बैजू बावरा

बैजू बावरा का जीवन परिचय, बैजू बावरा गीत, बैजू बावरा 1952, बैजू बावरा की समाधि, बैजू बावरा का मकबरा, बैजू बावरा मन तड़पत हरि दर्शन को आज (राग मालकौंस), बैजू बावरा (1952 फ़िल्म), बैजू बावरा तू गंगा की मौज

बैजू बावरा भारत के ध्रुपदगायक थे। उनको बैजनाथ प्रसाद और बैजनाथ मिश्र के नाम से भी जाना जाता है। वे ग्वालियर के राजा मानसिंह के दरबार के गायक थे और अकबर के दरबार के महान गायक तानसेन के समकालीन थे। उनके जीवन के बारे में बहुत सी किंवदन्तियाँ हैं जिनकी ऐतिहासिक रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती है।

प्रारंभिक जीवन
१६ वीं शताब्दी के महान गायक संगीतज्ञ तानसेन के गुरुभाई पंडित बैजनाथ का जन्म चंदेरी में सन् १५४२ में शरद पूर्णिमा की रात एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। पंडित बैजनाथ की बाल्यकाल से ही गायन एवं संगीत में काफ़ी रुचि थी। उनके गले की मधुरता और गायन की चतुराई प्रभावशाली थी। पंडित बैजनाथ को बचपन में लोग प्यार से 'बैजू' कहकर पुकारते थे। बैजू की उम्र के साथ-साथ उनके गायन और संगीत में भी बढ़ोतरी होती गई। जब बैजू युवा हुए तो नगर की कलावती नामक युवती से उनका प्रेम प्रसंग हुआ। कलावती बैजू की प्रेयसी के साथ-साथ प्रेरणास्रोत भी रही। संगीत और गायन के साथ-साथ बैजू अपनी प्रेयसी के प्यार में पागल हो गए। इसी से लोग उन्हें बैजू बावरा कहने लगे। बैजनाथ ने ध्रुपद शैली में गायन की दीक्षा उस समय के मशहूर गुरु हरिदास स्वामी से वृंदावन में ग्रहण की थी।
ग्वालियर में जय विलास महल में संरक्षित ऐतिहासिक पुस्तकों के अनुसार, बैजू राग दीपक गाकर तेल के दीप जला सकते थे, राग मेघ, मेघ मल्हार, या गौड़ मल्हार गाकर वर्षा करा सकते थे, राग बहार गाकर फूल खिला सकते थे और यहाँ तक कि राग मालकौंस गाकर पत्थर भी पिघला सकते थे।

संगीत प्रतियोगिता
सम्राट अकबर संगीत एवं कला का प्रेमी था। उसके दरबार में संगीतकारों और साहित्यकारों का तांता लगा रहता था। तानसेन अकबर के दरबार के नौ रत्नों में गिने जाते थे। अकबर ने अपने दरबार में एक संगीत प्रतियोगिता का आयोजन रखा। इस प्रतियोगिता की यह शर्त थी कि तानसेन से जो भी मुक़ाबला कर जीतेगा, वह अकबर के दरबार का संगीतकार बना दिया जायेगा तथा हारे हुए प्रतियोगी को मृत्युदण्ड दिया जाएगा। कोई भी संगीतकार इस शर्त के कारण सामने नहीं आया परंतु बैजू बावरा ने यह बीड़ा उठाया तथा अपने गुरु हरिदास से आज्ञा प्राप्त कर संगीत प्रतियोगिता में भाग लिया। अंततः इस प्रतियोगिता में बैजू की हार हुई, किंतु बाद में अकबर ने प्रसन्न होकर बैजू को अपने दरबार में रखने का प्रस्ताव रखा। लेकिन अकबर के दरबार के इतिहासकार अबुल फ़ज़ल और औरंगज़ेब के दरबार के इतिहासकार फ़क़ीरुल्लाह के अनुसार बैजू ने तानसेन को प्रतियोगिता में हराया था और तानसेन ने बैजू के पैर छूकर अपने प्राणों की भीख मांगी थी। बैजू ने तानसेन को माफ़ कर दिया और ख़ुद ग्वालियर वापस चला गया।

