टप्पा गायन : एक परिचय

टप्पा गायन

टप्पा शब्द हिंदी भाषा का शब्द है यह भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक गायन शैली है यह गायन शैली अत्यंत चंचल प्रकार की है  इसमें केवल स्थाई और अंतरा दो ही भाग होते हैं जो द्रुपद और खयाल की अपेक्षा अधिक संक्षिप्त होते हैं । इस शैली में करुण रस श्रृंगार रस की प्रधानता रहती है। परंतु रविंद्र संगीत में टप्पा गीत अधिकतर पूजा से संबंधित होते हैं। इसमें श्रंगार एक और प्रेम रस का अभाव रहता है ऐसा माना जाता है मियां छोरी ने बेसरा गीती के आधार पर इस का विकास किया था इस शैली का विकास अवध के दरबार में हुआ परंतु इसका उद्गम पंजाब के पहाड़ी क्षेत्र में हुआ ऐसा हम इसलिए भी कह सकते हैं क्योंकि अधिकतर शब्द इसमें पंजाबी भाषा के ही पाए जाते हैं इस गायकी के साथ टप्पा ताल बजती है जो 16 मात्रा कि  होती है इसमें ताल को विश्राम नहीं दिया जाता केवल तान और बोल तान का ही प्रयोग किया जाता है इसमें आलाप नहीं किया जाता इसमें खटका मुरकी कण आदि का काफी मात्रा में प्रयोग किया जाता है यह अधिकतर  काफी , भैरवी , झिंझोटी, बरवा,माझ में पाए जाते हैं।

 

टप्पों को एकाएक प्रस्तुत करने हेतु नियमानुसार पहले आलाप को ठुमरी अंग में गाया जाता है तथा उसके पश्चात तेज़ी से असमान लयबद्ध लहज़े में बुने शब्दों के उपयोग से तानायत की ओर बढ़ा जाता है|

 

सुर-संगम के सभी श्रोता-पाठकों को सुमित चक्रवर्ती का स्नेह भरा नमस्कार! तो कहिए कैसे बीते गर्मियों के दिन? जैसे किसी किसी मुसाफ़िर का मंज़िल पाने पर संघर्ष समाप्त हो जाता है, मानो ठीक उसी प्रकार गर्मियों के ये झुलसा देने वाले दिन भी अब बीत चुके हैं| और आ गयी है वर्षा ऋतु सबके जीवन में हर्ष की नई फुहार लिए| तो हम ने भी सोचा की क्यों न इस बार के अंक में कुछ अलग प्रकार का संगीत चर्चा में लाया जाए| आज का सुर-संगम आधारित है पंजाब व सिंध प्रांतों की प्रसिद्ध उप-शास्त्रीय गायन शैली 'टप्पा' पर|

 

टप्पा भारत की प्रमुख पारंपरिक संगीत शैलियों में से एक है| यह माना जाता है की इस शैली की उत्पत्ति पंजाब व सिंध प्रांतों के ऊँट चलाने वालों द्वारा की गई थी| इन गीतों में मूल रूप से हीर और रांझा के प्रेम व विरह प्रसंगो को दर्शाया जाता है| खमाज, भैरवी, काफ़ी, तिलांग, झिन्झोटि, सिंधुरा और देश जैसे रागों तथा पंजाबी, पश्तो जैसे तालों द्वारा प्रेम-प्रसंग अथवा करुणा भाव व्यक्त किए जाते हैं| टप्पा की विशेषता हैं इसमें लिए जाने वाले ऊर्जावान तान और असमान लयबद्ध लहज़े| टप्पा गायन को एक लोक-शैली से ऊपर उठाकर एक शास्त्रीय शैली का रूप दिया था मियाँ ग़ुलाम नबी शोरी नें जो अवध के नवाब असफ़-उद्-दौलह के दरबारी गायक थे| इस शैली के बारे में और जानने से पहले क्यों न एक अल्प-विराम ले कर प्रसिद्ध टप्पा गायिका विदुषी मालिनी राजुर्कर द्वारा राग भैरवी में प्रस्तुत इस टप्पे का आनंद लें!

