बड़े गुलाम अली खान: जिन्होंने गाने के लिए रफी और लता से 50 गुना फीस ली

बड़े गुलाम अली खान

कहते हैं इनकार करने की नीयत से बड़े गुलाम अली खान ने के. आसिफ से मेहनताने के तौर पर एक गाने के 25,000 रुपए मांगे थे, ये वो दौर था जब लता और रफी जैसे मशहूर गायकों को एक गाने का 500 से कम मिलता था

रौबीला चेहरा, बड़ी बड़ी मूंछें, पहलवान जैसा हट्ठा-कट्ठा शरीर और पेट पर टिका हुआ सुरमंडल. देख के यकीन करना मुश्किल था कि इस शख्स का मौसीकी से कोई नाता है, लेकिन जब गले से सुर निकलते थे तो हर कोई जादू में सराबोर हो जाता था. ऐसी मुलायमियत, ऐसी लोच, तीनों सप्तकों में फर्राटे से दौड़ती ऐसी मीठी आवाज़ कि सुनने वालों की आह निकल जाए. पटियाला घराने के उस्ताद बड़े गुलाम अली खां की की गायकी और उनकी शख्सियत को शब्दों में समेटना बेहद मुश्किल काम है. संगीत के एक ऐसे साधक, एक ऐसे विद्वान और दिग्गज गायक, जिनका लोहा आने वाली पीढ़ियां भी मानती रहेंगी. खान साहब बड़े गुलाम अली खान खयाल, ध्रुपद, ठुमरी सब कुछ गाते थे लेकिन वो सबसे ज्यादा मशहूर हुए ठुमरी के लिए.

‘का करूं सजनी आए न बालम’, ‘याद पिया की आए’, ‘प्रेम जोगन बन के’, ‘नैना मोरे तरस रहे’, ‘कंकर मार जगाए’ इनमें से कोई न कोई ठुमरी आपके कानों में जरूर पड़ी होगी. बड़े गुलाम अली खान की आवाज़ में ये ठुमरियां अमर हो चुकी हैं. खान साहब की गाई ठुमरी ‘का करूं सजनी’ तो इतनी पॉपुलर हुई कि इसका आसान वर्जन यसुदास से गवाकर फिल्म-स्वामी में इस्तेमाल किया गया.

पटियाला घराने की विरासत

बड़े गुलाम अली खान अंग्रेजों के जमाने में पंजाब प्रांत के कसूर में पैदा हुए जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है, साल था 1902. पिता अली बक्श खान भी उस दौर के जाने-माने गायक थे. लिहाज़ा 5 साल की उम्र से तालीम शुरू हो गई. 7 साल की उम्र में उन्होंने अपने चाचा काले खान से सारंगी और गाना दोनों सीखना शुरू किया. उस्ताद काले खान भी जाने-माने गायक और कंपोजर थे. खान साहब ने पटियाला घराने के उस्ताद अख्तर हुसैन खान और उस्ताद आशिक अली खान से भी संगीत की तालीम ली. 21 साल की उम्र में बड़े गुलाम अली खान बनारस आ गए, सारंगी पर संगत करने के साथ उन्होंने छोटे मोटे समारोहों में गाना शुरू कर दिया. कहते हैं कोलकाता में उनका एक बड़ा कॉन्सर्ट हुआ जिसके बाद उन्हें बड़ी पहचान मिल गई थी. लोग उनके गले का जादू देख और सुन चुके थे.

मुगल-ए-आज़म के गाने के लिए बड़े गुलाम अली खान ने रिकॉर्ड फीस ली

मुगल-ए-आज़म के गाने के लिए बड़े गुलाम अली खान ने रिकॉर्ड फीस ली

 

1947 में जब भारत का बंटवारा हुआ तब कसूर पाकिस्तान का हिस्सा बन गया और खान साहब पाकिस्तान चले गए, लेकिन कुछ सालों के बाद वो हिंदुस्तान लौटे और फिर यहीं के होकर रह गए. बड़े गुलाम अली खान कहा करते थे- अगर हर घर में एक बच्चे को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सिखाया गया होता तो देश का कभी बंटवारा नहीं होता. 1957 में मोरारजी देसाई की मदद से उन्हें हिंदुस्तान की नागरिकता मिल गई.

सरकार की ओर से उन्हें मुंबई के मालाबार हिल्स में समंदर के पास एक बंगला भी दे दिया गया. हालांकि उनका ज्यादातर वक्त लाहौर, बांबे, कलकत्ता और हैदराबाद में घूमते हुए बीता. बड़े गुलाम अली की आवाज़ और उनकी लोकप्रियता देखकर कई फिल्म निर्माताओं ने उन्हें अपनी फिल्म में गवाना चाहा लेकिन खान साहब इनकार करते रहे. निर्माता के. आसिफ ही थे जो उन्हें किसी तरह अपनी फिल्म मुगल-ए-आज़म में दो राग आधारित गाने गाने के लिए राजी कर पाए.