कश्मीर प्रकरण
बैजू बावरा अकबर के दरबार में रहने के बजाय ग्वालियर आ गए, जहां उन्हें सूचना मिली कि उनके गुरु हरिदास समाधिस्थ होने वाले हैं। वे अपने गुरु के अंतिम दर्शनों के लिए वृन्दावन पहुंचे और उनके दर्शन करने के पश्चात विभिन्न प्रकार की आपदाओं का सामना करते हुए अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में कश्मीर नरेश की राजधानी श्रीनगर पहुंचे। उस समय उनका शिष्य गोपाल नायक वहां दरबारी गायक था। फटेहाल बैजू ने अपने आने की सूचना गोपालदास तक पहुंचाने के लिए द्वारपाल से कहा, तो द्वारपाल ने दो टूक जवाब दिया कि उनके स्वामी का कोई गुरु नहीं है। यह सुनकर बैजू को काफ़ी आघात पहुंचा और वे श्रीनगर के एक मंदिर में पहुंचकर राग ध्रुपद का गायन करने लगे। बैजू के श्रेष्ठ गायन को सुनकर अपार भीड़ उमड़ने लगी। जब बैजू की ख़बर कश्मीर नरेश के पास पहुंची, तो वे स्वयं भी वहां आए तथा बैजू का स्वागत कर अपने दरबार में ले आए। कश्मीर नरेश ने गोपालदास को पुनः संगीत शिक्षा दिए जाने हेतु बैजू से निवेदन किया। राजा की आज्ञा से उन्होंने गोपाल को पुनः संगीत शिक्षा देकर निपुण किया।
एक अन्य दन्तकथा के अनुसार गोपाल नायक बैजू का प्रिय शिष्य था। वह अपनी पत्नी प्रभा के साथ बैजू को छोड़ जीविका के लिए कहीं और चला गया जिसके आघात से बैजू अपना आपा खो बैठा और उसका नाम बैजू बावरा पड़ गया। गोपाल नायक कश्मीर नरेश के दरबार में गायक नियुक्त हो गया और वहाँ उसने यह प्रचलित कर दिया कि वह स्व-शिक्षित है और उस पर किसी भी गुरु की कृपा नहीं है। यह सुन बैजू फटेहाल श्रीनगर पहुँचा और अपने गायन से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया लेकिन गोपाल नायक ने अपने गुरु को पहचानने से मना कर दिया। आहत बैजू एक मंदिर में जाकर गाना गाने लगा और वहाँ भारी भीड़ उमड़ पड़ी और जब कश्मीर नरेश को इस बात की सूचना मिली तो कश्मीर नरेश ने बैजू को अपने दरबार में बुलवा भेजा और बैजू और गोपाल की संगीत प्रतियोगिता रखवा डाली। बैजू को पहले गाने का मौका मिला और गोपाल को उसका उत्तर देना था। बैजू ने राग भीमपलासी गाया जिसके कारण पत्थर पिघलने लगे। गोपाल ने उत्तर में गाया लेकिन जीत न पाया। प्रतियोगिता की शर्त के अनुसार हारने वाले को मृत्युदण्ड दिया जाना था लेकिन बैजू बावरा ने राजा से अनुरोध कर गोपाल को मृत्युदण्ड से बचा लिया। लेकिन अपनी मूर्खता के कारण गोपाल को अपनी जान से हाथ गँवाना पड़ा। उसका अन्तिम संसकार सतलज के किनारे उसकी पुत्री मीरा ने किया। ऐसा कहा जाता है कि दाह संस्कार के बाद जब गोपाल की हड्डियों को नदी में फेंका गया तो वह डूब गयीं। दन्तकथा के अनुसार गोपाल की विधवा प्रभा ने जब बैजू से उन हड्डियों को लाने का अनुरोध किया तो बैजू ने गोपाल की पुत्री मीरा को राग मल्हार का एक नया संस्करण सिखाया जिसको एक सप्ताह तक सीखने के बाद जब मीरा ने सतलज के किनारे भीड़ के सामने जब गाया तो गोपाल की हड्डियाँ नदी के किनारे आ लगीं। उस समय के बाद से उस राग को मीरा की मल्हार का नाम दिया गया। इस प्रकरण के पश्चात् उदास बैजू चंदेरी वापस चला आया।

देहान्त
बैजू का ७१ वर्ष की आयु में मियादी बुख़ार के कारण चंदेरी में सन् १६१३ ई. में वसन्त पञ्चमी के दिन देहान्त हो गया।

 

 

 

