गायकी और गले का रख-रखाव

एक गायक के लिए गला भगवान का दिया हुआ एक प्राकृतिक वाद्ययंत्र है जो बड़ी बखूबी से संगीत की ऐसी ऐसी ध्वनियों की प्रस्तुति कर सकता है जो किसी और इंसान के बनाए हुए वाद्ययंत्र के लिए संभव नहीं है. अच्छी सुरीली आवाज़ ईश्वर की दें है और इसलिए गायकी की चाह रखने वाले लोगों को, खासकर कलाकारों को अपने गले का अनिवार्य रूप से अपने गले का ध्यान रखना चाहिए. बहुत से बड़े बड़े गायक कलाकार और संगीतकार हैं जो विचारपूर्वक ध्यान रखते भी हैं. आइये जानें कि संगीत और सुर की साधना के साथ साथ गले का ध्यान कैसे रखा जाये ताकि बेहतर से बेहतर गायकी की ऊंचाईयों को छुआ जा सके.

शुरू करते हैं सबसे महत्वपूर्ण बात से - पानी। गले को अच्छे तरीके से काम करने के लिए गले का तर रहना बहुत ही जरूरी है. इसलिए नियम से दिन भर में आठ से दस गिलास पानी जरूर पिएं, चाहे प्यास लगे या नहीं. अगर आप गायन की संगीत साधना के लिए गम्भीर हैं तो पानी बराबर से पीते रहिये। पानी गायक के लिए पूरा पूरा अमृत है, वो भी लगभग बिलकुल मुफ्त का. 
अब आते हैं खाने पर. खाने-पीने में बहुत मसालेदार खाने से थोड़ा दूर रहें. तला भुना खाना भी काम ही रखें. अक्सर ऐसा देखा गया है कि खाने पीने में संयम न बरतने से पेट के एसिड का बहाव उल्टा होने लगता है, पेट से गले की तरफ. गले में ये एसिड धीरे धीरे जम के जलन और खांसी की समस्या खड़ी कर देता है जो कि गायक के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है. इसलिए, अगर एक दम ही सादे खाने पर न आएं मगर खूब मसालेदार और चटपटे खाने को भी रोज का हिसाब न बनाए, संयम रखें। इससे गले के रख रखाव में बड़ी मदद होगी. वैसे तो अगर आपको चाय की आदत है तो छोड़ना मुश्किल ही है लेकिन अगर संभव है तो चाय की जगह गुनगुने पानी में नीम्बूरस और शहद मिलकर लें, चाहें तो दो चार पुदीने की पत्तियां डाल लें. दो तीन महीने कर के देखिये, फायदा खुद महसूस होने लगेगा।

कॉफ़ी और अल्कोहल ड्रिंक्स - ये दोनों आपके गले के पक्के (पक्के मतलब वाकई पक्के) दुश्मन हैं. इसकी वजह है कि कॉफी और अल्कोहल ड्रिंक्स ये दोनों ही आपके शरीर से पानी निकालते हैं और गले में सूखापन लाते हैं. इसीलिए अगर आप अगर अपनी संगीत साधना को लेकर गम्भीर हैं तो कॉफी और अल्कोहल ड्रिंक्स से कोसों दूर रहें.

अगर आप को mouthwash / gargle (गरारा/कुल्ला) करने की सलाह दी गयी है या फिर आप गले को स्वस्थ रखने के लिए करना चाहते हैं तो जहाँ तक संभव हो अल्कोहल वाले या फिर chemical वाले mouthwash का प्रयोग न करें. chemical दवाओं का प्रयोग तो बिलकुल भी न करें. इससे गले की सतह प्रभावित होती है. करना ही है तो पानी गुनगुना कर के, थोड़ा नमक मिला कर फिर कुल्ला/ गरारा करें, इससे गले की सफाई तो होगी ही, गले को कोई नुकसान भी नहीं होगा.

