ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है

ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है

ठुमरी भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक गायन शैली है। इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है। अर्थात जिसमें राग की शुद्धता की तुलना में भाव सौंदर्य को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।[1] यह विविध भावों को प्रकट करने वाली शैली है जिसमें श्रृंगार रस की प्रधानता होती है साथ ही यह रागों के मिश्रण की शैली भी है जिसमें एक राग से दूसरे राग में गमन की भी छूट होती है और रंजकता तथा भावाभिव्यक्ति इसका मूल मंतव्य होता है। इसी वज़ह से इसे अर्ध-शास्त्रीय गायन के अंतर्गत रखा जाता है।

भारत का संगीत ...
उत्पत्ति
ठुमरी की उत्पत्ति लखनऊ के नवाब वाज़िद अली शाह के दरबार से मानी जाती है।[1] जबकि कुछ लोगों का मानना है कि उन्होंने इसे मात्र प्रश्रय दिया और उनके दरबार में ठुमरी गायन नई ऊँचाइयों तक पहुँचा क्योंकि वे खुद 'अख्तर पिया' के नाम से ठुमरियों की रचना करते और गाते थे।[2] हालाँकि इसे मूलतः ब्रज शैली की रचना माना जाता है और इसकी अदाकारी के आधार पर पुनः पूरबी अंग की ठुमरी और पंजाबी अंग की ठुमरी में बाँटा जाता है[3] पूरबी अंग की ठुमरी के भी दो रूप लखनऊ और बनारस की ठुमरी के रूप में प्रचलित हैं।

प्रारूप
ठुमरी की बंदिश छोटी होती है और श्रृंगार रस प्रधान होती है। भक्ति भाव से अनुस्यूत ठुमरियों में भी बहुधा राधा-कृष्ण के प्रेमाख्यान से विषय उठाये जाते हैं। ठुमरी में प्रयुक्त होने वाले राग भी चपल प्रवृत्ति के होते हैं जैसे: खमाज, भैरवी, तिलक कामोद, तिलंग, पीलू, काफी, झिंझोटी, जोगिया इत्यादि।[1] ठुमरी सामान्यतः छोटी लम्बाई (कम मात्रा) वाले तालों में गाई जाती हैं जिनमें कहरवा, दादरा, और झपताल प्रमुख हैं। इसके आलावा दीपचंदी और जतताल का ठुमरी में काफ़ी प्रचलन है।[1] राग की तरह ही इस विधा में एक ताल से दूसरे ताल में जाने की छूट भी होती है।

वर्तमान स्थिति
वर्तमान समय में इस विधा की ओर रूचि के कम होने का कारण शास्त्रीय गायन ही में रूचि का ह्रास है। बनारस के जाने-माने ठुमरी गायक पं॰ छन्नूलाल मिश्र की मानें तो अब ठुमरी गाने वाले कम हो गए हैं और बनारस घराने की गायकी की इस विधा को सीखने-सिखाने का दौर मंद पड़ गया है।[4] वहीं दूसरी ओर प्रयोग के तौर कुछ लोगों द्वारा वर्तमान समय में ठुमरी को पश्चिमी संगीत के साथ जोड़ कर ठुमरी के पारंपरिक वाद्यों, तबला, हारमोनियम, सारंगी और ढोलक के अलावा इसमें ड्रम्स, वॉयलिन, की-बोर्ड और गिटार के साथ अफ्रीकी ड्रम जेम्बे, चीनी बांसुरी और ऑर्गेनिक की-बोर्ड पियानिका का इस्तेमाल भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

 

 

Vote: 
No votes yet
Rag content type: 