Vote: 
No votes yet

आप भी अपने लेख फिज़िका माइंड वेबसाइट पर प्रकाशित कर सकते है|

आप अपने लेख WhatsApp No 7454046894 पर भेज सकते है जो की पूरी तरह से निःशुल्क है | आप 1000 रु (वार्षिक )शुल्क जमा करके भी वेबसाइट के साधारण सदस्य बन सकते है और अपने लेख खुद ही प्रकाशित कर सकते है | शुल्क जमा करने के लिए भी WhatsApp No पर संपर्क करे. या हमें फ़ोन काल करें 7454046894

 

 

 

राग परिचय

राग परिचय
Total views Views today
संगीत संबंधी कुछ परिभाषा 1,741 15
सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि 5,009 14
रागो पर आधारित फ़िल्मी गीत 758 13
रागों के प्रकार 1,643 10
रागों मे जातियां 1,719 9
राग दरबारी कान्हड़ा 1,054 7
शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व 1,672 6
शुद्ध स्वर 931 6
सुर की समझ गायकी के लिए बहुत जरूरी है. 742 5
कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है- 432 5
राग 'भैरव':रूह को जगाता भोर का राग 754 4
थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या 1,481 4
रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग 2,221 4
स्वर (संगीत) 678 4
राग ललित! 875 4
नाद का शाब्दिक अर्थ है -१. शब्द, ध्वनि, आवाज। 516 3
राग भूपाली 1,137 3
राग रागिनी पद्धति 1,383 3
मध्यमग्राम-तान-बोधिनी 134 3
वादी - संवादी 798 3
राग मुलतानी 408 2
रागों का विभाजन 230 2
राग बहार 582 2
सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। 340 2
स्वर मालिका तथा लिपि 1,043 2
राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान 389 1
स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ? 434 1
ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है 640 1
सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है 1,200 1
सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान 1,007 1
स्वर मालिका तथा लिपि 575 1
राग यमन (कल्याण) 998 0
राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- 1,272 0
षड्जग्राम-तान बोधिनी 143 0
राग- गौड़ सारंग 231 0
रागांग राग वर्गीकरण से अभिप्राय 290 0
आविर्भाव-तिरोभाव 794 0
शास्त्रीय नृत्य
Total views Views today
राग भीमपलास और भीमपलास पर आधारित गीत 13 13
भारतीय नृत्य कला 781 4
माइक्रोफोन का कार्य 263 0
नाट्य शास्त्रानुसार नृतः, नृत्य, और नाट्य में तीन पक्ष हैं – 299 0
भरत नाट्यम - तमिलनाडु 227 0
हिंदुस्तानी संगीत के घराने
Total views Views today
संगीत घराने और उनकी विशेषताएं 2,840 7
भारत में संगीत शिक्षण 1,079 4
गुरु-शिष्य परम्परा 695 1
कैराना का किराना घराने से नाता 278 0
संगीत और हमारा जीवन
Total views Views today
संगीत द्वारा रोग-चिकित्सा 1,035 6
गायक बनने के उपाय और कैसे करें रियाज़ 999 5
गाने का रियाज़ करते समय साँस लेने के सही तरीका 870 5
संगीत सुनें और पाएं इन सात समस्याओं से छुटकारा 470 4
गुरु की परिभाषा 1,167 3
नई स्वरयंत्र की सूजन 338 2
नई स्वरयंत्र की सूजन(मानव गला) 347 2
गायकी और गले का रख-रखाव 361 2
भारतीय संगीत में आध्यात्मिकता स्रोत 708 2
रागों में छुपा है स्वास्थ्य का राज 533 2
नवजात शिशुओं पर संगीत का प्रभाव 651 2
टांसिल होने पर 360 2
खर्ज और ओंकार का अभ्यास क्या है ? 546 2
गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त 406 2
वैदिक विज्ञान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत'रागों' में चिकित्सा प्रभाव होने का दावा किया है। 504 1
अबुल फजल ने 22 नाड़ियों में सात स्वरों की व्याप्ति बताई जो इस प्रकार 205 1
संगीत का वैज्ञानिक प्रभाव 347 1
भारतीय संगीत के सुरों द्वारा बीमारियो का इलाज 391 1
पैर छूने के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य 596 1
भारतीय कलाएँ 418 1
संगीत का प्राणि वर्ग पर असाधारण प्रभाव 635 1
चमत्कार या लुप्त होती संवेदना एक लेख 664 1
कंठध्वनि 320 1
माइक्रोफोन के प्रकार : 517 1