 

 

टप्पा गायन शैली में ठेठ 'टप्पे के तान' प्रयोग में लाए जाते हैं| पंजाबी ताल, जिसे 'टप्पे का ठेका' भी कहा जाता है, में ताल के प्रत्येक चक्र में तान के खिंचाव और रिहाई का प्रयोग आवश्यक होता है| टप्पों को एकाएक प्रस्तुत करने हेतु नियमानुसार पहले आलाप को ठुमरी अंग में गाया जाता है तथा उसके पश्चात तेज़ी से असमान लयबद्ध लहज़े में बुने शब्दों के उपयोग से तानायत की ओर बढ़ा जाता है| टप्पा गायकी में जमजमा, गीतकारी, खटका, मुड़की व हरकत जैसे कई अलंकार प्रयोग में लाए जाते हैं| यह शैली मूलतः ग्वालियर घराने तथा बनारस घराने की विशेषता है| दोनो घरानों के टपपों में ताल और आशुरचना की शैली का उपयोग जैसे कुछ संरचनात्मक मतभेद हैं, लेकिन मौलिक सिद्धांत एक जैसे ही हैं| आइए सुनते हैं ग्वालियर घराने की प्रसिद्ध गायिका श्रीमती शाश्वती मंडल पाल द्वारा राग खमाज में गाए इस टप्पे को|

 

 

आज के दौर में टप्पा प्रदर्शन के परिदृश्य में जब कलाकारों की बात आती है तो निस्संदेह सबसे शानदार माना जाता है विदुषी मालिनी राजुर्कर को| ७० के दशक से इन्होंने इस शैली को जनप्रिय बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है| अपने स्पष्ट व उज्ज्वल तानों से न कावेल इन्होंने कई उत्कृष्ट प्रस्तुतियां दी हैं बल्कि टपपों में मूर्छना जैसी तकनीकों का प्रयोग करा इस शैली को एक नया रूप दिया है| इनके अलावा ग्वालियर घराने से आरती अंकालिकर, आशा खादिलकर, शाश्वती मंडल पाल जैसी गायिकाओं नें इस गायन शैली को लोकप्रिय किया| बनारस घराने से बड़े रामदासजी, सिद्धेश्वरी देवी, गिरिजा देवी, पंडित गणेश प्रसाद मिश्र तथा राजन व साजन मिश्र जैसे दिग्गजों ने भी इस शैली में उल्लेखनीय प्रस्तुतियाँ दी हैं| आइए आज की चर्चा को समाप्त करते हुए सुनें पंडित गणेश प्रसाद मिश्र द्वारा राग काफ़ी में गाए इस टप्पे को|

 

-------------------

पंजाब की धरती पर विकसित संगीत शैली ‘टप्पा’ भी एक श्रृंगाररस प्रधान गायकी है। इस शैली में खयाल और ठुमरी, दोनों की विशेषताएँ उपस्थित रहती है। टप्पा गायन के लिए खयाल और ठुमरी, दोनों शैलियों का प्रशिक्षण और अभ्यास आवश्यक है। इसका विकास चूँकि पंजाब और सिन्ध के पहाड़ी क्षेत्रों में हुआ है, अतः अधिकतर टप्पा पंजाबी भाषा में मिलता है। सिन्ध क्षेत्र में ‘टप्पे’ नामक एक लोकगीत शैली का प्रचलन रहा है। यह लोकगीत आज भी पंजाब में सुनने में आता है। रागदारी संगीत के अन्तर्गत गाया जाने वाला टप्पा, ‘टप्पे’ लोकगीत से काफी भिन्न होता है। कुछ विद्वानों के मतानुसार पंजाब के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में ऊँटों पर अपना व्यापारिक सामान ढोने वाले सौदागरों द्वारा जो लोकगीत गाया जाता था, उनमें रागों का रंग भर कर टप्पा गायन शैली का विकास हुआ। इसे विकसित करने का श्रेय शोरी मियाँ को दिया जाता है। शोरी मियाँ का वास्तविक नाम गुलाम नबी था और ये सुप्रसिद्ध खयाल गायक गुलाम रसूल के पुत्र थे। शोरी मियाँ अठारहवीं शताब्दी में लखनऊ के नवाब आसफुद्दौला के समकालीन थे। उनका कण्ठ खयाल गायकी के अनुकूल नहीं थी, इसीलिए उन्होने अपने गले के अनुकूल टप्पा गायकी को विकसित किया। काफी समय तक पंजाब प्रान्त में रहने के कारण पंजाबी भाषा और उस क्षेत्र के लोक संगीत का उन्हें ज्ञान हो गया था। शोरी मियाँ के पंजाबी भाषा में रचे अनेक टप्पा गीत आज भी गाये जाते हैं। शोरी मियाँ के पंजाब से लखनऊ आने के बाद टप्पा गायन का प्रचार-प्रसार लखनऊ संगीत जगत में भी हुआ। आगे चल कर पूरे उत्तर भारत में टप्पा गाया जाने लगा। पंजाब और लखनऊ के अलावा बनारस और ग्वालियर के प्रमुख खयाल गायकों ने टप्पा को अपना लिया।

