राग परिचय

नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला)

स्वर यंत्र, गले के अंदर सूजन, श्वसनीशोथ के उपचार, कंठ रोग, गले के रोग का इलाज

नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला)

कारण :-

अधिक सर्दी लगना, पानी में अधिक भींगना, अधिक देर तक गाना गाना, गले में धूल का कण जमना, धुंआ मुंह में जाना, अधिक जोर से बोलना तथा अचानक मौसम परिवर्तन के कारण यह रोग होता है।

लक्षण :-

इस रोग में स्वरयंत्र की श्लैष्मिक झिल्ली फूल जाती है और उससे लसदार श्लेष्मा निकलने लगता है। गला कुटकुटाना और जलन होना, कड़ा श्लेष्मा निकलना, कुत्ते की तरह आवाज होना, सूखी खांसी आना, आवाज खराब होना या गला बैठ जाना, बुखार होना, प्यास अधिक लगना, भूख न लगना, सांस लेने में कष्ट होना आदि इस रोग के मुख्य लक्षण है।

तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है

तानपुरे अथवा सितार

तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है और ध्वनि उत्पन्न होती है। संगीत में नियमित और स्थित कम्पन (आंदोलन) द्वारा उत्पन्न ध्वनि का उपयोग होता है, जिसे हम नाद कहते हैं। जब किसी ध्वनि की कम्पन कुछ समय तक चलती है तो उसे स्थिर आंदोलन और जब उसी ध्वनि का कंपन समान गति वाली होती है तो उसे नियमित आंदोलन कहते हैं। शोरगुल, कोलाहल आदि ध्वनियों में अनियमित और अस्थिर आंदोलन होने के कारण संगीत में इनका प्रयोग नहीं होता। सांगीतोपयोगी ध्वनि को नाद कहते हैं। नाद की मुख्य तीन विशेषताएँ हैं-

ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं

ध्वनि विशेष को नाद

ध्वनि, झरनों की झरझर, पक्षियों का कूजन किसने नहीं सुना है। प्रकृति प्रदत्त जो नाद लहरी उत्पन्न होती है, वह अनहद नाद का स्वरूप है जो कि प्रकृति की स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन जो नाद स्वर लहरी, दो वस्तुओं के परस्पर घर्षण से अथवा टकराने से पैदा होती है उसे लौकिक नाद कहते हैं।
वातावरण पर अपने नाद को बिखेरने के लिये, बाह्य हवा पर कंठ के अँदर से उत्पन्न होने वाली वजनदार हवा जब परस्पर टकराती है, उसी समय कंठ स्थित 'स्वर तंतु' (Vocal Cords) नाद पैदा करते हैं। अत: मानव प्राणी द्वारा निर्मित आवाज लौकिक है।

 

संगीत सुनने से दिमाग पर होता है ऐसा असर

संगीत सुनने से दिमाग पर होता है ऐसा असर

आधुनिक जीवनशैली में मानसिक दबाव से दिमाग पर काफी बुरा असर पड़ रहा है. इसके परिणामस्वरूप हम खुद में एकाकी महसूस कर मानसिक रोगों के गिरफ्त में आते जा रहे हैं. दिमाग को चुस्त रखने के लिए निश्चित समय पर विश्राम के साथ मनोरंजन भी मानसिक स्वस्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है. बढ़ती उम् का दबाव हो या किशोरावस्था का प्रतिबल, प्रत्येक प्रकार की चिंता को कम करके संगीत मस्तिष्क में कंपन कर शांति प्रदान करता है.

क्या प्रभाव पड़ता है संगीत का किशोरों पर?

क्या प्रभाव पड़ता है संगीत का किशोरों पर?

