरीर पर पड़ रहा है। ऐसे में हमारीआंत से जुड़ी सभी समस्याएं फिर चाहे वो कब्ज हो या एसिडिटी या कुछ और...इन्हें दूर करने के लिए हमें अपनी कुछ आदतें बदलनी होंगी और सबसे जरुरी- 'योग' को बनाना ... Read More : योग से करें अपनी समस्याओं को दूर about योग से करें अपनी समस्याओं को दूर

योग के ग्रंथ: पतंजलि योग सूत्र

योग के ग्रंथ: पतंजलि योग सूत्र

पतंजलि को योग के पिता के रूप में माना जाता है और उनके योग सूत्र पूरी तरह योग के ज्ञान के लिए समर्पित रहे हैं।

प्राचीन शास्त्र पतंजलि योग सूत्र, पर गुरुदेव के अनन्य प्रवचन, आपको योग के ज्ञान से प्रकाशमान (लाभान्वित) करते हैं, तथा योग की उत्पति और उद्देश्य के बारे में बताते हैं। योग सूत्र की इस व्याख्या का लक्ष्य योग के सिद्धांत बनाना और योग सूत्र के अभ्यास को और अधिक समझने योग्य व आसान बनाना है। इनमें ध्यान केंद्रित करने के प्रयास की पेशकश की गई है कि क्या एक ‘योग जीवन शैली’ का उपयोग योग के अंतिम लाभों का अनुभव करने के लिए किया जा सकता है| Read More : योग के ग्रंथ: पतंजलि योग सूत्र about योग के ग्रंथ: पतंजलि योग सूत्र

बाह्य प्राणायाम त्रिबन्ध के साथ

बाह्य प्राणायाम त्रिबन्ध के साथ

सबसे पहले मध्यपट को निचे झुकाये और फेकडो को फुलाने की कोशिश करे और ऐसा महसुस करे जैसे की आपकी गले की हड्डियाँ फूल रही हो. तेज़ी से साँस छोड़ते जाये और ऐसा करते समय अपने पेट पर भी थोडा जोर दे. शरीर के मध्यपट से साँस ऊपर फेकने की कोशिश करते रहे. अब धीरे-धीरे अपनी छाती को ठोड़ी लगाने की कोशिश करे और अपने पेट को हल्के हाथो से दबाकर साँस बाहर निकलने की कोशिश करते रहे. आपको ऐसा करने की जरुरत है, ऐसा आपको करना ही पड़ेगा. इस अवस्था में जितनी भी देर तक आप अपने आप को रख सकते है उतनी देर तक रहे. अब धीरे-धीरे अपने पेट और मध्यपट को छोड़े और उन्हें हल्का महसुस होने दे. Read More : बाह्य प्राणायाम त्रिबन्ध के साथ about बाह्य प्राणायाम त्रिबन्ध के साथ

भ्रामरी प्राणयाम करने का तरीका

श्वांस को लम्बा गहरा फफड़ों में भरते हुये, दोनों कानों में अंगुलियां डालकर कानों को बन्द कर देंगे, बाहर की कोई भी ध्वनि सुनाई ना दे। अब मुहं व होठों का बन्द करके जीभ को ऊपर तालु पर लगा देंगे। ओउम का दीर्घ गुंजन, भौरें के उड़ते समय की ध्वनि की तरह करेंगे, जिसमें श्वांस नासिका से गुंजन के साथ बाहर निकलेगा और पूरे मस्तिष्क में कम्पन्न होगा। यह प्राणायाम करते समय अपना ध्यान आज्ञा चक्र भृकुटिद् पर केन्द्रित करेंगे। इस प्रकार 5 से 7 बार दोहरायेंगे। मन एकाग्र होता है, याददाश्त तेज होती है। मानसिक तनाव, उच्चरक्तचाप, हृदयरोग, उत्तेजना में लाभप्रद।  Read More : भ्रामरी प्राणयाम करने का तरीका about भ्रामरी प्राणयाम करने का तरीका

ध्यानयोग की विधियाँ

ध्यानयोग की विधियाँ

शिव ने कहा: होश को दोनों भौहों के मध्य में लाओ और मन को विचार के समक्ष आने दो। देह को पैर से सिर तक प्राण तत्व से भर जाने दो, ओर वहां वह प्रकाश की भांति बरस जाए।
“होश को दोनों भौंहों के मध्य में लाऔ।”……अपनी आंखें बंद कर लो, और अपनी आंखों को दोनों भौंहों के ठीक बीच में केंद्रित करो। आंखे बंद करके ठीक मध्य में होश को केंद्रित करो, जैसे कि तुम अपनी दोनों आँखो से देख रहे हो। उस पर पूरा ध्यान दो।
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सूक्ष्म व्यायाम

सूक्ष्म व्यायाम

सूक्ष्म योग क्रियाएं बैठ कर करनी चाहिए | जो नीचे नहीं बैठ सकते वे कुर्सी या खाट पर बैठ या खड़े रह कर कर सकते हैं। मन को लीन करें तो पूरा लाभ मिलेगा | भोजन करते ही तुरंत ये क्रियाएं नहीं करनी चाहिए। सूक्ष्म योग क्रियाओं का संबंध शरीर के अवयवों से रहता है | इसलिए अवयवों के क्रम के अनुसार, सूक्ष्मयोग क्रियाओं का संक्षेप में विवरण यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है | जिस अवयव से सूक्ष्म योग क्रिया संबंधित है, उस अवयव पर मन को केन्द्रित करना आवश्यक है | हर क्रिया शक्ति के अनुसार 15 से 60 सेकंड तक करनी चाहिए | Read More : सूक्ष्म व्यायाम about सूक्ष्म व्यायाम

कपाल भाति प्राणायाम :

कपाल अर्थात मस्तिष्क, भाति अर्थात तेज, प्रकाश आभा, यानि जिस प्राणायाम के करने से आभा, तेज, व ओज बढ़ता हो वह है कपालभाति प्राणायाम विधी:- श्वांस को लम्बा गहरा नासिका के द्वारा फेफड़ों में भरेंगे और लिये गये श्वांस को बिना अन्दर रोके नासाछिद्रों द्वारा प्रयासरत होकर इस प्रकार छोड़ेंगे कि श्वांस को बाहर छोड़ने के साथ ही पेट अन्दर की और पिचके। श्वांस भीतर जा रहा है उस और ध्यान नहीं देते हुए लगातार छोड़ने की क्रिया करनी है। मध्यमगति व मध्यम शक्ति के साथ करें व नये साधक थकने पर कुछ देर बीच में विश्राम कर सकते हैं। श्वांस को अधिक गहराई के साथ छोड़ने का प्रयास करें। और दिन प्रतिदिन लगातार करने की अ Read More : कपाल भाति प्राणायाम : about कपाल भाति प्राणायाम :

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