खमाज

रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग

रागों का वर्गीकरण, टाइम थ्योरी ऑफ़ रागस इन हिंदी, संगीत राग, थाट व उसके प्रकार, राग दीपक नोट्स, राग की परिभाषा, मल्हार राग

प्रमुख रागों में ऐसे स्वर समूह होते है जिनसे उनकी स्वतंत्र छवि बनती है। ऐसे ही स्वतंत्र छवि बनाने वाले स्वर समूह को रागांग कहते है तथा स्वतंत्र अंग वाले राग, रागांग प्रमुख राग माने जाते हैं। ऐसे रागों में विस्तार की विस्तृत संभावनायें रहती है। आधुनिक काल में हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति में रागांग वर्गीकरण पद्धति को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसी पद्धति एवं प्रमुख रागांग आदि का विश्लेषण इस लेख में प्रस्तुत किया गया है।

राग परिचय

राग परिचय
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सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि 2,662 15
रागों के प्रकार 779 7
आविर्भाव-तिरोभाव 439 7
राग यमन (कल्याण) 454 6
रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग 1,606 5
रागों मे जातियां 1,215 4
राग भूपाली 585 4
संगीत संबंधी कुछ परिभाषा 1,120 3
राग 'भैरव':रूह को जगाता भोर का राग 429 3
सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान 674 3
शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व 1,115 3
स्वर मालिका तथा लिपि 302 3
राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- 653 2
शुद्ध स्वर 560 2
स्वर मालिका तथा लिपि 639 2
वादी - संवादी 456 1
राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान 175 1
रागो पर आधारित फ़िल्मी गीत 211 1
थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या 891 1
ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है 422 1
सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है 733 1
सुर की समझ गायकी के लिए बहुत जरूरी है. 354 1
राग बहार 350 1
राग रागिनी पद्धति 955 1
सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। 205 1
स्वर (संगीत) 436 1
राग ललित! 577 0
नाद का शाब्दिक अर्थ है -१. शब्द, ध्वनि, आवाज। 329 0
स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ? 207 0
राग मुलतानी 272 0
रागांग राग वर्गीकरण से अभिप्राय 144 0
राग दरबारी कान्हड़ा 629 0
राग- गौड़ सारंग 129 0
कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है- 211 0
स्वर परिचय
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सामवेद व गान्धर्ववेद में स्वर 12 10
स्वर धैवत का शास्त्रीय परिचय 22 6
स्वर और उनसे सम्बद्ध श्रुतियां 23 3
संगीत के स्वर 120 2
स्वर ऋषभ का शास्त्रीय परिचय 65 1
स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय 15 1
स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय 86 0
स्वर गान्धार का शास्त्रीय परिचय 71 0
स्वर मध्यम का शास्त्रीय परिचय 54 0
स्वर पञ्चम का शास्त्रीय परिचय 44 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत
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संगीत शास्त्र परिचय 1,654 6
रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। 21 6
हारमोनियम के गुण और दोष 1,391 4
भारतीय संगीत 274 1
अलंकार- भारतीय शास्त्रीय संगीत 1,281 1
रागों का सृजन 258 1
स्वरों का महत्त्व क्या है? 245 1
षडजांतर | शास्त्रीय संगीत के जाति लक्षण क्यां है 352 1
तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है 247 1
भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है भारतीय शास्त्रीय संगीत। 82 1
हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है 416 0
नाद-साधन भी मोक्ष प्राप्ति का ऐक मार्ग है। 217 0
संगीत का विकास और प्रसार 579 0
नाट्य-शास्त्र संगीत कला का प्राचीन विस्तरित ग्रंथ है 263 0
संस्कृत में थाट का अर्थ है मेल 194 0
हिन्दुस्तानी संगीत प्रणाली में प्रचलित गायन के प्रकार 473 0
निबद्ध- अनिबद्ध गान: व्याख्या, स्वरूप, भेद 537 0
ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं 248 0
राग भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा हैं। 115 0
निबद्ध- अनिबद्ध गान: 224 0
'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है 315 0
संगीत से सम्बन्धित 'स्वर' के बारे में है 302 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है 425 0
जानिए भारतीय संगीत के बारे में 589 0
ख्याल गायकी के घरानेएक दृष्टि : भाग्यश्री सहस्रबुद्धे 878 0
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 559 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी 598 0
गायकी के 8 अंग (अष्टांग गायकी) 176 0
संगीत और हमारा जीवन
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नई स्वरयंत्र की सूजन 196 3
संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है 97 3
भारतीय संगीत में आध्यात्मिकता स्रोत 462 2
गायकी और गले का रख-रखाव 212 2
रागों में छुपा है स्वास्थ्य का राज 350 2
संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव 469 2
गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त 271 1
नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला) 235 1
वैदिक विज्ञान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत'रागों' में चिकित्सा प्रभाव होने का दावा किया है। 336 1
अबुल फजल ने 22 नाड़ियों में सात स्वरों की व्याप्ति बताई जो इस प्रकार 100 1
भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज 246 1
गुरु की परिभाषा 676 1
संगीत द्वारा रोग-चिकित्सा 755 1
गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका 416 1
टांसिल होने पर 243 1
गले में सूजन, पीड़ा, खुश्की 260 1
क्या आप भी बनना चाहेंगे टीवी एंकर 251 1
माइक्रोफोन के प्रकार : 315 0
संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा 254 0
गायक बनने के उपाय और कैसे करें रियाज़ 558 0
Sounds magic ध्वनियों का इंद्रजाल 316 0
संगीत का वैज्ञानिक प्रभाव 205 0
पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य 353 0
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शास्त्रीय संगीत और योग 396 0
भारतीय कलाएँ 266 0
कैसे जानें की आप अच्छा गाना गा सकते हैं 276 0
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खर्ज और ओंकार का अभ्यास क्या है ? 337 0
कंठध्वनि 179 0
माइक्रोफोन की हानि : 194 0
हमारे पूज्यनीय गुरु
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रचन: श्री वल्लभाचार्य 303 2
अकबर और तानसेन 361 2
ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, 273 1
बैजू बावरा 298 1
बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत 81 1
तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय 290 1
ठुमरी गायिका गिरिजा देवी हासिल कर चुकी हैं कई पुरस्कार और सम्मान 86 1
उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां 298 0
जब बेगम अख्तर ने कहा, 'बिस्मिल्लाह करो अमजद' 442 0
हिंदुस्तानी संगीत के घराने
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संगीत घराने और उनकी विशेषताएं 1,424 2
भारत में संगीत शिक्षण 809 0
कैराना का किराना घराने से नाता 186 0
गुरु-शिष्य परम्परा 457 0
वीडियो
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ब्रेथलेसऔर अरुनिकिरानी 168 1
वंदेमातरम् 125 0
राग बागेश्री | पंडित जसराज जी 304 0
द ब्यूटी ऑफ राग बिलासखानी तोड़ी 191 0
नुसरत फतेह के द्वारा राग कलावती 249 0
राग यमन 179 0
मोरा सइयां 158 0
राग भीमपलासी पर आधारित गीत 293 0
कर्ण स्वर 200 0
सिलेबस
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सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 177 1
सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 140 0
सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 116 0
सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 161 0
शास्त्रीय नृत्य
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माइक्रोफोन का कार्य 170 0
भारतीय नृत्य कला 455 0
नाट्य शास्त्रानुसार नृतः, नृत्य, और नाट्य में तीन पक्ष हैं – 196 0
भरत नाट्यम - तमिलनाडु 142 0

