राग परिचय

राग- गौड़ सारंग

ठाठ - कल्याण (मतान्तर में कई लोग इसे विलावल ठाठ से उत्पन्न भी मानते हैं) 
दोनों मध्यम का प्रयोग 
गायन समय- दोपहर या मध्यान्ह काल 
वादी - ग
संवादी- ध 
जाति- सम्पूर्ण (*वक्र सम्पूर्ण- अर्थात आरोह व अवरोह में सभी स्वरों का प्रयोग *वक्र होता है)

*वक्र स्वर का अर्थ - जिस स्वर का प्रयोग सीधे न होकर घुमा कर किया जाए - उदाहरानार्थ 'सा रे ग म' सीधे न गा कर अगर 'सा रे ग रे म' गाया जाए तो ग वक्र स्वर हुआ क्योंकि ग के बाद सीधे म न लगा कर रे पर उतर कर फिर म लगा ) Read More : राग- गौड़ सारंग about राग- गौड़ सारंग

रागों मे जातियां

रागों मे जातियां

राग विवरण मे सुनते है अमुक राग अमुक जाति का है। "जाति" शब्द राग मे प्रयोग किये जाने वाले स्वरों की संख्या का बोध कराती है । रागों मे जातियां उनके आरोह तथा अवरोह मे प्रयोग होने वाले स्वरों की संख्या पर निर्धारित होती है।

दामोदर पंडित द्वारा रचित संगीत दर्पण मे कहा गया है……

ओडव: पंचभि:प्रोक्त: स्वरै: षडभिश्च षाडवा।
सम्पूर्ण सप्तभिर्ज्ञेय एवं रागास्त्रिधा मत: ॥

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शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व

शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में समयानुसार गायन प्रस्तुत करने की पद्धति है, तथा उत्तर भारतीय संगीत-पद्धति में रागों के गायन-वादन के विषय में समय का सिध्दांत प्राचीन काल से ही चला आ रहा है, जिसे हमारे प्राचीन पंडितों ने दो भागों में विभाजित किया है। प्रथम भाग दिन के बारह बजे से रात्रि के बारह बजे तक और दूसरा रात्रि के बारह बजे से दिन के बारह बजे तक माना गया है। इसमें प्रथम भाग को पूर्व भाग और दुसरे को उत्तर भाग कहा जाता है। इन भागों में जिन रागों का प्रयोग होता है, उन्हें सांगीतिक भाषा में “पूर्वांगवादी राग” और “उत्तरांगवादी राग” भी कहते है। जिन रागों का वादी स्वर जब सप्तक के पूर्वांग अर्थात Read More : शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व about शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व

राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान

राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान

राग- कम से कम पाँच और अधिक से अधिक ७ स्वरों से मिल कर बनता है राग। राग को गाया बजाया जाता है और ये कर्णप्रिय होता है। किसी राग विशेष को विभिन्न तरह से गा-बजा कर उसके लक्षण दिखाये जाते है, जैसे आलाप कर के या कोई बंदिश या गीत उस राग विशेष के स्वरों के अनुशासन में रहकर गा के आदि।

पकड़- पकड़ वह छोटा सा स्वर समुदाय है जिसे गाने-बजाने से किसी राग विशेष का बोध हो जाये। उदाहरणार्थ- प रे ग रे, .नि रे सा गाने से कल्याण राग का बोध होता है। Read More : राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान about राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान

कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है-

बागेश्री- विरहोत्कंठिता नारी का सजीव चित्रण

गुणक्री -वासक सज्जा नायिका

तोड़ी - विरह दग्धा, विरहिणी

ललित- खंडिता नारी (वियोग श्रृंगार)

रागेश्री- विप्रलब्धा

बहार- उत्साही युवक

जोगिया - वेदना, करूणा से भरी स्त्री

सोहनी- आवेश युक्त प्रेम कलह से उग्र

भैरवी - अनेक रंग, भक्ति, करूणा, विरह, खुशी।

दरबारी - प्रौढ़, गम्भीर, राजसी व्यक्तित्व वाला

अड़ाना - चंचल, उत्साही युवक

मारवा- वेदना ग्रस्त पुरूष

मालकौंस- शान्त, सौम्य

हिंडोल -आवेश युक्त, उग्र, उदभट Read More : कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है- about कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है-

वादी - संवादी

वादी और संवादी की परिभाषा, अनुवादी स्वर, विवादी स्वर, संवादी विश्लेषण, संवादी, राग वादी स्वर, samvadi swar, ठाट