 

अब हम प्रस्तुत करते हैं, ग्वालियर परम्परा में टप्पा गायन का एक उदाहरण, देश की जानी-मानी गायिका विदुषी मालिनी राजुरकर के स्वरों में। 1941 में जन्मीं मालिनी जी का बचपन राजस्थान के अजमेर में बीता और वहीं उनकी शिक्षा-दीक्षा भी सम्पन्न हुई। आरम्भ से ही दो विषयों- गणित और संगीत, से उन्हें गहरा लगाव था। उन्होने गणित विषय से स्नातक की पढ़ाई की और अजमेर के सावित्री बालिका विद्यालय में तीन वर्षों तक गणित विषय पढ़ाया भी। इसके साथ ही अजमेर के संगीत महाविद्यालय से गायन में निपुण स्तर तक शिक्षा ग्रहण की। सुप्रसिद्ध गुरु पण्डित गोविन्दराव राजुरकर और उनके भतीजे बसन्तराव राजुरकर से उन्हें गुरु-शिष्य परम्परा में संगीत की शिक्षा प्राप्त हुई। बाद में मालिनी जी ने बसन्तराव जी से विवाह कर लिया। मालिनी जी को देश का सर्वोच्च संगीत-सम्मान, ‘तानसेन सम्मान’ से नवाजा जा चुका है। खयाल के साथ-साथ मालिनी जी टप्पा, सुगम और लोक संगीत के गायन में भी कुशल हैं। लीजिए, उनके मधुर स्वर में सुनिए, राग भैरवी और अद्धा त्रिताल में निबद्ध एक पारम्परिक टप्पा।

शोरी मियाँ के प्रमुख शिष्य मियाँ गम्मू और ताराचन्द्र थे। इन्होने भी टप्पा गायकी का भरपूर प्रचार किया। मियाँ गम्मू के पुत्र शादी खाँ भी टप्पा गायन में दक्ष थे और तत्कालीन काशी नरेश के दरबारी गवैये थे। लखनऊ, बनारस और ग्वालियर के ख्याल गायन पर भी टप्पा का प्रभाव पड़ा। नवाब वाजिद अली खाँ के समय में तो टप्पा अंग से खयाल गाना, गायक की एक विशेष योग्यता मानी जाती थी। टप्पा अंग से खयाल गायकी को लोकप्रियता मिलने के कारण एक नई गायन शैली का चलन हुआ, जिसे ‘ठप्प खयाल’ कहा जाने लगा। टप्पा की प्रकृति चंचल, लच्छेदार ताने, मुर्की, खटका आदि के प्रयोग के कारण खयाल और ठुमरी की गम्भीरता से दूर है। टप्पा गायन में शुरू से ही छोटी-छोटी दानेदार तानों से सजाया जाता है। स्वरों में किसी प्रकार की रुकावट नहीं होती। बोल आलाप का प्रयोग नहीं किया जाता। खयाल की तरह टप्पा गायन के घराने नहीं होते, किन्तु विभिन्न स्थानों पर विकसित टप्पा गायकी की प्रस्तुतियों में थोड़ा अन्तर मिलता है। ग्वालियर में प्रचलित टप्पा गायकी में खयाल का प्रभाव स्पष्ट नज़र आता है। इसी प्रकार बनारस में गेय टप्पा पर ठुमरी का प्रभाव परिलक्षित होता है। टप्पा का साहित्य श्रृंगाररस प्रधान होता है और ठुमरी की तरह अधिकतर खमाज, भैरवी, काफी, झिंझोटी, तिलंग, पीलू, बरवा आदि रागों में गायी जाती है। इसी प्रकार अधिकतर टप्पा पंजाबी, अद्धा त्रिताल, सितारखानी जैसे सोलह मात्रा के तालों में निबद्ध मिलता है। अब हम आपको रामपुर सहसवान घराने के सुविख्यात गायक उस्ताद मुश्ताक हुसेन खाँ का गाया राग काफी का एक टप्पा सुनवाते हैं।