गले की उत्तम प्रकृति को बनाए रखने के लिए जरूरी है की उसे धुएं से बचाया जाये. धूम्रपान करना या फिर सिगरेट / बीड़ी के धुएं के आसपास रहना, दोनों ही गले की आवाज़ बनाने वाली झिल्ली (vocal folds) को खुरदरा बना देता हैं, आवाज़ की रेंज को घटाता है और सबसे जरूरी बात ये कि धूम्रपान से होने वाला नुकसान स्थायी हो जाता है जिसे सुधारना लगभग असम्भव ही होता है.

आम आदमी के गला एक बस सामान्य सा शरीर का हिस्सा है जो उन्हें उनकी पहचान वाली आवाज़ देता है. रोजाना की जिंदगी में आम आदमी का गले पर कोई खास ध्यान नहीं जाता। लेकिन गायकी के कलाकार के लिए गला उनकी कला का सर्वोच्च और सबसे महत्वपूर्ण साधन है, यन्त्र है. इसीलिए गायक के लिए आवश्यक है कि रोजमर्रा की बातों में, रियाज़ करते समय और संगीत प्रस्तुतियों में गले पर बहुत जोर न पड़े. आम बात चीत में बहुत ज्यादा चिल्लाना और तेज आवाज़ में बात करना धीरे धीरे गले की पेशियों को सुरों की नाजुक महीन उतार चढाव को सँभालने में अक्षम करने लगता है. इसी तरीके से, रियाज़ करते समय इस बात का ध्यान रखें कि गले पर बहुत जोर न पड़े. जब गाने का अभ्यास करते करते गले में थोड़ा दर्द महसूस हो या फिर तनाव महसूस हो तो गले को आराम दें, रियाज़ से ब्रेक लें और जब तक गला फिर से आराम के साथ दुबारा मेहनत के लिए तैयार न हो, तब तक दुबारा अभ्यास न करें. गले को एक रबरबैंड की तरह समझें. अपनी हद समझें और जरूरत से ज्यादा न खींचे नहीं तो स्थायी रूप से नुक्सान हो सकता है.

गायकों के साथ एक और बात देखी गयी है. गले में थोड़ा खराश होने से वो बार बार गले को जोर से खरखराहट के साथ साफ़ करते रहते हैं. ये अच्छी आदत नहीं है. ऐसा करने से गले में और ज्यादा उत्तेजना पैदा होती है और साथ ही गला प्राकृतिक रूप से और ज्यादा कफ पैदा करता है. ख़राश को साफ़ करने के लिए सबसे अच्छा तरीका है पूरी तरीके से खाँसना। जब भी गले में ख़राश हो तो बार बार गला साफ करने की बजाय थोड़ा खांस लें. अब बात तो ये छोटी सी ही है लेकिन जो संगीत साधना में महारथ रखते हैं, वो जानते हैं कि ये कितनी महत्वपूर्ण हैं.

नींद - आज के ज़माने में बहुत कम ऐसी खुशकिस्मत हैं जिन्हे अच्छी पूरी नींद का आशीर्वाद मिला हैं. वरना तो भागम-भाग में आधी अधूरी नींद और लगातार शरीर में बनी हुई थकावट एक आम बात है. इसलिए गायक को जब भी मौका मिले, भरपूर आराम करें, पूरे रात भर की नींद लें और जितना हो सके थकावट दूर करें. ज्यादातर लोगों को नींद के महत्त्व के बारे में कम ही पता है. जब हम सोते हैं तो यही समय होता है जब भगवान की बनायी हुई इस मशीन की मरम्मत होती है. अगर हम सात घंटे से कम की नींद लेते हैं तो शरीर की मरम्मत ठीक तरह से नहीं होती है और धीरे धीरे इसका गायकी की क्षमता, एकाग्रता (कन्सेंट्रेसन) और गले की रेंज पर भारी असर होने लगता है. अब इससे ज्यादा नींद की अहमियत के बारे में और क्या कहा जा सकता है. 
अब इस कड़ी की आखिरी बात - बड़े बड़े शास्त्रीय संगीत के गायकों का एक बड़ा राज़ ये है कि वो किसी भी रियाज़ या संगीत प्रस्तुति के पहले अपने गले को 'वार्म अप' करते हैं. वार्म अप का मतलब थोड़ा सांसों की एक्सरसाइज (प्राणायाम), थोड़ी देर नीचे सुरों पर गुनगुनाना, थोड़ा सरगम का रियाज़ और फिर उसके बाद ही ऊंची रेंज या बुलंद आवाज़ वाली गायकी. तो इसलिए जब भी सुर साधना शुरू करें तो थोड़ा गले का वार्म अप कर लें.