 

कहते हैं इनकार करने की नीयत से बड़े गुलाम अली खान ने के. आसिफ से मेहनताने के तौर पर एक गाने के 25,000 रुपए मांगे थे, ये वो दौर था जब लता और रफी जैसे मशहूर गायकों को एक गाने का 500 से कम मिलता था. लेकिन के. आसिफ भी जिद के पक्के थे. उन्होंने खान साहब की मांग के मुताबिक पैसे दिए और उनसे गवाकर ही दम लिया. नौशाद के संगीत से रचे राग सोहनी और रागेश्वरी के उन दो गीतों ने बड़े गुलाम अली खान को और पॉपुलर बना दिया.

शास्त्रीय के संग लोक संगीत भी

खान साहब की गायकी में पटियाला कसूर घराने के अलावा जयपुर और ग्वालियर घराने की भी झलक मिलती थी. ठुमरी से लेकर ध्रुपद अंग तक वो बेहद सरलता और मधुरता के साथ गाते थे. राग को लेकर खान साहब का अध्ययन और तैयारी ऐसी थी कि एक राग को घंटों गा सकते थे लेकिन उन्होने हमेशा अपनी प्रस्तुति को छोटा और दिलचस्प रखा, हमेशा सुननेवालों को ध्यान में रखकर गाया और यही वजह है कि उनके चाहने वाले हिंदुस्तान और पाकिस्तान से लेकर पूरी दुनिया में फैले हुए हैं.

खान साहब अपने आप में एक स्कूल थे. ‘सबरंग’ नाम से उन्होंने अनगिनत बंदिशों की भी रचना की. अलग अलग प्रांतों में गाए जाने वाले लोक संगीत से कैसे शास्त्रीय रागों की रचना हुई, इस पर खान साहब का जबरदस्त अध्ययन था. लोकसंगीत और शास्त्रीय संगीत का रिश्ता बताते हुए ही वो राग पहाड़ी में एक रचना गाते थे- हरि ओम तत्सत. ये बड़े गुलाम अली खान की कालजयी और अमर रचना है जो ये भी बताती है कि मौसीकी का मजहब दुनियावी मजहब के कहीं ऊपर होता है.

Classical Music

1962 में खान साहब को भारत सरकार की ओर से पद्मभूषण मिला. उन्हें संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड से भी नावाजा गया. ये खान साहब का अपने हुनर और चाहने वालों को लेकर समर्पण था कि उन्होंने पुरस्कार और पदवियों से ज्यादा तवज्जों हमेशा अपने चाहने वालों के प्यार को दिया. अपने आखिरी दिनों में खान साहब लंबी बीमारी के बाद पैरालिसिस के शिकार हो गए थे. हैदराबाद के बशीरगढ़ पैलेस में 1968 में खान साहब ने दुनिया को अलविदा कह दिया. उनके सम्मान में बशीरगढ़ की मुख्य गली का नाम उस्ताद बड़े गुलाम अली खान मार्ग कर दिया गया है. खान साहब के बेटे मुनव्वर अली खान भी के बड़े गायक हुए. बड़े गुलाम अली खान की गायकी की स्टाइल को पंडित अजय चक्रवर्ती जैसे गायक बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं.

