गौरी (भैरव अंग)

थाट: 

यह राग दया और इश्वर भक्ति कि भावना से ओत प्रोत है। इसलिये इस राग मे भक्ति रस और विरह रस कि बन्दिशें अधिक सुनाई देती हैं। इस राग मे भैरव अंग है, पर ये भैरव राग जितना गम्भीर नही है। यह स्वर संगतियाँ इस राग को राग भैरव से भिन्न करती हैं - सा रे१ ग म ग ; रे१ ग रे१ म ग रे१ सा रे१ ,नि सा ; ग म प ध१ प ; प ध१ नि सा' ; ध१ नि ध१ सा' नि ; ध१ प म प म ध१ प म ; ग रे१ ; सा रे१ ,नि सा

यह स्वर संगतियाँ राग गौरी का रूप दर्शाती हैं - ग म प ध१ प ; म प म ध१ प म ग ; म ग म ; प प म ग रे१ ग ; रे१ ग रे१ म ग रे१ सा ,नि ; सा रे१ ग म ग;

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