उम्मीद है कि इस नयी जानकारी से गायकी की रूचि रखने वाले सभी संगीत प्रेमियों को सहायता मिलेगी. धन्यवाद.

 

 

 

Vote: 
Average: 5 (1 vote)

राग परिचय

राग परिचय
Total views Views today
सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि 2,801 35
मध्यमग्राम-तान-बोधिनी 19 17
शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व 1,152 12
रागों के प्रकार 824 10
रागों मे जातियां 1,233 10
रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग 1,633 9
सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है 761 9
राग बहार 366 9
राग रागिनी पद्धति 987 9
वादी - संवादी 476 8
आविर्भाव-तिरोभाव 466 7
रागो पर आधारित फ़िल्मी गीत 239 7
राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- 688 7
राग दरबारी कान्हड़ा 659 7
शुद्ध स्वर 576 6
संगीत संबंधी कुछ परिभाषा 1,146 5
राग 'भैरव':रूह को जगाता भोर का राग 451 5
थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या 918 5
राग यमन (कल्याण) 485 5
सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान 702 5
स्वर (संगीत) 446 4
स्वर मालिका तथा लिपि 315 4
स्वर मालिका तथा लिपि 663 4
राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान 183 4
स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ? 217 4
राग मुलतानी 283 4
सुर की समझ गायकी के लिए बहुत जरूरी है. 371 4
राग भूपाली 600 4
षड्जग्राम-तान बोधिनी 26 4
रागांग राग वर्गीकरण से अभिप्राय 155 3
राग- गौड़ सारंग 134 2
कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है- 222 2
राग ललित! 591 2
ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है 429 1
नाद का शाब्दिक अर्थ है -१. शब्द, ध्वनि, आवाज। 334 0
सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। 209 0
शास्त्रीय नृत्य
Total views Views today
भारतीय नृत्य कला 490 18
भरत नाट्यम - तमिलनाडु 144 0
माइक्रोफोन का कार्य 171 0
नाट्य शास्त्रानुसार नृतः, नृत्य, और नाट्य में तीन पक्ष हैं – 199 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत
Total views Views today
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 575 12
अलंकार- भारतीय शास्त्रीय संगीत 1,340 12
संगीत का विकास और प्रसार 612 9
हारमोनियम के गुण और दोष 1,435 9
संगीत शास्त्र परिचय 1,698 9
भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी 618 7
हिन्दुस्तानी संगीत प्रणाली में प्रचलित गायन के प्रकार 496 6
ख्याल गायकी के घरानेएक दृष्टि : भाग्यश्री सहस्रबुद्धे 905 5
नाट्य-शास्त्र संगीत कला का प्राचीन विस्तरित ग्रंथ है 273 4
भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है 447 4
तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है 255 3
निबद्ध- अनिबद्ध गान: व्याख्या, स्वरूप, भेद 548 3
निबद्ध- अनिबद्ध गान: 234 3
गायकी के 8 अंग (अष्टांग गायकी) 185 2
हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है 425 2
नाद-साधन भी मोक्ष प्राप्ति का ऐक मार्ग है। 221 2
संस्कृत में थाट का अर्थ है मेल 198 2
भारतीय संगीत 282 2
स्वरों का महत्त्व क्या है? 248 2
षडजांतर | शास्त्रीय संगीत के जाति लक्षण क्यां है 365 2
जानिए भारतीय संगीत के बारे में 607 2
रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। 38 1
राग भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा हैं। 120 1
रागों का सृजन 269 1
'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है 322 1
भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है भारतीय शास्त्रीय संगीत। 84 0
ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं 250 0
संगीत से सम्बन्धित 'स्वर' के बारे में है 313 0
संगीत और हमारा जीवन
Total views Views today