Vote: 
No votes yet

राग परिचय

राग परिचय
Total views Views today
वादी - संवादी 2,465 4
रागों का विभाजन 624 4
रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग 4,069 3
राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- 3,521 3
रागों के प्रकार 4,544 3
मध्यमग्राम-तान-बोधिनी 343 3
स्वर मालिका तथा लिपि 1,853 2
कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है- 1,079 2
राग 'भैरव':रूह को जगाता भोर का राग 1,579 2
नाद का शाब्दिक अर्थ है -१. शब्द, ध्वनि, आवाज। 1,275 2
टप्पा गायन : एक परिचय 694 2
सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि 10,873 2
सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। 720 2
स्वर (संगीत) 1,625 2
थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या 3,836 1
स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ? 1,115 1
ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है 1,295 1
राग बहार 1,470 1
रागों मे जातियां 2,888 1
राग रागिनी पद्धति 2,740 1
सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान 2,045 1
शुद्ध स्वर 2,345 1
रागांग राग वर्गीकरण से अभिप्राय 768 1
आविर्भाव-तिरोभाव 2,650 0
स्वर मालिका तथा लिपि 2,440 0
राग ललित! 1,959 0
संगीत संबंधी कुछ परिभाषा 3,175 0
राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान 1,031 0
रागो पर आधारित फ़िल्मी गीत 2,426 0
‘राग’ शब्द संस्कृत की धातु 'रंज' से बना है 313 0
राग मुलतानी 847 0
सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है 2,014 0
राग यमन (कल्याण) 2,422 0
सुर की समझ गायकी के लिए बहुत जरूरी है. 2,012 0
राग भूपाली 2,642 0
शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व 2,825 0
षड्जग्राम-तान बोधिनी 324 0
राग दरबारी कान्हड़ा 2,145 0
राग- गौड़ सारंग 615 0
हिंदुस्तानी संगीत के घराने
Total views Views today
संगीत घराने और उनकी विशेषताएं 5,214 3
गुरु-शिष्य परम्परा 1,406 0
भारत में संगीत शिक्षण 1,791 0
रामपुर सहसवां घराना भी है गायकी का मशहूर घराना 185 0
कैराना का किराना घराने से नाता 469 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत
Total views Views today
भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है 1,225 3
निबद्ध- अनिबद्ध गान: व्याख्या, स्वरूप, भेद 1,954 2
तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है 1,214 1
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 1,978 1
रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। 1,039 1
नाद-साधन भी मोक्ष प्राप्ति का ऐक मार्ग है। 528 1
नाट्य-शास्त्र संगीत कला का प्राचीन विस्तरित ग्रंथ है 1,142 1
संगीत का विकास और प्रसार 1,750 1
हिन्दुस्तानी संगीत प्रणाली में प्रचलित गायन के प्रकार 1,530 1
राग भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा हैं। 628 1
अलंकार- भारतीय शास्त्रीय संगीत 4,114 1
भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी 2,317 0
गायकी के 8 अंग (अष्टांग गायकी) 798 0
भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है भारतीय शास्त्रीय संगीत। 461 0
हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है 1,226 0
संस्कृत में थाट का अर्थ है मेल 497 0
ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं 957 0
भारतीय संगीत 765 0
रागों का सृजन 739 0
हारमोनियम के गुण और दोष 4,082 0
निबद्ध- अनिबद्ध गान: 568 0
स्वरों का महत्त्व क्या है? 771 0
संगीत शास्त्र परिचय 3,661 0
षडजांतर | शास्त्रीय संगीत के जाति लक्षण क्यां है 1,077 0
संगीत से सम्बन्धित 'स्वर' के बारे में है 1,709 0
'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है 986 0
जानिए भारतीय संगीत के बारे में 1,750 0
ख्याल गायकी के घरानेएक दृष्टि : भाग्यश्री सहस्रबुद्धे 1,956 0
शास्त्रीय नृत्य
Total views Views today
कर्नाटक संगीत 235 2
लोक कला की ध्वजवाहिका 126 1
कर्नाटक गायन शैली के प्रमुख रूप 205 1
रागदारी: शास्त्रीय संगीत में घरानों का मतलब 205 1
सबसे पुराना माना जाता है ग्वालियर घराना 193 1
शास्त्रीय संगीत क्या है 195 1
भरत नाट्यम - तमिलनाडु 449 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत का आधार: 184 0
लोक और शास्त्र के अन्तरालाप की देवी 127 0
राग क्या हैं 513 0
क्या अलग था गिरिजा देवी की गायकी में 230 0
वेद में एक शब्द है समानिवोआकुति 177 0
राग भीमपलास और भीमपलास पर आधारित गीत 354 0
माइक्रोफोन का कार्य 650 0
ठुमरी का नवनिर्माण 159 0
पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी 192 0
बेहद लोकप्रिय है शास्त्रीय गायकी का किराना घराना 162 0
आगरा का भी है अपना शास्त्रीय घराना 147 0
लता मंगेशकर का नाम : भारतीय संगीत की आत्मा 176 0
