भारतीय शास्त्रीय संगीत

तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है

तानपुरे अथवा सितार

तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है और ध्वनि उत्पन्न होती है। संगीत में नियमित और स्थित कम्पन (आंदोलन) द्वारा उत्पन्न ध्वनि का उपयोग होता है, जिसे हम नाद कहते हैं। जब किसी ध्वनि की कम्पन कुछ समय तक चलती है तो उसे स्थिर आंदोलन और जब उसी ध्वनि का कंपन समान गति वाली होती है तो उसे नियमित आंदोलन कहते हैं। शोरगुल, कोलाहल आदि ध्वनियों में अनियमित और अस्थिर आंदोलन होने के कारण संगीत में इनका प्रयोग नहीं होता। सांगीतोपयोगी ध्वनि को नाद कहते हैं। नाद की मुख्य तीन विशेषताएँ हैं- Read More : तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है about तानपुरे अथवा सितार के खिचे हुये तार को आघात करने से तार कम्पन करता है

ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं

ध्वनि विशेष को नाद

ध्वनि, झरनों की झरझर, पक्षियों का कूजन किसने नहीं सुना है। प्रकृति प्रदत्त जो नाद लहरी उत्पन्न होती है, वह अनहद नाद का स्वरूप है जो कि प्रकृति की स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन जो नाद स्वर लहरी, दो वस्तुओं के परस्पर घर्षण से अथवा टकराने से पैदा होती है उसे लौकिक नाद कहते हैं।
वातावरण पर अपने नाद को बिखेरने के लिये, बाह्य हवा पर कंठ के अँदर से उत्पन्न होने वाली वजनदार हवा जब परस्पर टकराती है, उसी समय कंठ स्थित 'स्वर तंतु' (Vocal Cords) नाद पैदा करते हैं। अत: मानव प्राणी द्वारा निर्मित आवाज लौकिक है।

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हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है

संगीत पद्धति रागों

हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है । रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। थाटों की संख्या गणित की दृष्टि से ‘72’ मानी गयी है किन्तु आज मुख्यतः ‘10’ थाटों का ही क्रियात्मिक प्रयोग किया जाता है जिन के नांम हैं बिलावल, कल्याण, खमाज, भैरव, भैरवी, काफी, आसावरी, पूर्वी, मारवा और तोडी हैं। प्रत्येक राग विशिष्ट समय पर किसी ना किसी विशिष्ट भाव (मूड – थीम) का घोतक है। राग शब्द सँस्कृत के बीज शब्द ‘रंज’ से लिया गया है। अतः प्रत्येक राग में स्वरों और उन के चलन के नियम हैं जिन का पालन करना अनिवार्य है अन्यथ्वा आपेक्षित भाव का सर्जन नहीं हो सकता। हिन्दूस्तानी संगीत में प्रत्येक राग अपने निर्धारि Read More : हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है about हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है

ख्याल गायकी के घरानेएक दृष्टि : भाग्यश्री सहस्रबुद्धे

ख्याल, ध्रुपद गायन, ध्रुपद गायक, ध्रुपद का इतिहास, ख्याल गीत, ध्रुपद ताल, ख्याल शायरी, ध्रुपद गायकी

किसी भी ख्याल शैली की उत्पत्ति दो प्रकार से मानी गई है- एक तो किसी व्यक्ति या जाति के नाम से, जैसे सैनी घराना, कव्वाल घराना आदि और दूसरे किसी स्थान के नाम से|
ख्याल वर्तमान में प्रचलित सर्वाधिक लोकप्रिय शैली है| वस्तुत: एक गायक का चिंतन ख्याल में उभरकर सामने आता है| स्वर एक केंद्र बिंदु है, जिस पर साधक का ध्यान लगता है|
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संगीत से सम्बन्धित 'स्वर' के बारे में है

संगीत के स्वर, हिंदुस्तानी संगीत में शुद्ध और विकृत कुल मिलाकर कितने स्वर होते हैं, संगीत की परिभाषा, संगीत के राग, संगीत के सात स्वर, संगीत के प्रकार, विकृत स्वर, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में विकृत स्वरों की संख्या कितनी है

संगीत में वह शब्द जिसका कोई निश्चित रूप हो और जिसकी कोमलता या तीव्रता अथवा उतार-चढ़ाव आदि का, सुनते ही, सहज में अनुमान हो सके, स्वर कहलाता है। भारतीय संगीत में सात स्वर (notes of the scale) हैं, जिनके नाम हैं - षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत व निषाद।
यों तो स्वरों की कोई संख्या बतलाई ही नहीं जा सकती, परंतु फिर भी सुविधा के लिये सभी देशों और सभी कालों में सात स्वर नियत किए गए हैं। भारत में इन सातों स्वरों के नाम क्रम से षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद रखे गए हैं जिनके संक्षिप्त रूप सा, रे ग, म, प, ध और नि हैं।
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'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है