Vote: 
No votes yet
Rag content type: 

राग परिचय

राग परिचय
Total views Views today
सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि 17,178 27
थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या 6,175 18
रागों के प्रकार 7,231 11
राग यमन (कल्याण) 3,751 10
शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व 4,354 10
सुर की समझ गायकी के लिए बहुत जरूरी है. 3,934 9
राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- 5,995 7
आविर्भाव-तिरोभाव 4,405 7
राग रागिनी पद्धति 3,814 6
राग मुलतानी 1,501 5
रागों मे जातियां 3,980 5
सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। 1,372 5
राग दरबारी कान्हड़ा 3,087 5
रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग 6,678 5
राग भूपाली 4,148 4
स्वर मालिका तथा लिपि 3,886 4
रागो पर आधारित फ़िल्मी गीत 4,004 4
सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है 2,751 3
शुद्ध स्वर 3,654 3
स्वर (संगीत) 3,248 3
राग 'भैरव':रूह को जगाता भोर का राग 2,405 3
रागों का विभाजन 1,109 2
राग बहार 2,387 2
मध्यमग्राम-तान-बोधिनी 532 2
स्वर मालिका तथा लिपि 2,895 2
नाद का शाब्दिक अर्थ है -१. शब्द, ध्वनि, आवाज। 1,953 2
संगीत में बड़ी ताक़त है - सलीम-सुलेमान 122 1
षड्जग्राम-तान बोधिनी 511 1
राग- गौड़ सारंग 1,083 1
कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है- 1,874 1
राग ललित! 3,226 1
वादी - संवादी 4,095 1
राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान 1,727 1
टप्पा गायन : एक परिचय 1,563 1
‘राग’ शब्द संस्कृत की धातु 'रंज' से बना है 595 1
क्या हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में भगवान शंकर को समर्पित भी है कोई राग? 147 1
कौन सा था वो शास्त्रीय राग जिसने दिलाई थी केएल सहगल को बड़ी पहचान 56 0
सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान 3,024 0
रागांग राग वर्गीकरण से अभिप्राय 1,462 0
संगीत संबंधी कुछ परिभाषा 4,654 0
स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ? 1,855 0
ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है 1,944 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत
Total views Views today
भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी 3,586 9
हारमोनियम के गुण और दोष 5,906 8
अलंकार- भारतीय शास्त्रीय संगीत 5,665 5
संगीत शास्त्र परिचय 5,951 5
रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। 1,947 4
निबद्ध- अनिबद्ध गान: व्याख्या, स्वरूप, भेद 3,398 3
नाट्य-शास्त्र संगीत कला का प्राचीन विस्तरित ग्रंथ है 1,798 2
भारतीय संगीत 1,104 2
राग की तुलना में भाव सौंदर्य को अधिक महत्वपूर्ण ठुमरी होती है। 39 2
स्वरों का महत्त्व क्या है? 1,188 1
संगीत से सम्बन्धित 'स्वर' के बारे में है 2,412 1
'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है 1,356 1
जानिए भारतीय संगीत के बारे में 2,487 1
गायकी के 8 अंग (अष्टांग गायकी) 1,368 1
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 2,675 1
भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है भारतीय शास्त्रीय संगीत। 763 1
राग भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा हैं। 1,087 0
रागों का सृजन 1,018 0
निबद्ध- अनिबद्ध गान: 809 0
षडजांतर | शास्त्रीय संगीत के जाति लक्षण क्यां है 1,623 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है 2,091 0
ख्याल गायकी के घरानेएक दृष्टि : भाग्यश्री सहस्रबुद्धे 2,532 0
तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है 2,221 0
नाद-साधन भी मोक्ष प्राप्ति का ऐक मार्ग है। 778 0
हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है 1,837 0
संस्कृत में थाट का अर्थ है मेल 747 0
संगीत का विकास और प्रसार 2,552 0
हिन्दुस्तानी संगीत प्रणाली में प्रचलित गायन के प्रकार 2,470 0
ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं 1,540 0
संगीत और हमारा जीवन
Total views Views today
एक हज़ार साल तक बजने वाली धुन 193 7
रियाज़ कैसे करें 10 तरीके 3,974 5
गुरु की परिभाषा 5,244 4
संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है 2,331 4
वैदिक विज्ञान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत'रागों' में चिकित्सा प्रभाव होने का दावा किया है। 1,536 4
संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव 2,363 3
पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य 2,091 3
भारतीय कलाएँ 880 2
कैसे रखें आवाज के जादू को बरकरार 2,077 2
नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला) 1,295 2
गायक बनने के उपाय और कैसे करें रियाज़ 3,724 2
Sounds magic ध्वनियों का इंद्रजाल 1,235 2
नवजात शिशुओं पर संगीत का प्रभाव 1,712 1
शास्त्रीय संगीत और योग 1,592 1
कैसे जानें की आप अच्छा गाना गा सकते हैं 1,295 1
चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख 2,409 1
जानिए कैसे संगीत से दिमाग़ तेज होता है | 189 1
गायक कलाकारों और बच्चों के लिए विशेष 1,056 1
गले में सूजन, पीड़ा, खुश्की 1,435 1
कंठध्वनि 1,197 1
माइक्रोफोन के प्रकार : 1,817 1
संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा 1,240 1
नई स्वरयंत्र की सूजन 1,289 1
भारतीय संगीत में आध्यात्मिकता स्रोत 1,734 1
आइआइटी कानपुर ने भी माना राग दरबारी सुनने से तेज होता है दिमाग, दूर कर सकते रोग 458 1
माता-पिता अपने किशोर बच्चों को गानो के गलत प्रभाव से कैसे बचा सकते हैं? 333 0
संगीत द्वारा रोग-चिकित्सा 2,520 0
संगीत कितने प्रकार का होता है और उसका किशोरों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है? 458 0
क्या प्रभाव पड़ता है संगीत का किशोरों पर? 317 0
संगीत सुनने से दिमाग पर होता है ऐसा असर 425 0
गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका 3,086 0
माइकल जैक्सन को श्रद्धांजलि 77 0
टांसिल होने पर 956 0
खर्ज और ओंकार का अभ्यास क्या है ? 1,758 0
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 611 0
माइक्रोफोन की हानि : 752 0
क्या आप भी बनना चाहेंगे टीवी एंकर 1,124 0
गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त 961 0
अल्कोहल ड्रिंक्स - ये दोनों आपके गले के पक्के (पक्के मतलब वाकई पक्के) दुश्मन हैं 386 0
गायकी और गले का रख-रखाव 1,368 0
रागों में छुपा है स्वास्थ्य का राज 1,279 0
अबुल फजल ने 22 नाड़ियों में सात स्वरों की व्याप्ति बताई जो इस प्रकार 620 0
संगीत का वैज्ञानिक प्रभाव 1,853 0
भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज 1,311 0
हिंदुस्तानी संगीत के घराने
Total views Views today
संगीत घराने और उनकी विशेषताएं 7,080 6
भारत में संगीत शिक्षण 2,595 3
रामपुर सहसवां घराना भी है गायकी का मशहूर घराना 395 1
गुरु-शिष्य परम्परा 2,213 1
कैराना का किराना घराने से नाता 666 0
शास्त्रीय नृत्य
Total views Views today
शास्त्रीय संगीत क्या है 983 6
राग क्या हैं 1,223 3
कर्नाटक संगीत 846 3
लता मंगेशकर का नाम : भारतीय संगीत की आत्मा 364 2