राग परिचय

राग परिचय
Total views Views today
सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि 2,801 35
मध्यमग्राम-तान-बोधिनी 19 17
शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व 1,152 12
रागों के प्रकार 824 10
रागों मे जातियां 1,233 10
राग बहार 366 9
राग रागिनी पद्धति 987 9
रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग 1,633 9
सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है 761 9
राग दरबारी कान्हड़ा 660 8
वादी - संवादी 476 8
आविर्भाव-तिरोभाव 466 7
रागो पर आधारित फ़िल्मी गीत 239 7
राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- 688 7
शुद्ध स्वर 576 6
संगीत संबंधी कुछ परिभाषा 1,147 6
सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान 702 5
स्वर (संगीत) 447 5
राग 'भैरव':रूह को जगाता भोर का राग 451 5
थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या 918 5
राग यमन (कल्याण) 485 5
षड्जग्राम-तान बोधिनी 26 4
राग भूपाली 600 4
स्वर मालिका तथा लिपि 315 4
स्वर मालिका तथा लिपि 663 4
राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान 183 4
स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ? 217 4
राग मुलतानी 283 4
सुर की समझ गायकी के लिए बहुत जरूरी है. 371 4
रागांग राग वर्गीकरण से अभिप्राय 155 3
कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है- 223 3
राग- गौड़ सारंग 134 2
राग ललित! 591 2
नाद का शाब्दिक अर्थ है -१. शब्द, ध्वनि, आवाज। 335 1
ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है 429 1
सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। 209 0
शास्त्रीय नृत्य
Total views Views today
भारतीय नृत्य कला 490 18
नाट्य शास्त्रानुसार नृतः, नृत्य, और नाट्य में तीन पक्ष हैं – 199 0
भरत नाट्यम - तमिलनाडु 144 0
माइक्रोफोन का कार्य 171 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत
Total views Views today
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 575 12
अलंकार- भारतीय शास्त्रीय संगीत 1,340 12
संगीत का विकास और प्रसार 613 10
हारमोनियम के गुण और दोष 1,436 10
संगीत शास्त्र परिचय 1,698 9
भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी 619 8
हिन्दुस्तानी संगीत प्रणाली में प्रचलित गायन के प्रकार 496 6
भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है 448 5
ख्याल गायकी के घरानेएक दृष्टि : भाग्यश्री सहस्रबुद्धे 905 5
नाट्य-शास्त्र संगीत कला का प्राचीन विस्तरित ग्रंथ है 273 4
निबद्ध- अनिबद्ध गान: व्याख्या, स्वरूप, भेद 549 4
तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है 255 3
हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है 426 3
भारतीय संगीत 283 3
निबद्ध- अनिबद्ध गान: 234 3
जानिए भारतीय संगीत के बारे में 607 2
गायकी के 8 अंग (अष्टांग गायकी) 185 2
नाद-साधन भी मोक्ष प्राप्ति का ऐक मार्ग है। 221 2
संस्कृत में थाट का अर्थ है मेल 198 2
राग भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा हैं। 121 2
रागों का सृजन 270 2
षडजांतर | शास्त्रीय संगीत के जाति लक्षण क्यां है 365 2
स्वरों का महत्त्व क्या है? 248 2
संगीत से सम्बन्धित 'स्वर' के बारे में है 314 1
'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है 322 1
भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है भारतीय शास्त्रीय संगीत। 85 1
रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। 38 1
ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं 250 0
संगीत और हमारा जीवन
Total views Views today
कैसे रखें आवाज के जादू को बरकरार 573 12
भारतीय संगीत में आध्यात्मिकता स्रोत 484 7
रियाज़ कैसे करें 10 तरीके 348 6
गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका 434 5
रागों में छुपा है स्वास्थ्य का राज 365 5
पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य 364 5
क्या आप भी बनना चाहेंगे टीवी एंकर 259 4
गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त 278 4
नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला) 240 4
शास्त्रीय संगीत और योग 407 4
कैसे जानें की आप अच्छा गाना गा सकते हैं 287 4
संगीत द्वारा रोग-चिकित्सा 766 4
संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है 113 3
माइक्रोफोन के प्रकार : 331 3
संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा 264 3
गायक बनने के उपाय और कैसे करें रियाज़ 573 3
नवजात शिशुओं पर संगीत का प्रभाव 478 3
संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव 475 3
खर्ज और ओंकार का अभ्यास क्या है ? 346 2
गायकी और गले का रख-रखाव 217 2
संगीत का वैज्ञानिक प्रभाव 216 2
गुरु की परिभाषा 694 2
गायक कलाकारों और बच्चों के लिए विशेष 368 1
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 194 1
गले में सूजन, पीड़ा, खुश्की 271 1
माइक्रोफोन की हानि : 197 1
कंठध्वनि 181 1
भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज 251 1
Sounds magic ध्वनियों का इंद्रजाल 323 1
अबुल फजल ने 22 नाड़ियों में सात स्वरों की व्याप्ति बताई जो इस प्रकार 106 1
भारतीय कलाएँ 268 1
चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख 492 1
टांसिल होने पर 247 0
नई स्वरयंत्र की सूजन 202 0
वैदिक विज्ञान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत'रागों' में चिकित्सा प्रभाव होने का दावा किया है। 341 0
हिंदुस्तानी संगीत के घराने
Total views Views today
भारत में संगीत शिक्षण 826 7
गुरु-शिष्य परम्परा 476 6
संगीत घराने और उनकी विशेषताएं 1,457 4
कैराना का किराना घराने से नाता 194 3
वीडियो
Total views Views today
राग बागेश्री | पंडित जसराज जी 315 5
राग भीमपलासी पर आधारित गीत 311 5
राग यमन 187 4
द ब्यूटी ऑफ राग बिलासखानी तोड़ी 196 2
वंदेमातरम् 126 1
ब्रेथलेसऔर अरुनिकिरानी 171 1
नुसरत फतेह के द्वारा राग कलावती 252 1
मोरा सइयां 160 1
कर्ण स्वर 202 1
स्वर परिचय
Total views Views today
संगीत रत्नाकर के अनुसार स्वरों के कुल, जाति 22 4
संगीत के स्वर 131 4
स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय 97 4
सामवेद व गान्धर्ववेद में स्वर 27 4
स्वर गान्धार का शास्त्रीय परिचय 78 2
स्वर पञ्चम का शास्त्रीय परिचय 49 2
स्वर और उनसे सम्बद्ध श्रुतियां 40 2
स्वर ऋषभ का शास्त्रीय परिचय 70 1
स्वर मध्यम का शास्त्रीय परिचय 60 1
स्वर धैवत का शास्त्रीय परिचय 29 0
स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय 19 0
हमारे पूज्यनीय गुरु
Total views Views today
बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत 88 3
तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय 296 2
जब बेगम अख्तर ने कहा, 'बिस्मिल्लाह करो अमजद' 452 2
रचन: श्री वल्लभाचार्य 311 2
अकबर और तानसेन 370 2
ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, 282 2
उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां 301 1
बैजू बावरा 300 0
ठुमरी गायिका गिरिजा देवी हासिल कर चुकी हैं कई पुरस्कार और सम्मान 90 0
सिलेबस
Total views Views today
सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 179 1
सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 142 0
सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 116 0
सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 162 0