'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है

'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है। रंज् का अर्थ है रंगना। जिस तरह एक चित्रकार तस्वीर में रंग भरकर उसे सुंदर बनाता है, उसी तरह संगीतज्ञ मन और शरीर को संगीत के सुरों से रंगता ही तो हैं। रंग में रंगजाना मुहावरे का अर्थ ही है कि सब कुछ भुलाकर मगन हो जाना यालीन हो जाना। संगीत का भी यही असर होता है। जो रचना मनुष्य के मन को आनंद के रंग से रंग दे वही राग कहलाती है। Read More : 'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है about 'राग' शब्द संस्कृत की 'रंज्' धातु से बना है

भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी

भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी

भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी
Saturday, May 27, 2006
सात स्वर, अलंकार और हारमोनियम

भारतीय संगीत आधारित है स्वरों और ताल के अनुशासित प्रयोग पर। सात स्वरों के समुह को सप्तक कहा जाता है। भारतीय संगीत सप्तक के सात स्वर हैं-

सा(षडज), रे(ऋषभ), ग(गंधार), म(मध्यम), प(पंचम), ध(धैवत), नि(निषाद)

अर्थात

सा, रे, ग, म, प ध, नि Read More : भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी about भारतीय शास्त्रीय संगीत की जानकारी

रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है।

रागों की उत्पत्ति

हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है । रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। थाटों की संख्या गणित की दृष्टि से ‘72’ मानी गयी है किन्तु आज मुख्यतः ‘10’ थाटों का ही क्रियात्मिक प्रयोग किया जाता है जिन के नांम हैं बिलावल, कल्याण, खमाज, भैरव, भैरवी, काफी, आसावरी, पूर्वी, मारवा और तोडी हैं। प्रत्येक राग विशिष्ट समय पर किसी ना किसी विशिष्ट भाव (मूड – थीम) का घोतक है। राग शब्द सँस्कृत के बीज शब्द ‘रंज’ से लिया गया है। अतः प्रत्येक राग में स्वरों और उन के चलन के नियम हैं जिन का पालन करना अनिवार्य है अन्यथ्वा आपेक्षित भाव का सर्जन नहीं हो सकता। हिन्दूस्तानी संगीत में प्रत्येक राग अपने निर्धारि Read More : रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है। about रागों की उत्पत्ति ‘थाट’ से होती है।

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राग परिचय

स्वर परिचय
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स्वर और उनसे सम्बद्ध श्रुतियां 274 6
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संगीत के स्वर 864 0
स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय 307 0
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स्वर गान्धार का शास्त्रीय परिचय 262 0
स्वर मध्यम का शास्त्रीय परिचय 231 0
स्वर पञ्चम का शास्त्रीय परिचय 226 0
स्वर धैवत का शास्त्रीय परिचय 252 0
सामवेद व गान्धर्ववेद में स्वर 242 0
भारतीय शास्त्रीय संगीत
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हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति रागों पर आधारित है 941 1
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अलंकार- भारतीय शास्त्रीय संगीत 3,348 1
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भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है भारतीय शास्त्रीय संगीत। 318 0
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ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं 729 0
भारतीय संगीत 601 0
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राग परिचय
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आविर्भाव-तिरोभाव 1,658 2
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सुर की समझ गायकी के लिए बहुत जरूरी है. 1,453 1
राग भूपाली 2,038 1
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सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। 560 1
राग रागिनी पद्धति 2,152 1
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स्वर (संगीत) 1,116 0
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स्वर मालिका तथा लिपि 1,721 0
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वादी - संवादी 1,610 0
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रागों मे जातियां 2,333 0
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सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान 1,538 0
राग दरबारी कान्हड़ा 1,613 0
मध्यमग्राम-तान-बोधिनी 228 0
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संगीत और हमारा जीवन
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माइक्रोफोन के प्रकार : 896 2
अल्कोहल ड्रिंक्स - ये दोनों आपके गले के पक्के (पक्के मतलब वाकई पक्के) दुश्मन हैं 141 2
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अबुल फजल ने 22 नाड़ियों में सात स्वरों की व्याप्ति बताई जो इस प्रकार 299 0
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हमारे पूज्यनीय गुरु
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बड़े गुलाम अली खान: जिन्होंने गाने के लिए रफी और लता से 50 गुना फीस ली 54 2
ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, 651 2
तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय 733 1
पण्डित अजॉय चक्रबर्ती 44 1
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वीडियो
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नुसरत फतेह के द्वारा राग कलावती 448 2
मोरा सइयां 319 1
कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया 91 1
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मेवाती घराने की पहचान हैं पंडित जसराज 44 0
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काशी की गिरिजा 43 0
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लोक कला की ध्वजवाहिका 46 0
नाट्य शास्त्रानुसार नृतः, नृत्य, और नाट्य में तीन पक्ष हैं – 672 0
सिलेबस
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सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 343 0
सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 444 0
सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 307 0
सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 233 0