कैसे रखें आवाज के जादू को बरकरार 573 12
भारतीय संगीत में आध्यात्मिकता स्रोत 484 7
पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य 364 5
रियाज़ कैसे करें 10 तरीके 347 5
गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका 434 5
क्या आप भी बनना चाहेंगे टीवी एंकर 259 4
नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला) 240 4
रागों में छुपा है स्वास्थ्य का राज 364 4
संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है 113 3
माइक्रोफोन के प्रकार : 331 3
गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त 277 3
नवजात शिशुओं पर संगीत का प्रभाव 478 3
शास्त्रीय संगीत और योग 406 3
संगीत द्वारा रोग-चिकित्सा 765 3
कैसे जानें की आप अच्छा गाना गा सकते हैं 286 3
संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव 475 3
खर्ज और ओंकार का अभ्यास क्या है ? 346 2
संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा 263 2
गायक बनने के उपाय और कैसे करें रियाज़ 572 2
संगीत का वैज्ञानिक प्रभाव 216 2
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 194 1
गले में सूजन, पीड़ा, खुश्की 271 1
कंठध्वनि 181 1
गायकी और गले का रख-रखाव 216 1
Sounds magic ध्वनियों का इंद्रजाल 323 1
अबुल फजल ने 22 नाड़ियों में सात स्वरों की व्याप्ति बताई जो इस प्रकार 106 1
भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज 251 1
गुरु की परिभाषा 693 1
भारतीय कलाएँ 268 1
चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख 492 1
गायक कलाकारों और बच्चों के लिए विशेष 368 1
टांसिल होने पर 247 0
माइक्रोफोन की हानि : 196 0
नई स्वरयंत्र की सूजन 202 0
वैदिक विज्ञान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत'रागों' में चिकित्सा प्रभाव होने का दावा किया है। 341 0
हिंदुस्तानी संगीत के घराने
Total views Views today
भारत में संगीत शिक्षण 826 7
गुरु-शिष्य परम्परा 476 6
संगीत घराने और उनकी विशेषताएं 1,457 4
कैराना का किराना घराने से नाता 194 3
वीडियो
Total views Views today
राग बागेश्री | पंडित जसराज जी 315 5
राग भीमपलासी पर आधारित गीत 311 5
राग यमन 187 4
ब्रेथलेसऔर अरुनिकिरानी 171 1
द ब्यूटी ऑफ राग बिलासखानी तोड़ी 195 1
नुसरत फतेह के द्वारा राग कलावती 252 1
मोरा सइयां 160 1
कर्ण स्वर 202 1
वंदेमातरम् 125 0
स्वर परिचय
Total views Views today
संगीत के स्वर 131 4
स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय 97 4
सामवेद व गान्धर्ववेद में स्वर 27 4
संगीत रत्नाकर के अनुसार स्वरों के कुल, जाति 22 4
स्वर गान्धार का शास्त्रीय परिचय 78 2
स्वर पञ्चम का शास्त्रीय परिचय 49 2
स्वर और उनसे सम्बद्ध श्रुतियां 40 2
स्वर ऋषभ का शास्त्रीय परिचय 70 1
स्वर मध्यम का शास्त्रीय परिचय 60 1
स्वर धैवत का शास्त्रीय परिचय 29 0
स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय 19 0
हमारे पूज्यनीय गुरु
Total views Views today
तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय 296 2
बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत 87 2
जब बेगम अख्तर ने कहा, 'बिस्मिल्लाह करो अमजद' 452 2
रचन: श्री वल्लभाचार्य 311 2
ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, 282 2
अकबर और तानसेन 369 1
ठुमरी गायिका गिरिजा देवी हासिल कर चुकी हैं कई पुरस्कार और सम्मान 90 0
उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां 300 0
बैजू बावरा 300 0
सिलेबस
Total views Views today
सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 179 1
सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 162 0
सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 142 0
सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 116 0