संगीत सुनना किसे अच्छा नहीं लगता है। आजकल हर कोई अपने फोन से गाने सुनता रहता है। संगीत सुनने से हमारा मन और दिमाग शांत और खुशहाल हो जाता है। संगीत के अनेक फायदे हैं, जैसे: खेल-कूद के समय संगीत जोश और उत्साह बढ़ाता है। मंदिर में संगीत भक्ति और श्रद्धा बढ़ाता है। औफिस और घर में संगीत बोरियत दूर करता है। मार्केट और होटल में ग्राहकों को आकर्षित करता है। यही संगीत स्वास्थ्य के विभाग में एक उपचार या थेरेपी का भी काम करता है।

 

नवयुवक और किशोर बच्चे हर तरह का संगीत सुनते हैं। लेकिन कुछ संगीत और गाने ऐसे भी होते है जो युवा बच्चों के लिए उचित नहीं होते हैं।

संगीत कितने प्रकार का होता है और उसका किशोरों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

संगीत कितने प्रकार का होता है और उसका किशोरों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

किस तरह का संगीत एक किशोर चुनता है उससे उसके व्यक्तित्व का पता चलता है। शोध कार्य से पता चला है की कई तरह के संगीत का किशोर के दिमाग पर असर पड़ता है जैसे:

माता-पिता अपने किशोर बच्चों को गानो के गलत प्रभाव से कैसे बचा सकते हैं?

माता-पिता अपने किशोर बच्चों

नीचे हमने माता-पिता के लिए कुछ सुझाव दिये हैं जिससे वो अपने किशोर बच्चों को संगीत और गानों के बुरे प्रभाव से बचा सकते हैं:

कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया

कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया

कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया - (३)
ठहर ठहर, ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे
मन भरमाये नयना बाँधे ये डगरिया - (२)
कहीं गए जो ठहर, दिन जायेगा गुज़र
गाडी हाँकन दे, हाँकन दे, कौन दिसा...

पहली बार हम निकले हैं घर से, किसी अंजाने के संग हो
अंजाना से पहचान बढ़ेगी तो महक उठेगा तोरा अंग हो
महक से तू कहीं बहक न जाना - (२)
न करना मोहे तंग हो, तंग करने का तोसे नाता है गुज़रिया - (२)
हे, ठहर ठहर, ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे, देखन दे, कौन दिसा...

लता मंगेशकर का नाम : भारतीय संगीत की आत्मा

लता मंगेशकर का नाम : भारतीय संगीत की आत्मा

लता मंगेशकर का नाम लेते ही भारतीय संगीत की आत्मा सामने आ खड़ी होती है। कल वह 75 की हो रही हैं। करीब छह दशकों से भारतीयों के दिलों पर उनका राज चल रहा है। संसार भर में उनके बेशुमार दीवाने हैं। देश के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' सहित अब तक न जाने कितने पुरस्कारों और उपाधियों से नवाजा जा चुका है उन्हें। 

रियाज़ कैसे करें 10 तरीके

सुरसाधना, खरज का रियाज, सरगम सीखना, गायकी टिप्स, गायन सीखना, हारमोनियम बजाना कैसे सीखे

रियाज़ करने की शुरुआत के लिए आप इस प्रकार से कोशिश करें -
1) संगीत सीखने का सबसे पहला पाठ और रियाज़ ओंकार . 3 महीनो तक आप रोज़ सुबह कम से कम 30 मिनट 'सा' के स्वर में ओंकार का लगातार अभ्यास करें.
2) अगर आप और समय दे सकते हैं तो ओंकार रियाज़ करने के बाद 5 मिनट आराम कर के, सरगम आरोह अवरोह का धीमी गति में 30 मिनट तक रियाज़ करें. जल्दबाजी नहीं करें.
3) सरगम का रियाज़ करते समय स्वर ठीक से लगाने का पूरा ध्यान रखें. अगर स्वर ठीक से नहीं लग रहा है तो बार बार कोशिश करें. संगीत अभ्यास में लगन की जरूरत होती है और शुरुआत में बहुत धीरज और इत्मीनान चाहिए.

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