मेवाती घराने की पहचान हैं पंडित जसराज 166 0
जयपुर- अतरौली घराने की देन हैं एक से बढ़कर एक कलाकार 164 0
भारतीय नृत्य कला 1,793 0
नाट्य शास्त्रानुसार नृतः, नृत्य, और नाट्य में तीन पक्ष हैं – 938 0
काशी की गिरिजा 148 0
संगीत और हमारा जीवन
Total views Views today
रियाज़ कैसे करें 10 तरीके 2,422 2
गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका 2,073 2
संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है 1,257 1
माइक्रोफोन के प्रकार : 1,188 1
गायक बनने के उपाय और कैसे करें रियाज़ 2,280 1
भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज 895 1
पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य 1,341 1
नवजात शिशुओं पर संगीत का प्रभाव 1,200 1
गुरु की परिभाषा 3,576 1
गले में सूजन, पीड़ा, खुश्की 931 0
क्या आप भी बनना चाहेंगे टीवी एंकर 819 0
कंठध्वनि 780 0
माइक्रोफोन की हानि : 516 0
गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त 763 0
संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा 884 0
नई स्वरयंत्र की सूजन 837 0
अल्कोहल ड्रिंक्स - ये दोनों आपके गले के पक्के (पक्के मतलब वाकई पक्के) दुश्मन हैं 217 0
आइआइटी कानपुर ने भी माना राग दरबारी सुनने से तेज होता है दिमाग, दूर कर सकते रोग 172 0
नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला) 839 0
गायकी और गले का रख-रखाव 979 0
भारतीय संगीत में आध्यात्मिकता स्रोत 1,259 0
वैदिक विज्ञान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत'रागों' में चिकित्सा प्रभाव होने का दावा किया है। 1,011 0
रागों में छुपा है स्वास्थ्य का राज 907 0
Sounds magic ध्वनियों का इंद्रजाल 834 0
अबुल फजल ने 22 नाड़ियों में सात स्वरों की व्याप्ति बताई जो इस प्रकार 402 0
संगीत का वैज्ञानिक प्रभाव 1,109 0
शास्त्रीय संगीत और योग 1,036 0
भारतीय कलाएँ 679 0
माता-पिता अपने किशोर बच्चों को गानो के गलत प्रभाव से कैसे बचा सकते हैं? 151 0
संगीत द्वारा रोग-चिकित्सा 1,758 0
कैसे जानें की आप अच्छा गाना गा सकते हैं 870 0
संगीत कितने प्रकार का होता है और उसका किशोरों के दिमाग पर क्या असर पड़ता है? 233 0
संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव 1,473 0
क्या प्रभाव पड़ता है संगीत का किशोरों पर? 166 0
चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख 1,429 0
कैसे रखें आवाज के जादू को बरकरार 1,569 0
संगीत सुनने से दिमाग पर होता है ऐसा असर 218 0
गायक कलाकारों और बच्चों के लिए विशेष 773 0
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 444 0
टांसिल होने पर 658 0
खर्ज और ओंकार का अभ्यास क्या है ? 1,176 0
हमारे पूज्यनीय गुरु
Total views Views today
उस्ताद बड़े गुलाम अली खान वाला पटियाला घराना 213 2
उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां 941 1
ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, 841 1
फकीर हरिदास और तानसेन के संगीत में क्या अंतर है? 163 1
बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत 395 0
ठुमरी गायिका गिरिजा देवी हासिल कर चुकी हैं कई पुरस्कार और सम्मान 337 0
जब बेगम अख्तर ने कहा, 'बिस्मिल्लाह करो अमजद' 836 0
अमवा महुअवा के झूमे डरिया 326 0
पण्डित अजॉय चक्रबर्ती 147 0
बड़े गुलाम अली खान: जिन्होंने गाने के लिए रफी और लता से 50 गुना फीस ली 172 0
रचन: श्री वल्लभाचार्य 1,206 0
अकबर और तानसेन 984 0
बैजू बावरा 923 0
तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय 986 0
स्वर परिचय
Total views Views today
संगीत रत्नाकर के अनुसार स्वरों के कुल, जाति 669 1
संगीत के स्वर 1,137 0
स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय 430 0
स्वर ऋषभ का शास्त्रीय परिचय 414 0
स्वर गान्धार का शास्त्रीय परिचय 365 0
स्वर मध्यम का शास्त्रीय परिचय 310 0
स्वर पञ्चम का शास्त्रीय परिचय 309 0
स्वर धैवत का शास्त्रीय परिचय 366 0
स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय 330 0
स्वर और उनसे सम्बद्ध श्रुतियां 502 0
सामवेद व गान्धर्ववेद में स्वर 351 0
सिलेबस
Total views Views today
सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 292 1
सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 594 0
सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 421 0
सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 457 0
वीडियो
Total views Views today
वंदेमातरम् 378 0
राग बागेश्री | पंडित जसराज जी 1,005 0
ब्रेथलेसऔर अरुनिकिरानी 398 0
नुसरत फतेह के द्वारा राग कलावती 569 0
द ब्यूटी ऑफ राग बिलासखानी तोड़ी 567 0
राग यमन 593 0
मोरा सइयां 427 0
राग भीमपलासी पर आधारित गीत 2,339 0
कर्ण स्वर 481 0
कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया 202 0