राग एक माहौल या वातावरण विशेष का नाम है जो रंजक भी है। स्पष्ट रूप से इस वातावरण निर्मिती के केंद्र में वह स्वरावली है जो रागवाचक है इसे रागांग कहते हैं। इस रागांग का केंद्र बिंदु होता है वादी स्वर। इसे राग का जीव या प्राण स्वर भी कहा गया है। राग को राज्य की संज्ञा देकर वादी स्वर को उसका राजा कहा जाता है। स्पष्टतः वादी का प्रयोग अन्य स्वरों की अपेक्षा सर्वाधिक होता है तथा इस पर ठहराव भी अधिक होता है।
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थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या

बिलावल ठाट, कल्याण ठाट, खमाज ठाट, आसावरी ठाट, काफ़ी ठाट, भैरवी ठाट, भैरव ठाट, मारवा ठाट, पूर्वी ठाट, तोड़ी ठाट

सप्तक के 12 स्वरों में से 7 क्रमानुसार मुख्य स्वरों के उस समुदाय को थाट कहते हैं, जिससे राग उत्पन्न होते है। स्वरसप्तक, मेल, थाट, अथवा ठाट एक ही अर्थवाचक हैं। प्राचीन संस्कृत ग्रन्थों में मेल शब्द ही प्रयोग किया गया है। अभिनव राग मंजरी में कहा गया है– मेल स्वर समूह: स्याद्राग व्यंजन शक्तिमान, अर्थात् स्वरों के उस समूह को मेल या ठाट कहते हैं, जिसमें राग उत्पन्न करने की शक्ति हो।

थाट के लक्षण Read More : थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या about थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या

राग रागिनी पद्धति

राग रागिनी पद्धति

रागों के वर्गीकरण की यह परंपरागत पद्धति है। १९वीं सदी तक रागों का वर्गीकरण इसी पद्धति के अनुसार किया जाता था। हर एक राग का परिवार होता था। सब छः राग ही मानते थे, पर अनेक मतों के अनुसार उनके नामों में अन्तर होता था। इस पद्धति को मानने वालों के चार मत थे।

शिव मत
इसके अनुसार छः राग माने जाते थे। प्रत्येक की छः-छः रागिनियाँ तथा आठ पुत्र मानते थे। इस मत में मान्य छः राग-

1. राग भैरव, 2. राग श्री, 3. राग मेघ, 4. राग बसंत, 5. राग पंचम, 6. राग नट नारायण।