नाट्य शास्त्रानुसार नृतः, नृत्य, और नाट्य में तीन पक्ष हैं – 1,675 2
सबसे पुराना माना जाता है ग्वालियर घराना 625 1
जयपुर- अतरौली घराने की देन हैं एक से बढ़कर एक कलाकार 385 1
भरत नाट्यम - तमिलनाडु 681 1
माइक्रोफोन का कार्य 1,151 1
रागदारी: शास्त्रीय संगीत में घरानों का मतलब 459 1
बेहद लोकप्रिय है शास्त्रीय गायकी का किराना घराना 373 0
आगरा का भी है अपना शास्त्रीय घराना 324 0
मेवाती घराने की पहचान हैं पंडित जसराज 348 0
भारतीय नृत्य कला 2,704 0
काशी की गिरिजा 302 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत का आधार: 390 0
लोक कला की ध्वजवाहिका 308 0
लोक और शास्त्र के अन्तरालाप की देवी 283 0
क्या अलग था गिरिजा देवी की गायकी में 459 0
राग भीमपलास और भीमपलास पर आधारित गीत 627 0
कर्नाटक गायन शैली के प्रमुख रूप 570 0
वेद में एक शब्द है समानिवोआकुति 386 0
पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी 406 0
ठुमरी का नवनिर्माण 306 0
वीडियो
Total views Views today
राग भीमपलासी पर आधारित गीत 3,805 5
मोरा सइयां 596 1
कर्ण स्वर 707 1
राग यमन 867 0
कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया 570 0
वंदेमातरम् 552 0
ब्रेथलेसऔर अरुनिकिरानी 568 0
राग बागेश्री | पंडित जसराज जी 1,571 0
द ब्यूटी ऑफ राग बिलासखानी तोड़ी 957 0
नुसरत फतेह के द्वारा राग कलावती 794 0
हमारे पूज्यनीय गुरु
Total views Views today
उस्ताद बड़े गुलाम अली खान वाला पटियाला घराना 525 4
संगीत के लिए सब छोड़ा : सोनू निगम 106 3
बैजू बावरा 1,360 2
रचन: श्री वल्लभाचार्य 1,746 2
केसरबाई केरकर: पसंदीदा शास्त्रीय गायिका की कहानी 98 1
अकबर और तानसेन 1,437 1
ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, 1,469 1
'संगीत के माध्यम से सेवा करता रहूंगा' 81 1
शास्त्रीय गायिका गंगूबाई 69 1
पण्डित अजॉय चक्रबर्ती 363 1
फकीर हरिदास और तानसेन के संगीत में क्या अंतर है? 369 0
तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय 1,565 0
बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत 602 0
ठुमरी गायिका गिरिजा देवी हासिल कर चुकी हैं कई पुरस्कार और सम्मान 524 0
जब बेगम अख्तर ने कहा, 'बिस्मिल्लाह करो अमजद' 1,107 0
उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां 1,378 0
अमवा महुअवा के झूमे डरिया 623 0
बड़े गुलाम अली खान: जिन्होंने गाने के लिए रफी और लता से 50 गुना फीस ली 384 0
स्वर परिचय
Total views Views today
स्वर और उनसे सम्बद्ध श्रुतियां 862 3
स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय 603 1
सामवेद व गान्धर्ववेद में स्वर 597 1
संगीत रत्नाकर के अनुसार स्वरों के कुल, जाति 1,240 1
स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय 707 1
स्वर मध्यम का शास्त्रीय परिचय 515 1
स्वर धैवत का शास्त्रीय परिचय 628 0
संगीत के स्वर 1,633 0
स्वर ऋषभ का शास्त्रीय परिचय 757 0
स्वर गान्धार का शास्त्रीय परिचय 582 0
स्वर पञ्चम का शास्त्रीय परिचय 488 0
समाचार
Total views Views today
जब हॉलैंड के राजमहल में गूंजे थे पंडित हरिप्रसाद चौरसिया की बांसुरी से राग जोग के सुर 57 2
35 हज़ार साल पुरानी बांसुरी मिली 162 2
सिलेबस
Total views Views today
सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 809 2
सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 732 1
सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 422 1
सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 915 0