ठाटों का स्वरूप

भैरव भैरवि आसावरी, यमन बिलावल ठाट।
तोड़ी काफ़ी मारवा, पूर्वी और खमाज।।
शुद्ध सुरन की बिलावल, कोमल निषाद खमाज
म तीवर स्वर यमन मेल, ग नि मृदु काफ़ी ठाट।।
गधनि कोमल से आसावरी, रे ध मृदु भैरव रूप।।
रे कोमल चढ़ती मध्यम, मारवा ठाट अनूप।।
उतरत रे ग ध अरु नी से, सोहत ठाट भैरवी।।
तोड़ी में रेग धम विकृत, रेधम विकृत ठाट पूर्वी।।

 

थाट के लक्षण

  1. प्रत्येक ठाट में अधिक से अधिक और कम से कम सात स्वर प्रयोग किये जाने चाहिए। इसका कारण यह है कि अगर ठाट सम्पूर्ण (सात स्वर वाला) नहीं रहता है तो किस प्रकार उससे सम्पूर्ण रागों की उत्पत्ति मानी जाएगी?
  2. ठाट सम्पूर्ण होने के साथ-साथ उसके स्वर स्वाभाविक क्रम से होने चाहिए। उदाहरण के लिए सा के बाद रेरे के बाद    के बाद  और नी आने ही चाहिए। यह बात दूसरी है कि ठाट में किसी स्वर का शुद्ध रूप न प्रयोग किया जाए, बल्कि विकृत रूप प्रयोग किया जाए। उदाहरणार्थ भैरव ठाट में कोमल रे और कल्याण ठाट में तीव्र  स्वर प्रयोग किये जाते हैं।
  3. किसी ठाट में आरोह-अवरोह दोनों का होना आवश्यक नहीं है, क्योंकि प्रत्येक ठाट के आरोह और अवरोह में कोई अन्तर नहीं होता। केवल आरोह या अवरोह को देखन से ही यह ज्ञात हो जाता है कि वह कौन सा ठाट है।
  4. ठाट गाया-बजाया नहीं जाता। अत: उसमें वादी-सम्वादी, पकड़, आलाप-तान आदि की आवश्यकता नहीं होती।
  5. ठाट में राग उत्पन्न करने की क्षमता होती है।

थाटों की संख्या

हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति में आजकल 10 ठाट माने जाते हैं। इन ठाटों से समस्त राग उत्पन्न माने गये। आधुनिक काल में स्व. विष्णु नारायण भातखण्डे ने ठाट-पद्धति को प्रचार में लाने की कल्पना की और ठाटों की संख्या को 10 माना है। ठाटों के नाम और स्वर निम्नलिखित हैं–

  1. बिलावल ठाट – प्रत्येक स्वर शुद्ध।
  2. कल्याण ठाट – केवल म तीव्र और अन्य स्वर शुद्ध।
  3. खमाज ठाट – नि कोमल और अन्य स्वर शुद्ध।
  4. आसावरी ठाट – ग, ध, नि कोमल और शेष स्वर शुद्ध।
  5. काफ़ी ठाट – ग, नि कोमल और शेष स्वर शुद्ध।
  6. भैरवी ठाट – रे, ग, ध, नि कोमल और शेष स्वर शुद्ध।
  7. भैरव ठाट – रे, ध कोमल और शेष स्वर शुद्ध।
  8. मारवा ठाट – रे कोमल, मध्यम तीव्र तथा शेष स्वर शुद्ध।
  9. पूर्वी ठाट – रे, ध कोमल, म तीव्र और शेष स्वर शुद्ध।
  10. तोड़ी ठाट – रे, ग, ध कोमल, म तीव्र और शेष स्वर शुद्ध।
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