Sounds magic ध्वनियों का इंद्रजाल 441 0
शास्त्रीय संगीत और योग 546 0
कैसे जानें की आप अच्छा गाना गा सकते हैं 431 0
कैसे रखें आवाज के जादू को बरकरार 871 0
रियाज़ कैसे करें 10 तरीके 753 0
गायक कलाकारों और बच्चों के लिए विशेष 459 0
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 240 0
गले में सूजन, पीड़ा, खुश्की 435 0
संगीत के लिए हमारे जीवन में एक प्राकृतिक जगह है 340 0
माइक्रोफोन की हानि : 274 0
क्या आप भी बनना चाहेंगे टीवी एंकर 408 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत
Total views Views today
अलंकार- भारतीय शास्त्रीय संगीत 2,058 5
निबद्ध- अनिबद्ध गान: व्याख्या, स्वरूप, भेद 834 4
संगीत का विकास और प्रसार 861 3
हारमोनियम के गुण और दोष 2,273 3
'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है 546 3
हिन्दुस्तानी संगीत प्रणाली में प्रचलित गायन के प्रकार 765 2
ख्याल गायकी के घरानेएक दृष्टि : भाग्यश्री सहस्रबुद्धे 1,206 2
तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है 404 2
भारतीय परम्पराओं का पश्चिम में असर 903 2
नाट्य-शास्त्र संगीत कला का प्राचीन विस्तरित ग्रंथ है 448 1
ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं 399 1
निबद्ध- अनिबद्ध गान: 319 1
षडजांतर | शास्त्रीय संगीत के जाति लक्षण क्यां है 560 1
संगीत से सम्बन्धित 'स्वर' के बारे में है 466 1
भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी 1,038 1
रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। 271 1
संस्कृत में थाट का अर्थ है मेल 270 0
भारतीय संगीत 428 0
राग भारतीय शास्त्रीय संगीत की आत्मा हैं। 211 0
रागों का सृजन 408 0
संगीत शास्त्र परिचय 2,232 0
स्वरों का महत्त्व क्या है? 370 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है 658 0
जानिए भारतीय संगीत के बारे में 965 0
गायकी के 8 अंग (अष्टांग गायकी) 342 0
भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है भारतीय शास्त्रीय संगीत। 156 0
नाद-साधन भी मोक्ष प्राप्ति का ऐक मार्ग है। 304 0
हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है 595 0
वीडियो
Total views Views today
राग भीमपलासी पर आधारित गीत 690 4
मोरा सइयां 222 2
नुसरत फतेह के द्वारा राग कलावती 326 1
राग यमन 276 1
वंदेमातरम् 195 0
ब्रेथलेसऔर अरुनिकिरानी 229 0
राग बागेश्री | पंडित जसराज जी 426 0
द ब्यूटी ऑफ राग बिलासखानी तोड़ी 264 0
कर्ण स्वर 275 0
स्वर परिचय
Total views Views today
स्वर ऋषभ का शास्त्रीय परिचय 158 2
स्वर धैवत का शास्त्रीय परिचय 118 2
स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय 90 1
संगीत के स्वर 271 1
स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय 181 0
स्वर गान्धार का शास्त्रीय परिचय 162 0
स्वर मध्यम का शास्त्रीय परिचय 147 0
स्वर पञ्चम का शास्त्रीय परिचय 134 0
स्वर और उनसे सम्बद्ध श्रुतियां 167 0
सामवेद व गान्धर्ववेद में स्वर 142 0
संगीत रत्नाकर के अनुसार स्वरों के कुल, जाति 141 0
हमारे पूज्यनीय गुरु
Total views Views today
अकबर और तानसेन 515 2
तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय 443 2
रचन: श्री वल्लभाचार्य 520 1
बैजू बावरा 441 1
जब बेगम अख्तर ने कहा, 'बिस्मिल्लाह करो अमजद' 558 0
उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां 409 0
ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, 392 0
बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत 157 0
ठुमरी गायिका गिरिजा देवी हासिल कर चुकी हैं कई पुरस्कार और सम्मान 146 0
सिलेबस
Total views Views today
सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 166 2
सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 205 1
सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 266 0
सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 224 0