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राग परिचय

राग परिचय
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रागांग वर्गीकरण पद्धति एवं प्रमुख रागांग 4,869 45
रागों के प्रकार 5,151 10
सात स्वर, अलंकार सा, रे, ग, म, प ध, नि 11,820 8
स्वर (संगीत) 2,145 8
राग रागिनी पद्धति 2,978 7
रागांग राग वर्गीकरण से अभिप्राय 952 7
राग,पकड़,वर्ज्य स्वर,जाति,वादी स्वर,संवादी स्वर,अनुवादी स्वर,विवादी स्वर,आलाप,तान 1,184 5
राग ललित! 2,241 5
वादी - संवादी 2,871 5
राग 'भैरव':रूह को जगाता भोर का राग 1,745 3
रागो पर आधारित फ़िल्मी गीत 2,679 3
थाट,थाट के लक्षण,थाटों की संख्या 4,270 3
सुर की समझ गायकी के लिए बहुत जरूरी है. 2,266 3
राग मारू बिहाग का संक्षिप्त परिचय- 3,924 3
रागों मे जातियां 3,124 3
राग भूपाली 2,913 3
कुछ रागों की प्रकृति इस प्रकार उल्लेखित है- 1,241 3
स्वर मालिका तथा लिपि 2,723 3
संगीत संबंधी कुछ परिभाषा 3,486 3
ठुमरी : इसमें रस, रंग और भाव की प्रधानता होती है 1,431 2
राग दरबारी कान्हड़ा 2,350 2
शुद्ध स्वर 2,659 2
स्वर मालिका तथा लिपि 2,069 2
नाद का शाब्दिक अर्थ है -१. शब्द, ध्वनि, आवाज। 1,429 1
राग यमन (कल्याण) 2,643 1
रागों का विभाजन 693 1
सुर-ताल के साथ गणित को समझना आसान 2,253 1
शास्त्रीय संगीत में समय का महत्व 3,019 1
षड्जग्राम-तान बोधिनी 369 1
सप्तक क्रमानुसार सात शुद्ध स्वरों के समूह को कहते हैं। 847 1
राग- गौड़ सारंग 713 1
आविर्भाव-तिरोभाव 2,988 1
स्वन या ध्वनि भाषा की मूलभूत इकाई हैक्या है ? 1,256 0
टप्पा गायन : एक परिचय 847 0
‘राग’ शब्द संस्कृत की धातु 'रंज' से बना है 363 0
राग मुलतानी 942 0
सात स्वरों को ‘सप्तक’ कहा गया है 2,154 0
राग बहार 1,665 0
मध्यमग्राम-तान-बोधिनी 374 0
हमारे पूज्यनीय गुरु
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उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ां 1,057 7
तानसेन या मियां तानसेन या रामतनु पाण्डेय 1,118 2
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अमवा महुअवा के झूमे डरिया 369 1
रचन: श्री वल्लभाचार्य 1,323 1
अकबर और तानसेन 1,082 1
ओंकारनाथ ठाकुर (1897–1967) भारत के शिक्षाशास्त्री, 945 1
बैजू बावरा 1,012 1
बालमुरलीकृष्ण ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत और फिल्म संगीत 437 1
पण्डित अजॉय चक्रबर्ती 174 0
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भारतीय शास्त्रीय संगीत
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संगीत शास्त्र परिचय 4,040 7
ध्वनि विशेष को नाद कहते हैं 1,075 3
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वीडियो
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नुसरत फतेह के द्वारा राग कलावती 615 1
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कर्ण स्वर 514 0
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गुरु की परिभाषा 3,839 4
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माइक्रोफोन की हानि : 552 0
कंठध्वनि 849 0
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गुनगुनाइए गीत, याददाश्त रहेगी दुरुस्त 801 0
शास्त्रीय नृत्य
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कर्नाटक गायन शैली के प्रमुख रूप 294 2
सबसे पुराना माना जाता है ग्वालियर घराना 267 2
भारतीय नृत्य कला 2,018 2
राग क्या हैं 675 2
ठुमरी का नवनिर्माण 182 1
रागदारी: शास्त्रीय संगीत में घरानों का मतलब 262 1
जयपुर- अतरौली घराने की देन हैं एक से बढ़कर एक कलाकार 214 1
भारतीय शास्त्रीय संगीत का आधार: 237 1
राग भीमपलास और भीमपलास पर आधारित गीत 421 0
माइक्रोफोन का कार्य 747 0
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पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी 252 0
बेहद लोकप्रिय है शास्त्रीय गायकी का किराना घराना 194 0
आगरा का भी है अपना शास्त्रीय घराना 181 0
लता मंगेशकर का नाम : भारतीय संगीत की आत्मा 202 0
मेवाती घराने की पहचान हैं पंडित जसराज 208 0
नाट्य शास्त्रानुसार नृतः, नृत्य, और नाट्य में तीन पक्ष हैं – 1,057 0
शास्त्रीय संगीत क्या है 287 0
काशी की गिरिजा 175 0
लोक कला की ध्वजवाहिका 164 0
भरत नाट्यम - तमिलनाडु 487 0
लोक और शास्त्र के अन्तरालाप की देवी 149 0
कर्नाटक संगीत 339 0
क्या अलग था गिरिजा देवी की गायकी में 282 0
स्वर परिचय
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स्वर षड्ज का शास्त्रीय परिचय 488 1
स्वर ऋषभ का शास्त्रीय परिचय 480 1
स्वर गान्धार का शास्त्रीय परिचय 406 1
स्वर धैवत का शास्त्रीय परिचय 420 1
संगीत के स्वर 1,246 1
स्वर मध्यम का शास्त्रीय परिचय 343 0
स्वर पञ्चम का शास्त्रीय परिचय 338 0
स्वर निषाद का शास्त्रीय परिचय 389 0
स्वर और उनसे सम्बद्ध श्रुतियां 578 0
सामवेद व गान्धर्ववेद में स्वर 407 0
संगीत रत्नाकर के अनुसार स्वरों के कुल, जाति 780 0
हिंदुस्तानी संगीत के घराने
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संगीत घराने और उनकी विशेषताएं 5,696 1
भारत में संगीत शिक्षण 1,941 1
रामपुर सहसवां घराना भी है गायकी का मशहूर घराना 220 1
कैराना का किराना घराने से नाता 513 0
गुरु-शिष्य परम्परा 1,607 0
सिलेबस
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सिलेबस : प्रारंभिक महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 666 1
सिलेबस : मध्यमा महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 482 1
सिलेबस : सांगीत विनीत (मध्यमा पूर्व) महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 314 0
सिलेबस : उप विशारद महागुजरात गन्धर्व संगीत समिति 520 0